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मोदी बिहार मेंः मुंबई टू मोतिहारी और गुरुग्राम टू गयाजी

Surjit Singh


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को बिहार में थे. बिहार के मोतिहारी में. मौका था हजारों करोड़ की योजनाओं के उदघाटन या शिलान्यास का. उन्होंने अपने संबोधन में कहा - मोतिहारी का विकास मुंबई के जैसा हो जायेगा. गयाजी (गया) में उतने ही अवसर होंगे जितने कि गुरुग्राम (दिल्ली से सटा व हरियाणा का सबसे उन्नत शहर) हैं.


पीएम मोदी यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा - जिस तरह का विकास पूणे में हुआ है, उसी तरह का विकास पटना में होगा. गुजरात के सूरत का जैसा ही संथाल परगना का विकास होगा. बैंगलूरू की तरह ही वीरभूम भी आगे बढ़ जायेगा. कुल मिलाकर उन्होंने कहा कि बिहार को विकसित राज्य बनाना है. 


33.54 मिनट के भाषण में पीएम ने यह भी जिक्र किया कि पहले लालटेन युग था. लोग घरों की रंगाई-पोताई नहीं कराते थे, ताकि उन्हें कोई उठा ना लें. आज समय बदल गया है. हालांकि उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में हर रोज हो रही सनसनीखेज हत्याओं को लेकर कुछ भी नहीं कहा. 


अपने भाषण में पीएम ने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी कुछ भी नहीं कहा. जबकि आज की तारीख में यह मुद्दा बिहार का सबसे बड़ा व ज्वलंत मुद्दा है. ना इसे अच्छा कहा, ना खराब. हमेशा की तरह पीएम मोदी ने इस विवादस्पद मुद्दे पर चुप रहना ही उचित समझा. उन्होंने भाषण सुनने आये लोगों से सिर्फ इतना कहा कि भाजपा और एनडीए ही बिहार का विकास कर सकता है, यूपीए वाले नहीं. इसलिए एनडीए को दुबारा सत्ता में लायें. 


बिहार में पिछले 19 सालों से नीतीश कुमार की सत्ता है. एक-दो वर्ष को छोड़ दें तो भाजपा छोटे भाई की भूमिका में है. इसलिए जरा बिहार में पीएम के भाषण के बाद बिहार से जुड़े इन तथ्यों को समझना भी दिलचस्प होगा.


- प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश में 17वें स्थान पर है. यहां प्रति व्यक्ति आय 66,828 रुपया है.


- बिहार की 51.91 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है. यानी अन्य राज्यों की तूलना में सबसे नीचे.


- बिहार में बेरोजगारी का दर 46.2 प्रतिशत है. CMIE व NSSO के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में बेरोजगारी पांच सबसे खराब राज्यों जैसी है. सबसे खराब में कभी चौथे तो कभी छठे रैंक पर. 


- शिक्षा की बात करें तो नीति आयोग की 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार 32 अंक के साथ बिहार देश भर में सबसे निचले स्थान पर है. 


- 2022 के बिहार आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, सड़क नेटवर्क के मामले में बिहार का देश में 10वां स्थान था


- नीति आयोग की 2019 की स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार बिहार का स्कोर 32.11 था और यह सबसे निचले पायदान पर था.


- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में 5 साल से कम उम्र के करीब 41 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. 


बिहार की यही स्थिति है. वह भी तब जबकि बिहार में पिछले 19 सालों से स्थिर सरकार है. कथित तौर पर सुशासन बाबू मुख्यमंत्री हैं. 10 साल से डबल इंजन की सरकार है और अब एक बार फिर से बिहार के लोगों को सपने में खोने का वक्त आ गया है.

 

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