रीजनल पार्टीज का गेम ओवर!
राजनीति विश्लेषक अब यह मान रहे हैं कि रीजनल पार्टियों में एक अलग तरह की बीमारी है. उनके पास संगठन जैसा कुछ खास होता नहीं है. जो होता है, वह परिवार और दो-चार विश्वस्त लोग.
Continue readingराजनीति विश्लेषक अब यह मान रहे हैं कि रीजनल पार्टियों में एक अलग तरह की बीमारी है. उनके पास संगठन जैसा कुछ खास होता नहीं है. जो होता है, वह परिवार और दो-चार विश्वस्त लोग.
Continue reading... और इस तरह BJD, BSP, SS, JDU, TRS, YSR, PDP, LJP, AAP के बाद TMC को वही अजगर खा गया. ममता बनर्जी जो बोईं वहीं काट रहीं हैं, इंडिया गठबंधन तोड़ कर उन्होंने जो बोया वही काट रहीं हैं. अब उनकी पार्टी के सांसदों का राघव चड्ढा होना तय है. सबकी बुनियाद एक ही है, सत्ता के लिए कुछ भी करेगा.
Continue readingSandeshkhali और आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसे मामलों ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गुस्सा और अविश्वास बढ़ाया और यहां कहानी सिर्फ अपराध की नहीं थी, बल्कि राज्य की प्रतिक्रिया की भी थी. जब शासन “संवेदनशील और निर्णायक” दिखने में चूकता है, तब हर घटना प्रतीक बन जाती है.
Continue readingयही हाल जनता दल का हुआ. बोफोर्स कांड के विरोध में पैदा-बना यह दल राजद, जद(यू), जद(एस) आदि में बंट चुका है. संभव है अन्ना आंदोलन से पैदा "आप" की "झाड़ू" भी तिनके-तिनके बिखर जाय. यह पार्टी भी ट्रांजेक्शनल है. इसकी न कोई विचारधारा है, न ध्येय, न मुद्दा. सिर्फ एक व्यक्ति इसे अपने हिसाब से हांक रहा है और व्यक्ति केंद्रित दल या तो खत्म हो जाते हैं या वंशवाद की चपेट में आ जाते हैं. कांग्रेस वंशवादी होते हुए भी बची है तो इस वजह से कि उसकी विचारधारा अभी पूरी तरह सूखी नहीं है. लेकिन "आप" का क्या होगा जनाब-ए-आली.
Continue readingइसे महज संयोग कहिएगा या झारखंड भाजपा का एक बड़ा प्रयोग कहिएगा कि वर्तमान में जितने भी नोटिफाइड पदाधिकारी है, जो कि 24 है और अध्यक्ष मिला के 25 है, जो हाल में ही 28 मार्च 2026 को जारी किया गया है.
Continue readingयह डॉ लोहिया के एक लेख का शीर्षक है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत में हजारों वर्षों से ‘हिंदू बनाम हिंदू’ का संघर्ष चलता रहा है- उदार हिंदू और अनुदार हिंदू के बीच. उनके अनुसार जब-जब अनुदान हिंदू की जीत होती है, भारत कमजोर होता है. उदार हिंदू जीतता है तो भारत समृद्ध और मजबूत होता है. हिंदू बनाम हिंदू का संघर्ष आज भी जारी है.
Continue readingजीतू मुंडा की बहन कालरा मुंडा की मौत जनवरी में हो गई थी. उसके पहले उसने मवेशी बेचे थे. 19,400 रुपये ओडिशा ग्रामीण बैंक में जमा थे. जीतू मुंडा ने कोशिश की कि ये पैसा निकल जाए. बैंक ने कहा, बहन की मौत का कोई सबूत लाओ. जीतू मुंडा समझ नहीं पाया कि यह सबूत क्या होता है, उसके कागज कैसे होते हैं? जीतू के पास एक ही सबूत था- बहन का शव जो कब्र में था. उसने कंकाल हो चुका यह शव कब्र से निकाला. उसे कंधों पर लेकर वह बैंक पहुंच गया.
Continue readingसुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बेहद गंभीर टिप्पणी की है. कोर्ट का मानना है कि ममता ने आठ जनवरी 2026 को चुनाव एजेंसी आई पैक के दफ्तर में इडी अधिकारियों की जांच प्रक्रिया में जिस तरह बाधा डाली, वह लोकतंत्र के लिए खतरा है. स्वतंत्र भारत में शीर्ष न्यायपालिका ने आज तक किसी भी मुख्यमंत्री के लिए ऐसी टिप्पणी नहीं की है. बावजूद इसके न ममता बनर्जी शर्मसार हैं, न उनके हिमायती और ना ही लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिन रात गाल बजाते बुद्धिवादी.
