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राजनीति से कुछ इतर, खेल को खेल ही रहने दें!

आठ बार रणजी ट्रॉफी जीत चुकी कर्नाटक की मजबूत टीम के सामने नौसिखिया जम्मू-कश्मीर ने फाइनल के पहले दिन कल जो खेल दिखाया, वह बेमिसाल है. शुभम पुंडीर 117  और अब्दुल समद 32 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए थे. दो विकेट पर 284 रन. चहुंओर हिंदू-मुस्लिम के बावजूद एक अच्छी खबर.
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श्रीनिवास

जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम पहली बार रणजी के फाइनल में पहुंची है. आजादी के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता से ग्रस्त इस राज्य के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है. मगर इससे भी बड़ी शानदार है टीम के हिंदू-मुस्लिम खिलाड़ियों का एकजुट होकर खेलना और इस मुकाम तक पहुंचना. 

 

आठ बार रणजी ट्रॉफी जीत चुकी कर्नाटक की मजबूत टीम के सामने नौसिखिया जम्मू-कश्मीर ने फाइनल के पहले दिन कल जो खेल दिखाया, वह बेमिसाल है. शुभम पुंडीर 117  और अब्दुल समद 32 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए थे. दो विकेट पर 284 रन. चहुंओर हिंदू-मुस्लिम के बावजूद एक अच्छी खबर.

 

सामान्य दिनों के लिए यह कोई खबर भी नहीं है. मंसूर अली खान पटौदी और अजहरुद्दीन भारत के कप्तान रह चुके हैं. दोनों देश के महान खिलाड़ियों में गिने जाते हैं. इनके अलावा भी अनेक मुस्लिम गेंदबाज और बल्लेबाज भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के हीरो रहे हैं. मगर अब यह बीते दिनों की बात लगती है.

 

जो भी हो, जीत-हार बहुत मायने नहीं रखती. शान से खेलो. यह जज्बा कायम रहे, इसका फैलाव देश भर में हो, इस कामना और दोनों टीमों को शुभकामनाओं के साथ.

 

डिस्क्लेमर :  ये लेखक के निजी विचार हैं....

 

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