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ओपिनियन

चीनी कम है-सरकार का फेल्योर या शुगर लॉबी?

देश में चीनी कम है. पिछले 15-20 दिनों के भीतर चीनी की कीमत 45 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65-70 रुपये तक पहुंच गई है. यानी चीनी की किल्लत है. ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार की चिंता बढ़ गई और 20 जुलाई को 10 लाख टन चीनी आयात (विदेश से खरीद) करने का निर्णय ले लिया. यह बताने जताने की कोशिश की गई कि आम जनता की परेशानी से सरकार बहुत चिंतित है. लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि चीनी की कीमतें बढ़ीं ही क्यों?

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बिना विचारे जो करे सो पाछे पछताय

बैजनाथ मिश्र भाजपा के नेता, प्रवक्ता अमूमन कहते रहते हैं कि उसके स्टार प्रचारक राहुल गांधी ही हैं. जब कभी ऐसा लगता है कि भाजपा की हालत पतली है, वह हार सकती है तब भये प्रकट कृपाला की तरह राहुल गांधी अपनी करनी-कथनी से कुछ ऐसा कर गुजरते हैं कि भाजपाई मुस्कराने लगते हैं और सियासत नयी अंगड़ाई लेने लगती है.

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सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, बेकार युवाओं के बोझ बनने का है

आज छात्र सड़कों पर हैं. पढ़े-लिखे हैं. भविष्य देख सकते हैं. इसलिए वह गुस्से में हैं. गुस्सा सिर्फ सरकारी नौकरी में घपले-घोटाले से नहीं है. असल में उनकी गुस्सा इस बात से है कि वह बेकार हैं और अगले कुछ सालों में उनकी पीढ़ी इसी हाल में जीते-जीते बोझ बन जाएंगे. झारखंड की ही बात करें, तो नीचे के आंकड़े को देखें, आपको पता चलेगा यह सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि बारूद है.

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कोचिंग सरकार की विफलता का प्रोडक्ट है, कारण नहीं

जब युवाओ और बच्चों ने एजुकेशन को बड़ा मुद्दा बना दिया तो सरकारों के लिए यह आउट ऑफ़ सिलेबस विषय हो गया! हिन्दू-मुस्लिम, बाहरी-भीतरी या जातिवाद जैसे मुद्दों पर नारा लगाकर राजनीति करने वाले राजनितिक दलों के सामने अजीब दुविधा की स्थिति पैदा होने लगी है!फिलहाल उनके लिए इजी टारगेट और एग्जिट रूट कोचिंग वाले हैं! उनकी नजर में सिर्फ कोचिंग वाले ही एजुकेशन सिस्टम को करप्ट करने उसे कमर्शियल बनाने वाले हैं!

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जिसके साथ जेन जी, वही जिंदाबाद

देश के युवा संसद को घेरने पहुंचे, वह संसद के चौखट तक पहुंच गये. मोदी सरकार को 12 साल में पहली बार झुकना पड़ा. पहली बार किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ. केंद्र सरकार पहली बार बैकफुट पर है. 10 अगस्त को झारखंड में छात्र विधानसभा घेरने पहुंचे. उन्हें रोकने के तमाम बंदोबस्त धरे के धरे रह गए, छात्र विधानसभा के गेट पर पहुंच गये. हेमंत सरकार हतप्रभ है. ऐसा ना दिल्ली में पहले कभी हुआ, न झारखंड में.

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बेशऊर इरफान का क्या करेंगे राहुल जी!

सच कहें तो झारखंड का मामला पेपर लीक से बड़ा है. यहां नौकरी के लिए ली गयी परीक्षाओं में धांधली की गयी है और राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा की गयी कार्रवाई से इसकी पुष्टि भी हो रही है. निष्फल वार्ताओं का दौर जारी है.

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OPINION : कश्मीर में 'जश्न'!

पिछले चुनावों में नेशनल कांफ्रेंस की सरकार बनी, मगर वास्तविक सत्ता उप-राज्यपाल में निहित है. इसी कारण यह संभव हुआ कि पांच अगस्त को विपक्षी दल भाजपा को 'जश्न' मनाने के लिए प्रदर्शन की अनुमति मिली, मगर 'सत्ताधारी' नेशनल कांफ्रेंस को श्रीनगर में अपने पार्टी हेडक्वार्टर से विरोध मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी गयी! खबरों के मुताबिक, पार्टी नेताओं और विधायकों ने पार्टी ऑफिस के अंदर ही धरना दिया, क्योंकि पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने सुबह ही पार्टी मुख्यालय का मुख्य गेट बंद कर दिया था.