Continue readingबिहार की सियासत ने करवट ले ली है. राज्य में शासन-प्रशासन की नयी इबारत लिखने वाले इतिहास पुरुष नीतीश कुमार राकेश चौधरी को वस्तुतः सम्राट बनाकर राज्य सभा चले गये हैं. यह सम्राट हैं तो भाजपा के और पसंद भी अमित शाह के ही हैं, लेकिन उनकी ताजपोशी नीतीश की रजामंदी से हुई है. नीतीश ने अपने बूते संघर्ष, रणनीति और सामाजिक सरोकार के सम्मिश्रण से न केवल बीस साल तक सरकार चलायी, बल्कि राज्य को "नो रिटर्न एंड" से बाहर निकालकर उसे नयी पहचान दिलायी. हालांकि वह गफलत में भी फंसे और इधर-उधर भी भागे, लेकिन अंततः वह समझ गये कि भाजपा के साथ ही चलने में भलाई है.
Continue readingदिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. उन्होंने शराब घोटाला मामले में सीबीआी की रिवीजन पिटीशन की सुनवाई से दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के केस से खुद हट जाने (रिक्यूजल) को लेकर दो दिन पहले बहस की. इसके साथ ही उन्होंने एक शपथ पत्र दाखिल किया. बहस के दौरान उन्होंने कुल 10 दलीलें दी और मांग किया कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को केस से हट जाना चाहिए. उनकी बहस के बाद न्यायपालिका को लेकर देश भर में चर्चा है. पढ़ें, अरविंद केजरीवाल के दलील और पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार Sanjaya Kumar Singh की टिप्पणी.
Continue readingअब तक ईरान ने होर्मुज की खाड़ी में बाधा डाल रखी थी. ईरान-अमेरिका समझौता टूटने के बाद अमेरिका ने भी वहां से जहाजों को नहीं गुजरने देने की बात की है. ऐसे में यह दोहरा ब्लॉकेज भारत के लिए बड़ा संकट ला सकता है.
Continue readingआखिरकार हंगरी में विक्टर ओरबान के शासन का अंत हो गया. विक्टर ओरबान, जो पिछले 16 सालों से हंगरी का प्रधानमंत्री था. वही हंगरी, जो यूरोपियन यूनियन का एक देश है और जिसका पीएम विक्टर ओरबान रूस के राष्ट्रपति पुतिन का समर्थक.
Continue readingअसम, केरलम और पुडुचेरी विधानसभाओं के चुनाव संपन्न हो गये हैं. तमिलनाडु में तेईस अप्रैल को वोट पड़ेंगे. बंगाल के मतदाता तेईस और उन्नतीस अप्रैल को अपनी सरकार चुनेंगे. सभी राज्यों के नतीजे चार मई को आयेंगे. लेकिन असम और केरलम में जिस स्तर पर चुनाव प्रचार हुआ, वह संसदीय जनतंत्र के लिए शोचनीय है. लोकलाज तो गायब था ही, मर्यादाएं भी टूट गयीं.
Continue readingझारखंड का इतिहास प्राचीन जनजाति संस्कृति, समृद्धि, खनिजों और लंबी औपनिवेशिक व प्रशासनिक संघर्षों की कहानी है. बहुरंगी संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण झारखंड प्रदेश सदा से ही आकर्षक और जिज्ञासा का केंद्र रहा है. 1912 से 2000 तक झारखंड आंदोलन का इतिहास एक अलग आदिवासी राज्य के लिए संघर्ष का रहा, जो 20वीं शदी में ढाका छात्रसंघ आंदोलन 1912 से शुरू होकर 15 नवंबर 2000 को पृथक राज्य बनने तक चला. यह आंदोलन औपनिवेशिक शासन, भूमि, आत्म स्वभाव और आदिवासी पहचान की रक्षा के लिए छोटानागपुर उन्नत समाज 1928, आदिवासी महासभा 1938 और 1986 जैसे प्रमुख चरणों से गुजरा है.
Continue readingहमारा देश रुरल नक्सल से मुक्त हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बाबत 30 मार्च को लोकसभा में यह घोषणा की. उन्होंने 24 अगस्त 2024 को देश से नक्सलवाद के सफाये की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की थी. इससे एक दिन पहले ही उन्होंने संसद को बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में 706 नक्सली मारे गये हैं और 4839 ने सरेंडर किया है, जबकि 2218 गिरफ्तार किये गये हैं. अमित शाह ने यह भी कहा कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद देश को विस्तृत जानकारी दी जाएगी. उन्होंने साफ कर दिया है कि अब हथियार उठानेवालों को उनकी ही भाषा में समझाया जाएगा.
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