देश की राजधानी दिल्ली में रह रही पूर्वोत्तर की महिलाएं परेशान हैं. शर्मिंदा है. आक्रोशित हैं. क्योंकि उनके ही देश में उनके ही देश के लोग उन्हें चिंकी, मोमो, पार्लर लेडी व सेक्स वर्कर कह कर बुलाते हैं. अपमानित करते हैं.
ताजा घटनाक्रम में एक महिला का वायरल वीडियो है. वीडियो में पूर्वोत्तर की महिला कह रही है कि क्या हमारे देश के लोगों को भारतीय मानचित्रों की बुनियादी जानकारी नहीं है? अपने की देश की विविधता के बारे में कुछ भी नहीं जानते? वह सवाल उठा रही हैं कि कोई अपने ही देश में नागरिकों का नस्ल के आधार पर कैसे अपमानित कर सकता है.
कुछ महीने पहले ही उत्तराखंड में एंजेल चकमा नामक युवक ने जब नस्लीय टिप्पणी का विरोध किया था, तब उसे पीट-पीट कर अधमरा कर दिया गया था. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. जिसके बाद पूर्वोत्तर ही नहीं देश भर में एक आक्रोश देखने को मिला था. इसके बाद भी अब तक कोई सुधार कहीं दिखती नहीं.
पूर्वोत्तर को लेकर जनमानस में ऐसी धारणाएं सालों से बनी हुई हैं, जो एक दिन में नहीं बनी. लेकिन ऐसी धारणाओं को हतोत्साहित करने के बजाय, इसे तब और बल मिलता है, जब देश के पीएम नरेंद्र मोदी अपने सार्वजनिक संबोधन में कहते हैं- "छोटी आंख वाले गणेश जी की मूर्ति." बेशक वह चीन की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन क्या वह यह नहीं जानते कि पूर्वोत्तर के लोगों की आंखें भी छोटी होती है.
हालांकि यह अलग बात है कि चीनी सामान का बहिष्कार करने का ढ़ोंग रचने वाली इस पार्टी की सरकार के कर्ताधर्ता के कार्यकाल के दौरान ही चीनी सामानों के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. फिर वो ऐसा बोलते क्यों है? भीड़ के लिए, जो बाद में वोटर बनते हैं, उन्हें खुश करने के लिए कुछ भी कहा जाना कितना उचित है, यह इतिहास बतायेगा.
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