Search

ओपिनियन

यह ‘विजयोत्सव’ था?

वैसे एनसीआरटी ने पाठ्यपुस्तकों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शामिल करने का फैसला कर ही लिया है, उसमें एक चैप्टर विजयोत्सव का भी जुड़ जायेगा! मगर तत्कालीन शासकों के अनुकूल कुछ भी लिख देने से वह इतिहास नहीं हो जाता! आज आप पहले लिखे गये इतिहास को अपने ढंग से ‘दुरुस्त’ कर रहे हैं, कल आपके लिखे को भी दुरुस्त किया जायेगा! उस इतिहास में वह सब भी दर्ज होगा, जो आपको पसंद नही है! इतिहास हमेशा शासक की इच्छा और सहूलियत से ही नहीं लिखा जाता और इतिहास वही नहीं होता, तो पाठ्य पुस्तकों में दर्ज होता है.

Continue reading

नुक़्ते के हेर-फेर से खुदा जुदा हो गये

अभूतपूर्व से भूतपूर्व बन गए हैं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़. एक हफ्ता बीत गया उन्हें इस्तीफा दिये हुए. लेकिन न वह कुछ बोल रहे हैं, न सरकार. खबर सिर्फ इतनी है कि उनकी सेहत इतनी खराब हो गई थी कि संसद के चलते सत्र में वह सभापति (उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पदेन सभापति होता है) का बोझ उठाने में असमर्थ हो गये थे. लेकिन उनका इलाज कौन कर रहा है, कहां हो रहा है, इस बारे में न तो वह कुछ बता रहे हैं, न सरकार की ओर से कोई सूचना मिल रही है.

Continue reading

बैंकों ने कर ली 8500 करोड़ की वसूली और लुट गया मीडिल क्लास

पिछले हफ्ते आपने एक खबर जरुर पढ़ी होगी. खबर थी- पिछले 5 सालों (2019-20 से 2023-24) में बैंकों ने 8500 करोड़ रुपये की कमाई कर ली. दूसरे भाषा में कहें कि बैंकों ने 8500 करोड़ रुपये की वसूली कर ली. यह जानकारी केंद्र सरकार ने संसद में दी है.

Continue reading

सरकारी समारोह में मंत्री ने गैर सरकारी लोगों को करीबी होने का मानद सर्टिफिकेट बांटा

मौका डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटने का था. स्टेज को सलीके से सजाया गया था. स्टेज पर मंत्री, अपर मुख्य सचिव सहित दूसरे अधिकारी बैठे थे. नियुक्ति पत्र पाने वाले डॉक्टर अपने लिए बनायी गयी जगह पर बैठे थे. इस बीच बिन बुलाये ही मंत्री का एक करीबी फुदक कर स्टेज पर चढ़ गया. स्टेज पर बैठे अपर मुख्य सचिव के पीछे की कुर्सी पर बैठ गया. लेकिन उसे किसी ने कुछ नहीं कहा. क्योंकि वह मंत्री के इर्द गिर्द मंडराते रहता है. विभागीय कर्मचारी उसे मंत्री के प्रतीक के रूप में जानते हैं. बताते हैं कि उसका असली नाम भी प्रतीक है.

Continue reading

बिहार में औद्योगिक जागृति कैसे आए इसपर विचार करें

सच में, अब ऐसा लगने लगा है कि बिहार में जो बाहुबली है, उसके लिए कोई रोकटोक नहीं है और वह जब चाहे जहां चाहे किसी की हत्या करवा सकते हैं. पिछले दिनों जिन दुर्दांत अपराधियों ने सरेशाम राज्य की राजधानी पटना में उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या को अंजाम दिया, इसका दूरगामी परिणाम निश्चित रूप  से आज नहीं कल सामने आएगा ही

Continue reading

व्यंग ... और मुर्गे ने इस्तीफा दे दिया!

सभी स्वामीभक्तों को याद दिलाने के लिए (एसआरआर यानी सर, जी सर, जी, जी के संदर्भ में).  एक पुरानी कहानी जो अचानक दो दिन से फिर से खूब याद की जा रही है. "एक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया. एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उसने मुर्गे को मारने का बहाना सोचा और मुर्गे से कहा "तुम कल से बांग नहीं दोगे, नहीं तो मैं तुम्हें मार डालूंगा."

Continue reading

क्या मोदी रिटायर हो रहे हैं

इस लाल बुझक्कड़ी सुगबुगाहट का कारण शायद यह है कि मोदी सितंबर में 75 साल के हो जाएंगे और मोहन भागवत का सुझाव टाल पाना उनके लिए संभव नही होगा. लेकिन क्या भागवत खुद संघ प्रमुख का पद त्याग देंगे ? आखिर वह भी इसी सितंबर में 75 साल के हो रहे हैं. वह मोदी से एक हफ्ता बड़े हैं.

