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ओपिनियन

पार्टियां टूट रहीं, पर भाजपा में विलय नहीं, भाजपा के पक्ष में बन रहा थर्ड फ्रंट

क्षेत्रीय दलों की टूट में भाजपा की भूमिका रहती है. लेकिन भाजपा किसी भी पार्टी को अपनी पार्टी में विलय नहीं कराती. टूटे हुए दल भाजपा की सहयोगी पार्टी के रूप में सामने आते हैं. ऐसा लगता है देश में एक तीसरा फ्रंट बन तो रहा है, लेकिन सत्ता के खिलाफ नहीं, बल्कि सत्ता के पक्ष में.

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बरसे कम्बल भीगे पानी

दुष्यंत के शब्दों में कहें तो "हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए." यानी इस घिनौने खेल को रोकने के लिए नया संविधान संशोधन होना चाहिए. आखिर यह व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए कि दल बदल करने वाले को सदन से त्यागपत्र देना होगा. क्या हमारे राजनीतिक दल इसके लिए एकमत होंगे या किसी दल या नेता की तरफ से ऐसी कोई मांग उठेगी? नहीं तो क्या छूत की यह बीमारी फैलती ही जाएगी, दुनिया का हमारा विशाल लोकतंत्र बेबस ही बना रहेगा? और हमारे सांसद-विधायक जरूरी संख्या जुटाकर पलटी मारते रहेंगे?

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झारखंड स्वास्थ्य विभागः ये जो गड़बड़ियों की खबरें हैं, सरकार का सिरदर्द बनेगा

दवाईयों की खरीद में घपला, एंबुलेंस खरीद में गड़बड़ी, एंबुलेंस का संचालन सही नहीं, रिम्स की वित्तीय हालत खराब. यह सारी खबरें मीडिया में हैं. तो क्या झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में कोई सिंडिकेट काम कर रहा है? जो हर खरीद के मामलों में बिचौलिया की भूमिका निभा रहा है और सरकारी राशि का गबन कर रहा है. निश्चित रूप से इसमें विभाग के अधिकारी और मंत्रालय तक में बैठे लोग शामिल हैं. इस विभाग के जो मंत्री हैं उनका नाम इरफान अंसारी है. यह जानना दिलचस्प होगा कि वह किन-किन लोगों से घिरे रह रहे हैं.

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encounter, यह fast food justice है, food poisoning का खतरा हमेशा रहता है

IPS अधिकारी अभयानंद, जिन्होंने नीतीश के पहले कार्यकाल में कानूनी तरीकों से बिहार में अपराध नियंत्रण किया, उनसे जब पूछा गया तो उन्होंने कहा- "अगर सरकार encounter की वकालत करती है तो विधानसभा में कानून पारित करे. ये नहीं कि पुलिस के मत्थे सब मढ़ दें. जो encounter पसंद आए वह ठीक, जो न आए उसमें पुलिस पर गाज गिरे."

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सिस्टम का फेल्योर है या 2018 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी को बदनाम किया गया था?

निर्मल हृदय आश्रम दशकों से काम कर रहा है. आश्रम में बच्चों को रखा जाता है, उनका पालन-पोषण किया जाता है. हर धर्म और तबके के लोगों में इस आश्रम के प्रति सम्मान का भाव रहा है. लेकिन ऐसा क्या हुआ कि वर्ष 2018 में इसी संस्था को बच्चों की खरीद-बिक्री जैसे गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा? संस्था की बदनामी हुई, उसकी साख को नुकसान पहुंचा. अब अदालत ने संबंधित लोगों को निर्दोष माना है.

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टिप्पणीः कांग्रेस ने सीट तो गंवाई ही, अब इज्जत भी गंवा रही

कांग्रेस का हाल हो गया, खाया-पिआ कुछ नहीं गिलास तोड़ा बारह आने. इससे तो बेहतर था कि वह प्रत्याशी ही न देती. गौर करने की बात यह भी है कि गठबंधन में रायशुमारी के पहले ही कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी थी. इस बात को लेकर भी नाराजगी के स्वर फूटे थे. चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक के जो लोग विपक्षी खेमे से पांच वोट इधर आने की बात कह रहे थे, उनको बताना चाहिए कि आठ वोट इधर से उधर कैसे हो गये!

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कानून का दायरा भूलती हमारी पुलिस और हम

दो दिन पहले की घटना है. बिहार के भोजपुर में भरत तिवारी नामक युवक ने पुलिस पर पिस्तौल ताना. फिर सरेंडर कर दिया. आरोप है कि पुलिस ने सरेंडर करने के बाद उसका एनकाउंटर कर दिया. इसके खिलाफ भोजपुर जल उठा. लोग सड़क पर उतर आये. बिहार सरकार के मंत्री तक ने एनकाउंटर पर सवाल खड़ा किया. अब पूरे मामले की जांच हो रही है.

