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ओपिनियन

बताइये, यह तो हाल है! 6 साल से जिसे लेकर सोनिया-राहुल को क्या नहीं कहा गया, वह नॉट मेंटेनेबल है

नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने ईडी की प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट/चार्जशीट को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि यह शिकायत नॉट मेंटेनेबल है. इस केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत पांच लोग आरोपी हैं.

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एमपी, एमएलए जन सेवक हैं या ह्विप के गुलाम

संसद के दोनों सदनों में वंदे मातरम् और चुनाव सुधार पर विशेष चर्चा संपन्न हो गयी. वंदे मातरम् सरकार का एक रणनीतिक राजनीतिक प्रयोग था. उसने इस राष्ट्र गीत के डेढ़ सौ साल पूरा होने के उपलक्ष्य में संसद में चर्चा के बहाने गर्मी पैदा कर दी है. इस गर्मी की तपिश बंगाल में महसूस की गई या नहीं, इसका आकलन अगले साल वहां होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान ही हो पाएगा. लेकिन भाजपा का मकसद इस गीत पर चर्चा के बहाने राष्ट्र को खासतौर से बंगाल को झकझोरना था. इस गीत के लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी (बंधोपाध्याय) हैं जिनके प्रति बंगाल के भद्रलोक में आज भी आदर भाव है.

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यह न्याय नहीं है मी लार्ड!

कमाल है कि ऐसा या कोई भी आरोप पुलिस, यानी सरकार ही लगाती है! और आंकड़े गवाह हैं कि पुलिस लगभग आधे मामलों में कथित अपराधियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहती है. नतीजतन अदालतें उन्हें बाइज्जत या सबूतों के अभाव में बरी कर देती हैं! यहां तक कि सीबीआई भी अधिकतम 70  प्रतिशत मामलों में ही गिरफ्तार अभियुक्तों को सजा दिला पाती है!

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सिबिल आपका खराब होता है, उनके तो 16.35 लाख करोड़ राइट ऑफ हो गए

एक बात बताइए कि ये किसका पैसा है, जो बड़े उद्योगपतियों को कर्जे के रूप में दिया जाता है और फिर राइट ऑफ के बहाने माफ कर दिया जाता है? दरअसल, तेल तिल्ली से ही निकलता है, यह हमारे आपके खून पसीने की कमाई है, जिसे पेट्रोल डीजल पर टैक्स बढ़ा-बढ़ाकर वसूला जाता है और एक दिन सरकार सदन में कहती है कि वो पैसे तो आप भूल जाइए वह तो राइट ऑफ कर दिया गया है.

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हवा के पायलट की चिंता कर ली, जरा जमीन के पायलटों के हाल देखिए

इंडिगो संकट के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने कहा है कि हवाई यात्रा में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. यानी पायलटों और क्रू मेंबर्स की संख्या बढ़ानी ही होगी.

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काटे चाटे स्वान के दोउ भांति विपरीत

सूंघने का काम तो हम पत्रकार भी करते हैं. महत्वपूर्ण विस्फोटक खबरें उन्हीं पत्रकारों को मिलती हैं जिनके पास घ्राण शक्ति होता है. लेकिन हम अपनी जरुरत के हिसाब से न्यूज में व्यूज मिलाकर सब गुड़ गोबर कर देते हैं. सूंघने की शक्ति तो फालतू कुत्तों के पास भी होती है. लेकिन वे पाला बदलू-दरबदलू नेताओं की तरह होते हैं. इसलिए उन पर कोई विश्वास नहीं करता है. विश्वास जमाने के लिए नीतियों, सिद्धांतों और आदर्शों के प्रति संकल्पबद्ध रहना पड़ता है. ऐसा नहीं कि जो भी टुकड़ा फेंक दे, लपक लें और उसी का हो जायें.

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गोवा के जिस बिर्च नाइट क्लब में रांची के तीन युवक समेत 25 लोग मारे गए, उसका ब्रांच कांके रोड में भी खुलने वाला था

गोवा के बिर्च बाय रोमियो लेन में सिलेंडर विस्फोट के बाद आग लगने की घटना में अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है. मरने वालों में तीन युवक रांची के रहने वाले थे.

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इस्तांबुल व भारत का फर्क: यहां उपभोक्ता अधिकार चुटकुले से कम नहीं!

