Sheetal P Singh
दिल्ली में चल रहा World AI Summit देखकर अब यह तय करना मुश्किल है कि यह टेक्नोलॉजी समिट है या PR, प्रोटोकॉल और परफ्यूम की प्रदर्शनी. AI कम दिख रहा है, भ्रम ज्यादा. चीनी रोबोट, देसी भाषण. जिन रोबोट्स को मंच पर “भारतीय नवाचार” बताकर घुमाया गया, वे असल में चीन में बने हैं. हार्डवेयर चीनी, सप्लाई-चेन चीनी, टेक चीनी, बस स्टेज पर चढ़ते ही वे राष्ट्रवादी हो जाते हैं. शायद यही है भारत का सबसे एडवांस AI मॉडल- “री-ब्रांडिंग GPT”.
AI बजट : भाषण 4K, फंडिंग 144P
भारत सरकार ने पिछले साल AI के लिए बजट में लगभग 2,000 करोड़ रखे थे जो इस साल घटकर 1,000 करोड़ रुपए रह गये हैं. उधर चीन, जहां AI को इवेंट नहीं रणनीतिक हथियार माना जाता है, वहां सरकार और राज्य-समर्थित फंड मिलकर AI में $80–100 अरब डॉलर (7–8 लाख करोड़ रुपये) झोंक रहे हैं. इसलिए वे रोबोट बनाते हैं और हम उनके रोबोट के साथ सेल्फी लेते हैं.
प्रधानमंत्री आए, AI ठहर गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से पहले स्टॉल खाली, सेशंस रद्द, एंट्री-एग्जिट बंद, स्टार्टअप्स और शोधकर्ता बाहर, AI समिट कुछ देर के लिए VIP समिट बन गया. सुरक्षा के नाम पर सम्मान का सस्पेंशन. प्रतिभागियों के साथ बदसलूकी, धक्का-मुक्की और फटकार की शिकायतें आईं. यही वे लोग हैं जिनके नाम पर मंच से कहा जाता है- “युवा भारत का भविष्य हैं.” भविष्य शायद है, लेकिन आज बैरिकेड के उस पार खड़ा है.
बिल गेट्स आएंगे? बोलेंगे? या चुपचाप गायब?
समिट का सबसे अजीब एपिसोड रहा बिल गेट्स को लेकर बना भ्रम. कभी कहा गया, वे भाषण देंगे, फिर कहा गया नहीं देंगे. फिर चुप्पी. क्यों? क्योंकि गेट्स का नाम जेफरी एप्सटीन से जुड़े एप्सटीन फाइल्स में प्रमुख रूप से आया है. दुनिया भर में उनके पुराने संबंधों पर सवाल उठ रहे हैं. और यहां AI समिट में आयोजक शायद तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें टेक गुरु की तरह पेश करें या विवाद से बचने के लिए AI की तरह साइलेंट मोड में डाल दें. एक अंतरराष्ट्रीय समिट में इससे ज्यादा हास्यास्पद स्थिति क्या होगी, जहां सबसे हाई-प्रोफाइल स्पीकर को लेकर भी स्पष्टता नहीं, सिर्फ अफवाहें हों.
AI हब, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ग्लोबल लीडरशिप, सब कुछ है. बस नहीं है तो साफ बजट, रिसर्च रोडमैप, हार्डवेयर रणनीति और जवाबदेही? कुल मिलाकर हालात यह है कि यहां घोषणाएं तो अनलिमिटेड हैं, लेकिन जवाब व जवाबदेही लिमिटेड.
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