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राज्यसभा चुनाव-2026 : गंगाधर ही शक्तिमान है!

राज्यसभा चुनाव-2026 संपन्न हो गया है. झारखंड में भाजपा समर्थित प्रत्याशी परिमल नाथवानी जीत गए. झामुमो के प्रत्याशी बैजनाथ राम भी सांसद बन गए. इंडिया गंठबंधन के पास जीत के लिए पर्याप्त वोट (56) रहते हुए भी कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा हार गए. काहे कि भीतरघात हुआ.

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आखिर क्यों बना झारखंड देश के सबसे चर्चित राज्यसभा चुनाव का केंद्र?

Ranchi : राज्य सभा चुनाव-2026 में अगर किसी राज्य ने सबसे ज्यादा राजनीतिक सुर्खियां बटोरी हैं, तो वह झारखंड है. मतदान से पहले जिस तरह की राजनीतिक गतिविधियां, रणनीतिक बैठकें, आरोप-प्रत्यारोप, दावे-प्रतिदावे और क्रॉस-वोटिंग की चर्चाएं सामने आईं, उसने झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया.

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राज्यसभा चुनावः फिर बिक गये माननीय!

जैसा की अंदेशा था- परिमल नाथवानी राज्यसभा चुनाव जीत गये हैं. विधायकों की अंतरात्मा की वह आवाज जीत गयी, जिसे अक्सर नोटों से तौला जाता रहा है. इसके साथ ही हार गई पार्टी के प्रति निष्ठा, दल या गंठबंधन के लिए लिया गया वचन और झारखंड में एक सीट जीत कर भी हार गया इंडिया गंठबंधन. हारा झामुमो और कांग्रेस भी.

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आज कयामत की रात है, कल भांडा फूटने का दिन

वोटर जो भी खायें पियें. इससे किसी को क्या लेना-देना. आम वोटर, खास की मौज मस्ती की खबरें पढ़ कर जलें या भुने. उनकी मर्जी. इसके किसी को क्या. कल सुबह होते ही खास वोटरों को Luxury सवारी से बूथ तक लाया जायेगा. वहां उन्हें अपनी मर्जी से वोट देना है. रात के मॉक ड्रिल का हश्र क्या होगा? कोई नहीं जानता. वोटरों पर पांच सितारा होटलों की मौज मस्ती की खुमारी कल तक रहेगी या नहीं. इसका भांडा तो कल फूटेगा.

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इसी का नाम दुर्दशा है ममता जी!

देश में मानसून की रफ्तार धीमी है. लेकिन चार मई के बाद से बंगाल की खाड़ी में जो सियासी विक्षोभ चक्रवाती रुप धारण कर चुका है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है. यह चक्रवात प्रलयंकारी बारिश कर रहा है. इसमें बंगाल तो हलकान हो ही गया है, दिल्ली में भी हलचल तेज हो गयी है. भारत के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य में पंद्रह साल राज करने वाली पार्टी एक पराजय में ही खत्म होने जा रही है.

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2026 का राज्यसभा चुनाव या भाजपा के लिए 2029 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल!

भाजपा की नजर केवल एक राज्यसभा सीट पर नहीं होगी. पार्टी यह देखेगी कि क्या वह अगले तीन वर्षों में खुद को सत्ता के विकल्प के रूप में स्थापित कर सकती है. इसके लिए 2026 का राज्यसभा चुनाव, 2027-28 के स्थानीय निकाय चुनाव, संभावित उपचुनाव और संगठन विस्तार अभियान एक लंबी रणनीति के हिस्से होंगे. यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में 2026 के राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा सिर्फ संसद की सीटों तक सीमित नहीं है. यह चुनाव इस बात का संकेत भी देगा कि 2029 के महासंग्राम की जमीन किस दिशा में तैयार हो रही है. यह उस मुकाबले की पहली बड़ी राजनीतिक रिहर्सल है. और राजनीति में कई बार रिहर्सल ही बता देती है कि मंच पर असली प्रदर्शन कैसा होने वाला है.

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राज्य सभा चुनाव- 2026 : ... आप आये तो चुनाव में बहार आयी

Ranchi : राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद भी सन्नाटा था. महफिल में रौनक नहीं थी. चारों तरफ मुर्दनी छायी थी. आप आये तो बहार आ गयी. महफिल में रौनक छा गयी. हरकत के साथ हर दिन की धड़कन तेज हो गया. लोग सोचने लगे पता नहीं अब क्या होगा? वजह निर्दलीय होने के बावजूद आपका सर्वदलीय होना है.

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