कुछ समय पूर्व जिस दिन ऑपरेशन सिंदूर हुआ मैं फ्लाइट में ही था. तुर्किश एयरवेज की फ्लाइट थी, इस्तांबुल से कनेक्शन था. पाकिस्तान के ऊपर का एयर स्पेस बंद हो गया तो दिल्ली से जाने वाली फ्लाइट लेट हुई, तो जाहिर सी बात है इस्तांबुल से आगे वाली फ्लाइट मिस हो गई.

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घातक हो सकता है शक्ति का दुरुपयोग

भारत पर आतंकियों का हमला होना कोई नई बात नहीं है. ये आतंकी क्या और कैसे होते हैं, इस संबंध में कुछ भी लिखना उचित नहीं है, क्योंकि ऐसा करना उनके प्रचार तंत्र का हिस्सा बनने के अलावा कुछ नहीं है.

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इंडिगो संकट : सब मिलकर मूर्ख बना रहे हैं!

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एविएशन मिनिस्ट्री, डीजीसीए और इंडिगो सभी को पता है कि कितने पायलट और क्रू मेंबर हैं, तो फिर नये नियम क्यों लागू किये गये. हजारों लोगों को क्यों अफरा-तफरा के माहौल में झोंक दिया गया? क्यों जानबूझ कर यात्रियों को परेशान किया गया. क्यों जलालत भरे वातावरण में लोगों को रहने के लिए मजबूर किया गया?

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बेटिंग एप, PMO को कंट्रोल करने वाले हिरेन जोशी व नवनीत सहगल का इस्तीफा

प्रधानमंत्री मोदी के लिए मीडिया मैनेजमेंट संभालने वाले हिरेन जोशी गायब बताये जा रहे हैं. वह प्रधानमंत्री कार्यालय में कम्युनिकेशंस और आईटी के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) हैं. उनके बदले अब सारे काम मंत्री अश्विनी वैष्णव देखेंगे.

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यह तस्वीर कभी आपने भी देखी है!

क्या गांधी ने 8 ऑस्कर अवॉर्ड जीते थे? आज एक गम्भीर फ़ैक्ट चेक की जाये. ऊपर दिख रही तस्वीर अक्सर वायरल होती रहती है. फेसबुक पर, इंस्टा पर और आपके वाट्सएप पर. जिसमें महात्मा गांधी एक सुंदर महिला के साथ नाच रहे हैं.

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हेमंत दिल्ली क्या गये, लगने लगे कयास, आज लौटेंगे, अटकलों पर लगेगा विराम!

सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है, यूट्यूब चैनल्स पर खूब आकलन किये जा रहे हैं. यह अलग बात है कि ना तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने, ना ही उनकी पार्टी झामुमो ने, ना कांग्रेस ने और ना ही भाजपा के किसी जिम्मेदार ने अब तक कुछ भी इशारा किया है. इस बीच झामुमो ने यह साफ कर दिया है कि सरकार के सभी साथी एकजुट हैं. यह घटना इस ओर भी इशारा करता है कि कैसे एक स्थिर सरकार के लिए अस्थिर माहौल बनाया जाता है और कैसे सरकार के घटकों के बीच अविश्वास को बढ़ाया जा सकता है. हेमंत सोरेन के पिछले कार्यकाल में भी चार साल तक यही सब चलता रहा था.

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90 दिन बाद सब होंगे सरकार की निगरानी में

भारत सरकार ने 28 नवंबर 2025 को एक आदेश जारी किया है. जिसमें कहा गया है कि हर भारतीय के फोन में संचार साथी ऐप (Sanchar Sathi App) का होना अनिवार्य होगा. अगले 90 दिनों में मोबाइल कंपनियां इसे सभी के मोबाइल में इंस्टॉल कर देंगी.

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सुप्रीम कोर्ट की दो टूक राय के आगे क्या

राज्यपालों की किसिम-किसिम की कारस्तानियों के कारण ही जनता के बीच यह सवाल भी कौंधता रहता है कि राज्यपालों यानी लाट साहबों की जरुरत ही क्या है? ये आखिर ऐसा कौन सा विधायी कार्य करते हैं जो राज्यों के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश नहीं कर सकते? राजभवनों को अमूमन निष्प्राण, बेकार हो चुके नेताओं का आश्रय स्थल बना दिया गया है. कहीं-कहीं पसंदीदा रिटायर नौकरशाह, हाकिम या मिलिट्री अफसर भी भेज दिये जाते हैं.

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