आइए ना हमरा बिहार में
यहां जातियां हैं. सबके पास लाठियां हैं. इनमें तेल पिलाने-चलाने का खेल चलता रहता है. जो जितना बड़ा जातिवादी, लाठीबाज, गलाबाज, चालबाज वह उतना ही लाजवाब माना जाता है. वही समर्थ होता है और जो समर्थ होता है, उसका दोष देखना महापाप होता है. खैर कुछ दृश्यों, परिदृश्यों पर गौर कीजिए.
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