Continue reading

फांसी पर लटकने वाले बैंक मैनेजर शिवशंकर मित्रा की पीड़ा को कभी समझ पाएंगे हम !

बैंक के अत्यधिक कार्य दबाव के कारण अपनी जिंदगी खत्म कर रहा हूं. मेरी बैंक से विनती है कि कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए. सभी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं और अपना 100% देते हैं. मेरी पत्नी और बेटी से माफी मांगता हूं. कृपया मेरी आंखें दान कर दें.

Continue reading

लोकतंत्र  को मजबूत करने  के लिए गहरी नींव खोदनी पड़ेगी

पंडित जवाहरलाल नेहरू अपनी विख्यात पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया में लिखते हैं कि राजनीति और चुनाव की रोजमर्रा की बातें ऐसी है , जिनमें हम हर जरा-जरा से मामलों पर उत्तेजित हो जाते हैं. लेकिन अगर हम हिंदुस्तान के भविष्य की इमारत तैयार करना चाहते हैं, जो मजबूत और खूबसूरत हो, तो हमें गहरी नींव खोदनी पड़ेगी,  क्योंकि आदमी इच्छा के मुताबिक काम कर सकता है.

Continue reading

मोदी बिहार मेंः मुंबई टू मोतिहारी और गुरुग्राम टू गयाजी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार में थे. बिहार के मोतिहारी में. मौका था हजारों करोड़ की योजनाओं के उदघाटन या शिलान्यास का.

Continue reading

सवाल बुजुर्गों के स्वाभिमान का !

अभी आप कमा रहे हैं, कुछ सालों में बुजुर्ग हो जाएंगे, इसलिए सवाल आपका ही है. आज के लिए नहीं, आने वाले 10-15 साल बाद का सवाल. परिवार टूट रहा है. जीवन यापन के लिए पलायन की रफ्तार पहले से तेज होती जा रही है. ऐसे में बुजुर्गों के स्वाभिमान का सवाल उठाना जरुरी हो गया है.

Continue reading

डियर NHAI, जब रांची-टाटा रोड में गड्ढ़े ही गड्‍ढे हैं, तो टोल वसूली किस बात की

रांची से टाटा (जमशेदपुर) जाने वाली सड़क NH-33 जगह-जगह टूट गई है. इतनी कि वाहनों को नुकसान हो रहा है. दुर्घटनाएं हो रही हैं. लेकिन NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) का टोल वसूलना पहले की तरह जारी है. बुंडू के पास कार से 60 रुपये और चांडिल के निकट 25 रुपये की टोल वसूली हो रही है.

Continue reading

खतरनाक है भाषाई वैमनस्य, गरमाई देश की राजनीति

बिहार के एक विकृत मानसिकता वाले तथाकथित पत्रकार और नेता ने पिछले वर्ष भारतीय अखंडता को तोड़ने-मरोड़ने और  भड़काने के उद्देश्य से एक नितांत फर्जी वीडियो बनाया कि बिहार से मजदूरी करने गए  व्यक्तियों के साथ दक्षिण भारत के राज्यों  में  उन्हें अपमानित कर उनके साथ मारपीट की जाती है.

Continue reading

कंगना रनौत की तारीफ करिये...

सवाल यह है कि कंगना ने क्या गलत कहा. वही कहा, जो अनुभव कर रही हैं और जितनी उनकी समझ है. अगर आलोचना ही करनी है तो भाजपा की करिये, उनको वोट देकर सांसद बनाने वाले मंडी की आम लोगों की करिये, जिन्होंने कंगना रनौत को पार्टी का प्रत्याशी बनाया और जिन्होंने वोट देकर उन्हें संसद पहुंचने का रास्ता दिया.

Continue reading

विदेश नीति को संभालने की जरूरत है!

यह बात बिल्कुल सच है कि किसी भी जीव के  ईश्वर  प्रदत्त मूल स्वरूप को बदला नहीं जा सकता, लेकिन आज के चिकित्सकीय संसार में अब यह असंभव नहीं रहा . पर, कुछ जीव ऐसे होते हैं जिसके मूल स्वरूप को चाहे हम जितना भी चिकित्सकीय पद्धति से  ठीक कर लें, लेकिन वर्षों की मेहनत के बावजूद इसमें परिवर्तन नहीं आता. अक्षरशः यही हाल पाकिस्तान का है चाहे आजादी के बाद हो या पहले -पता नहीं उसके मन में कितना बैर भारत के प्रति था कि उसने अखंड भारत को  खंड खंड में बांट ही दिया

Continue reading
Follow us on WhatsApp