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अमेरिका को बस कठपुतली चाहिए

अमेरिका किस बेशर्मी से झूठ बोलता रहा है, इसका एक नमूना- आज अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि अमेरिका ने युद्ध शुरू नहीं किया है. यह भी कहा कि यह युद्ध ईरान में रिजीम बदलने के लिए नहीं हो रहा है, जबकि ट्रंप लगातार यह बात कहते रहे हैं. हालांकि हेगसेथ ने यह भी कह दिया कि रिजीम बदलेगा जरूर. जबकि अब यह बात सामने आ चुकी है कि ईरान पर हमले के दो दिन पहले अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हो रही थी और लगभग पक्की खबर है कि दोनों के बीच अधिकतर बिंदुओं पर सहमति हो चुकी थी. मगर ट्रंप ने उस संभावित संधि को अचानक, बिना कोई कारण बताये रिजेक्ट कर दिया!
 

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श्रीनिवास

अमेरिका किस बेशर्मी से झूठ बोलता रहा है, इसका एक नमूना- आज अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि अमेरिका ने युद्ध शुरू नहीं किया है. यह भी कहा कि यह युद्ध ईरान में रिजीम बदलने के लिए नहीं हो रहा है, जबकि ट्रंप लगातार यह बात कहते रहे हैं. हालांकि हेगसेथ ने यह भी कह दिया कि रिजीम बदलेगा जरूर. जबकि अब यह बात सामने आ चुकी है कि ईरान पर हमले के दो दिन पहले अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हो रही थी और लगभग पक्की खबर है कि दोनों के बीच अधिकतर बिंदुओं पर सहमति हो चुकी थी. मगर ट्रंप ने उस संभावित संधि को अचानक, बिना कोई कारण बताये रिजेक्ट कर दिया!

 

मतलब हमले का फैसला हो चुका था- किसी बहाने की जरूरत भी नहीं थी. ट्रंप ने अपने स्वार्थ में, ईरान को ही नहीं, अपने देश की संसद को भी धोखे में रख कर हमला कर दिया. लेकिन ने कहा कि ईरान के पास शांति समझौते का पूरा मौका था, लेकिन उसने वह खो दिया! अमेरिकी रक्षा मंत्री ने दुनिया को ज्ञान देते हुए कहा- यह समझना चाहिए कि ईरान जैसे देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते हैं. 

 

यह अमेरिका या कोई भी देश तय करेगा के किस देश के पास कैसे हथियार हो सकते हैं? ईरान तो परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा था या है, मगर पाकिस्तान तो बना चुका. शायद ही किसी को शक हो कि पाकिस्तान एक अविश्वसनीय देश है. फौज के नियंत्रण में है. एक तरफ सऊदी अरब पर ईरान का हमला होने पर सऊदी अरब के साथ है, दूसरी ओर ईरान पर हमला करने वाले अमेरिका के साथ भी खड़ा है! जाहिर है कि चूंकि वह अमेरिका के पाले में (या उसका पालतू) इसलिए उससे विश्व को कोई खतरा नहीं है!

 

वैसे ट्रंप के पास इतराने के दिन बहुत दिन शायद नहीं हैं- युद्ध लंबा खिंच गया तो अपने देश में उनके लिए संकट खड़ा हो सकता है. और ईरान फिलहाल तो आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं दिख रहा. वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसके मित्र देशों पर लगातार हमला कर रहा है. खामेनेई की हत्या को वह बड़ी ‘उपलब्धि’ भले ही माने, जो है भी, लेकिन कल यदि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में थोड़े भी अमेरिकी सैनिकों को मार गिराया और उनके शव अमेरिका पहुंचने लगें, तो ट्रंप को बहुत भारी पड़ सकता है. आधिकारिक खबर है कि कम से कम तान शव पहुंच भी गये हैं.

 

खबर यह भी है कि ईरान ने तीन अमेरिकी जेट मार गिराये हैं. हालांकि अमेरिका ने कहा है कि उसका एक लड़ाकू विमान गलतफहमी में नष्ट हुआ है. एक युद्ध पोत को भी भारी नुकसान होने की सूचना है. विएतनाम युद्ध के बाद इसी कारण अमेरिका में अपनी सरकार के खिलाफ आक्रोश भड़क उठा था. दुनिया तो ट्रंप का कुछ बिगाड़ने की स्थिति में नहीं है, उम्मीद कर सकते हैं कि अमेरिकी नागरिक ही ट्रंप को सबक सिखाएंगे. खमेनेई की मौत के बाद अमेरिका में हुए ओपीनियन पोल में ईरान पर हमले के प्रति नागरिकों के समर्थन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. यह भी ट्रंप के लिए अच्छी खबर नहीं है.

 

उधर ट्रंप ने कहा है- खमेमई के मरने के बाद ईरानी लोगों के पास मौका है कि वे अपना देश वापस ले लें! असल में वह पूछ रहे हैं कि कोई है जो अमेरिका की कठपुतली बनने को तैयार है? हर देश में उसे कठपुतली सरकार ही चाहिए, जो उसके हितों और नीतियों के अनुकूल चलने को तैयार हो, अन्यथा वेनेजुएला के मादुरो या ईरान के खमेनेई जैसा हश्र होगा.

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