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क्यों ना नाराज हों Gen Z और Gen α - तीन : सरकारों ने हर दिन बंद किए 25 स्कूल

जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद ऐसी खबरें आ रही हैं कि जेन जी (Gen Z) और जेन अल्फा (Gen α) सरकार व सिस्टम से नाराज हैं. Gen Z और Gen α यानी 1997 से 2024 के बीच जन्म लेने वाले युवा. उनकी नाराजगी की कई वजहें हैं, लेकिन एक वजह जो खुल कर सामने आ रही है वह है सरकारी स्कूलों का बंद होना और सरकारी स्कूलों में बदइंतजामी का.

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साधो देखो जग बौराना

नीट पर्चा लीक मामले पर मचा कोहराम थम गया है. लेकिन इस पूरे प्रकरण में जो सवाल तैर रहे हैं, उनके जवाब मांगे, ढ़ूंढ़े जा रहे हैं. पहला सवाल तो यही है कि भाजपा के आत्ममुग्ध चाणक्य हैं कहां? न तिलचट्टों के उपद्रव के दौरान कहीं कुछ करते दिखाई दिये, ना ही लोकसभा में उस धांसू विधेयक पर बहस के दौरान जिसके बारे में सरकार कह रही है कि अब पर्चा लीक नहीं होगा. इस विधेयक के जरिये ऐसा कठोर कानून बनाया गया है कि धंधेबाजों की रूह कांप जाएगी. अगर ऐसा ही है तो यह कानून पहले क्यों नहीं बना दिया गया?

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प्रशांत किशोर की जीत पर दो टिप्पणीः भाजपा ने जीतने दिया या जातिवादी हिन्दुओं की जीत

बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनसुराज पार्टी के अध्यक्ष प्रशांत किशोर की जीत पर हर तरफ चर्चा है. सभी अपने-अपने तर्क दे रहे हैं. अपनी-अपनी टिप्पणी दे रहे हैं. ऐसे में देश के दो वरिष्ठ पत्रकार Sanjaya Kumar Singh और Prashant Tandon की टिप्पणी को समझना दिलचस्प है.

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प्रियंका गांधी पर नाराज देश के शीर्ष शिक्षाविद!

खबरों के मुताबिक कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की एक टिप्पणी को लेकर 215 कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और शिक्षाविदों ने खुला पत्र लिख कर नाराजगी जताई है. उन्होंने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के सम्मान, अकादमिक गरिमा और तर्क आधारित सार्वजनिक विमर्श को बनाये रखने की अपील की है.

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गाली पुराण, उर्फ गाली संस्कृति!

ये कौन लोग हैं? आम तौर पर खाते पीते घरों के बच्चे हैं, हिंदी पट्टी के परिवारों के हैं, जिनमें अधिकतर मोदी और भाजपा को पसंद करते रहे होंगे. यह भी मान कर चलना चाहिए कि ये संघ की ‘विचारधारा’ से प्रभावित होंगे! 'संस्कारित' होंगे.... आगे पढ़ें...

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प्रोटेस्ट, पॉलिटिक्स और अराजकता का कॉकटेल

बीती बीस और इक्कीस जुलाई को देश की राजधानी दिल्ली में जो शर्मनाक और शोचनीय घटनाएं हुईं, उनकी अनुगूंज वर्षों तक सुनाई देगी. इन घटनाओं ने देश के प्रत्येक निरपेक्ष और विवेकशील नागरिक को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हम कहां थे और कहां पहुंच गये हैं. इन घटनाओं की जड़ में नीट परीक्षा का पेपर लीक है, लेकिन इनके कारकों और उत्प्रेरकों ने अपने-अपने हिस्से की राजनीति चमकाने के चक्कर में शर्मसार कर दिया है.

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गुस्से में क्यों हैं युवा-दो : इंटर्न को मिला 54.3 करोड़ और प्रचार पर खर्च 46.7 करोड़

देश के युवा (जेन जी) गुस्से में हैं. हताश हैं. सरकार से नाराज हैं. सिर्फ एक आंदोलन या एक इस्तीफे से उनका गुस्सा, आक्रोश खत्म नहीं होगा. वह गुस्से में क्यों हैं, क्यों आत्महत्या कर रहे हैं? इसके कारणों को जानना जरुरी है. इसके लिए हमने एक सीरिज शुरु की है. आप भी कमेंट बॉक्स में लिख कर अन्य कारणों को गिना सकते हैं. बेरोजगार युवक अपनी कहानी लिख सकते हैं.

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गुस्से में क्यों है युवा-एक :  11 साल, 1.45 लाख आत्महत्या

देश के युवा (जेन जी) गुस्से में हैं. हताश हैं. सरकार से नाराज हैं. सिर्फ एक आंदोलन या एक इस्तीफे से उनका गुस्सा, आक्रोश खत्म नहीं होगा. उन्हें अब पुलिस के डंडे से डर नहीं लगता. वह गुस्से में क्यों हैं? इसके कारणों को जानना जरुरी है. इसके लिए हमने एक सीरिज शुरु की है. आप भी कमेंट बॉक्स में लिख कर अन्य कारणों को गिना सकते हैं. बेरोजगार युवक अपनी कहानी लिख सकते हैं.

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