मैं, अरविंद केजरीवाल, भ्रष्ट नहीं हूं. दिल्ली शराब घोटाले में फंसे दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने आरोपों से बरी होने के बाद यही छह शब्द कहा. फैसला आने के बाद वह फूट-फूट कर रोने लगे. उन्होंने यह भी कहा- आज साबित हो गया कि अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है.
जरा, सोचिए. एक व्यक्ति सरकारी नौकरी छोड़ कर समाज सेवा में आता है. समाज सेवा के बदले मैग्सेसे अवार्ड मिलता है. फिर वह राजनीति में आता है. दिल्ली की सत्ता को संभालता है. विपक्षी दल की तमाम कोशिशें काम नहीं आती. वह तीसरी बार भारी बहुमत से सरकार बनाता है. फिर बहुमत की सरकार को अपदस्थ करने के लिए तिकड़में की जाती है. आरोप लगाये जाते हैं. जांच एजेंसियों को पीछे छोड़ दिया जाता है. बिना ठोस सबूत के जांच एजेंसियां उसे गिरफ्तार कर लेती है, छह माह तक जेल में रहता है. जमानत पर छूटता है. शराब घोटाले के आरोप पीछा नहीं छोड़ते. मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये उसे बदनाम किया जाता है. और अंततः सत्ता से बेदखल कर दिया जाता है. अब अदालत में सीबीआई आरोपों को साबित नहीं कर पाती.
पढ़ें, फैसले में कोर्ट ने क्या कहा...
सीबीआई जो देश की सबसे बड़ी और प्रीमियम जांच एजेंसी है. वह इस हाई प्रोफाइल केस में आरोपों को साबित ही नहीं कर पायी. साबित करना छोड़िये, कोर्ट ने केस को ट्रायल के लायक तक नहीं माना. फिर किस पर और कैसे भरोसा करें? क्या अब वो लोग माफी मांगेंगे? क्या सीबीआई अपनी गलतियों के लिए प्रायश्चित करेगी? अपने अफसरों पर कार्रवाई करेगी? क्या केंद्र सरकार के मंत्री और भाजपा के नेता कभी इसे लेकर अफसोस करेंगे? कभी नहीं है. ऐसा कभी नहीं होगा.
यह सब आम जनता के साथ धोखा है और सबक भी. आंख बंद करके आरोपों पर ही किसी को गुनाहगार मान कर फैसला लेना और फैसला सुना देना कितना खतरनाक हो सकता है. क्योंकि जो हमें दिखाया-बताया जाता है, वह दरअसल उतना ही नहीं होता. उन सबके पीछे बहुत सारे छिपे रहस्य, तुरुप चाल और साजिशें होती हैं.
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