नेशनल हेराल्ड केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने ईडी की प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट/चार्जशीट को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि यह शिकायत नॉट मेंटेनेबल है. इस केस में सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत पांच लोग आरोपी हैं.
ईडी पिछले छह सालों यानी साल 2019 से इस केस की जांच कर रही थी. यह वही केस है, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ईडी ने कई दिनों तक पूछताछ की. और अब अदालत में जब यह मामला पहुंचा तो कोर्ट ने कह दिया कि यह शिकायत नॉट मेंटेनेबल है.
जरा सोंचिये. देश के ताकतवर लोगों के साथ जब यह खेल हो सकता है. जब सोनिया गांधी-राहुल गांधी तक से कई दिनों तक लगातार पूछताछ किया जा सकता है. सत्ता पक्ष द्वारा उनके जेल जाने की तैयारी कर लेने तक का राजनीतिक बयान जारी किया जा सकता है. प्रधानमंत्री तक इसी केस को लेकर जनसभाओं में गांधी परिवार को निशाना बना चुके हों.
राजनीति की निम्नतर सीमा पर जाकर एक परिवार को चोर बताया गया हो. तब देश की सबसे ताकतवर और प्रीमियम जांच एजेंसी ईडी की जांच कोर्ट में कुछ दिन भी नहीं ठहर पायी. तब आम लोगों का क्या हो सकता है, यह समझने की बात है.
कोर्ट ने कहा है कि ईडी का मामला बिना मूल अपराध के नहीं चल सकता. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह पाया है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मनी लांड्रिंग का मामला तभी वैध होता है, जब कोई प्रेडिकेट ऑफेंस (मूल अपराध) हुआ हो, जो प्राथिमिकी के माध्यम से दर्ज हो. किसी प्राइवेट शिकायत को इसकी जगह नहीं दी जा सकती. इस तरह यह मामला ईडी की शिकायत पर आधारित थी, जो कानूनी रुप से अस्वीकार्य है.
दरअसल, दिल्ली ईडी कोर्ट के इस फैसले ने सत्ता पक्ष के प्रोपोगेंडा की हवा निकाल दी है. साथ ही एक बार फिर से देश की सबसे ताकतवर और प्रीमियम जांच एजेंसी को सवालों के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है. आम लोगों के बीच यह संदेश गया है कि सत्ता पक्ष विपक्ष को झूठे मामलों में फंसाकर उन्हें बदनाम करती है.
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