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खामेनेई की मौत: क्या सब लिखा जा रहा है अंतरराष्ट्रीय मीडिया में

Lagatar Desk

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व को एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा कर दिया है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता की हत्या के साथ 1979 की इस्लामिक क्रांति का सबसे लंबा और सबसे प्रभावशाली अध्याय समाप्त हो गया. अब सवाल यह है कि इस घटना का क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा? खामनेई की मौत पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने अलग-अलग तरह की टिप्पणी दी है. 

 

तत्काल प्रभाव: सत्ता का शून्य और अस्थिरता

ईरान में सत्ता हस्तांतरण हमेशा से अपारदर्शी रहा है. खामेनेई ने कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं नामित किया था. उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई या आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के कट्टरपंथी तत्व संभवतः सत्ता संभाल सकते हैं, लेकिन अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार कई संभावित उम्मीदवार पहले ही निशाने पर आ चुके हैं. इससे सत्ता संघर्ष, आंतरिक कलह और जन आंदोलनों की संभावना बढ़ गई है. जनवरी 2026 के दमन के बाद पहले से आक्रोशित ईरानी जनता अब सड़कों पर उतर सकती है. अगर आईआरजीसी कठोर नियंत्रण रखने में नाकाम रहा तो गृहयुद्ध या विखंडन की स्थिति बन सकती है, जो लाखों शरणार्थियों और क्षेत्रीय अस्थिरता को जन्म देगी.

 

प्रॉक्सी नेटवर्क का पतन

खामेनेई की सबसे बड़ी विरासत ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ थी. हिजबुल्लाह, हूती, हमास, इराकी मिलिशिया और सीरिया में असद शासन को दी गई अरबों डॉलर की मदद. लेकिन 2024-25 में इजरायल के हमलों ने इस धुरी को बुरी तरह कमजोर कर दिया. हिजबुल्लाह का नेतृत्व खत्म, हमास की सैन्य क्षमता ध्वस्त, असद का पतन और हूतियों पर अमेरिकी दबाव बढ़ा. खामेनेई की मौत के बाद ईरान की आर्थिक तंगी और सैन्य क्षति के कारण इन प्रॉक्सी को अब पहले जितनी मदद नहीं मिल पाएगी. लेबनान, यमन, इराक और गाजा में ईरानी प्रभाव तेजी से घटेगा. इससे इजरायल को राहत मिलेगी और क्षेत्र में ‘शिया क्रिसेंट’ का विस्तार रुक जाएगा.

 

सुन्नी अरब देशों और इजरायल का फायदा

सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों ने आधिकारिक तौर पर चिंता जताई है, लेकिन गुप्त रूप से वे इस घटना को सांस की राहत मान रहे हैं. अब इजरायल के साथ अब्राहम समझौते का विस्तार और ईरान-विरोधी गठबंधन मजबूत हो सकता है. तेल की कीमतें अस्थिर हो सकती हैं, लेकिन लंबे समय में ईरानी खतरे के कम होने से क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ेगी. हालांकि अगर ईरान विखंडित हुआ तो शरणार्थी संकट और आतंकवाद का नया रूप उभर सकता है.

 

अमेरिका-इजरायल की रणनीति और जोखिम

ट्रंप प्रशासन इसे अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक-सैन्य सफलता बता रहा है. हमले का मकसद सिर्फ खामेनेई को मारना नहीं, बल्कि पूरे शासन को कमजोर करना था. अब न्यूक्लियर कार्यक्रम पर नई बातचीत या पूर्ण तहस-नहस की संभावना है. लेकिन जोखिम भी कम नहीं है, ईरान ने जवाबी मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं, जो कुवैत, बहरीन और इजरायल तक पहुंचे. अगर नया नेतृत्व और कट्टर हुआ तो क्षेत्रीय युद्ध लंबा खिंच सकता है.

 

लंबे समय का असर

खामेनेई की मौत मध्य पूर्व के शक्ति संतुलन को बदल सकती है. अगर ईरान में लोकतांत्रिक या मध्यमार्गी परिवर्तन हुआ तो क्षेत्र में शांति की नई संभावनाएं खुलेंगी. लेकिन सबसे संभावित परिदृश्य आईआरजीसी की सैन्य तानाशाही है, जो क्रांति की विचारधारा को कायम रखेगी. फिर भी आर्थिक संकट और जन आक्रोश के कारण यह व्यवस्था भी टिक पाना मुश्किल होगा.

कुल मिलाकर, खामेनेई की मौत ईरान के लिए अंत और मध्य पूर्व के लिए शुरूआत है. यह क्षेत्र को अस्थिरता, तेल संकट और नए गठबंधनों की ओर ले जा सकती है. अगले कुछ हफ्तों में ईरान की सड़कें और क्षेत्रीय राजधानियों के फैसले तय करेंगे कि यह बदलाव शांति की ओर ले जाएगा या नई जंग की. फिलहाल, मध्य पूर्व सांस रोके खड़ा है- एक युग समाप्त हुआ है, नया अभी लिखा जाना बाकी है.

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