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इस्तांबुल व भारत का फर्क: यहां उपभोक्ता अधिकार चुटकुले से कम नहीं!

कुछ समय पूर्व जिस दिन ऑपरेशन सिंदूर हुआ मैं फ्लाइट में ही था. तुर्किश एयरवेज की फ्लाइट थी, इस्तांबुल से कनेक्शन था. पाकिस्तान के ऊपर का एयर स्पेस बंद हो गया तो दिल्ली से जाने वाली फ्लाइट लेट हुई, तो जाहिर सी बात है इस्तांबुल से आगे वाली फ्लाइट मिस हो गई.
 

Nitin Tripathi

कुछ समय पूर्व जिस दिन ऑपरेशन सिंदूर हुआ मैं फ्लाइट में ही था. तुर्किश एयरवेज की फ्लाइट थी, इस्तांबुल से कनेक्शन था. पाकिस्तान के ऊपर का एयर स्पेस बंद हो गया तो दिल्ली से जाने वाली फ्लाइट लेट हुई, तो जाहिर सी बात है इस्तांबुल से आगे वाली फ्लाइट मिस हो गई.

 

अब आप देखिए कुछ विशेष नहीं करना पड़ा. इस्तांबुल एयरपोर्ट पर उतरा, तुर्किश एयरवेज काउंटर पर गया, उन्होंने बोला अगली फ्लाइट कल है. आप भारतीय नागरिक हैं नहीं तो आपको शहर में होटल में रोकते, पर चूंकि आपके पास वीजा न होगा तो एयरपोर्ट में ही लाउंज में रुकना, खाना सब हमारी ओर से. 

 

मैंने बताया मेरे पास टर्की का वीजा पहले से है, वह हंसी कि स्मार्ट मैन. तुरंत एयरवेज ने शहर में एक होटल अलॉट किया, बाहर टैक्सी जो होटल में छोड़ आई. अगले दिन सुबह नियत समय पर वह टैक्सी वापस एयरपोर्ट ले आयेगी. खाना रहना ट्रांसपोर्ट सब फ्री. हमने इसी बहाने टर्की भी घूम लिया. और इस सब के लिए मुझे एक बूंद बहस न करनी पड़ी, आवाज तक न ऊंची करनी पड़ी, यदि मैं कहता तो वो मुझे थोड़े पैसे, कपड़े आदि के लिए अलग से देते, जो मैंने कहना मुनासिब न समझा. 

 

ऐसे मौके एक नहीं, अनेक बार बाहर आए हैं और हर बार का यही अनुभव है. ऐसे मौके दसियों बार भारत में भी आए हैं. अधिकतर में एयरलाइन बता देगी कि अगली फ्लाइट तीन दिन बाद उपलब्ध है. और वह आपको समझायेंगे कि कैंसिल कर दे रहे हैं, पैसे वापस ले लो. ऐसा नहीं होता हाथ के हाथ दूसरी फ्लाइट बुक करें तो पांच गुना पैसे यही एयरलाइन लेगी. दो दिन बाद की फ्लाइट अगर ये दे भी रहे हैं तो एहसान नहीं है. रहना, खाना ट्रांसपोर्ट इसके खर्चे? झगड़ा करें तो कई बार थोड़ा बहुत अनमने मन से एहसान जता देते हैं. 

 

भारत में उपभोक्ता अधिकार एक चुटकुले से ज्यादा कुछ नहीं है. समस्या यह भी है कि यहां जनता दूसरे की परेशानी देख आह्लादित होती है. दूसरे लोग आपको समझाने आ जायेंगे, टैक्सी कर लो, ट्रेन से चले जाओ. अरे भाई कुछ उपभोक्ता के अधिकार, उसके समय की कीमत, भावनाओं की कीमत भी है कि नहीं. 

 

इंडिगो ने कल दिल्ली हवाई अड्डे से सौ प्रतिशत फ्लाइट कैंसिल कर दीं. बहुत हड़कंप मचा. नतीजा और चाहे जो हो किसी उपभोक्ता को मुआवजे में चवन्नी नहीं मिलनी. क्योंकि पचास चीजों पर बहस चल रही है, उपभोक्ता अधिकार और इस पर पेनल्टी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी का ध्यान ही नहीं.

डिस्क्लेमरः लेखक ओम सोल्यूशन नामक कंपनी के सीईओ हैं और यह लेख उनके सोशल मीडिया एकाउंट से लिया गया है.

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