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गंभीर संकट की तरफ बढ़ रहा जोड़ा तालाब व चेशायर होम रोड का इलाका

  • रांची के इस बड़े इलाके में हो रहा बिना योजना का विकास

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Rajesh Das

 

रांची शहर का विस्तार तेज गति से हो रहा है और यह स्वाभाविक भी है. राजधानी बनने के बाद जनसंख्या 15-16 लाख के पार पहुंच चुकी है. नए आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र उभर रहे हैं और शहर आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहा है. इस विकास का स्वागत किया जाना चाहिए. लेकिन तभी, जब वह योजनाबद्ध, सुरक्षित और संतुलित हो.

 

दुर्भाग्य से बिरला बागान, जोड़ा तालाब, चेशायर होम रोड, बरियातु का पूरा इलाका आज उस असंतुलित विकास का उदाहरण बनता जा रहा है जहां तेजी से बढ़ती आबादी और निर्माण कार्यों के मुकाबले बुनियादी ढांचे का विस्तार बिल्कुल नहीं हुआ है. यह सिर्फ एक क्षेत्र की समस्या नहीं है, यह पूरे रांची के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि अगर किसी भी क्षेत्र में बिना किसी योजना के निर्माण कार्य होगा तो आने वाले वर्षों में कई इलाके ऐसे ही संकट की चपेट में आ जाएंगे.

 

तेजी से बढ़ती आबादी व योजना शून्य

बरियातू के इस क्षेत्र और उसके आसपास के क्षेत्र में लगभग 4-5 हजार नए फ्लैट व मकान निर्माणाधीन हैं, जहां आने वाले वर्षों में हजारों परिवार रहेंगे, बसेंगे. यह दिखाता है कि जनसंख्या घनत्व कई गुना बढ़ने वाला है, मगर उसके अनुपात में जरूरी सड़कों का चौड़ीकरण, नई लिंक सड़कों का निर्माण, सड़कों के अवैध इंक्रोचमेंट को खाली करना, अपार्टमेंट्स के बनते समय छोड़ी गई सामने की खाली जमीनों का सटीक इस्तेमाल, जल निकासी, नाली और बिजली के पोल्स का सही नियोजन, पेयजल की व्यवस्था, पार्किंग और स्थानीय मार्केट की सुविधा, ट्रैफिक प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई हैं. ना ही बढ़ाने की कोई योजना दिख रही है.

 

नगर निगम अधिनियम के अनुसार सड़कों का विकास, भूमि उपयोग का नियमन और शहरी योजना निगम के अनिवार्य कार्य हैं. पर, वास्तविकता यह है कि यहां न तो सड़कें चौड़ी हुईं, न नई लिंक सड़कें बनीं, न अतिक्रमण हटे और ना ही कोई फुटपाथ विकसित हुए.

 

यानी उच्च घनत्व आबादी के रिहायशी निर्माण को अनुमति तो दे दी गई, पर उस विकास को संभालने लायक बुनियादी ढांचा तैयार ही नहीं किया जा रहा है. यह व्यवस्थित विकास नहीं है. यह एक भविष्य की संकटपूर्ण विस्तार की ओर संकेत करता है.

 

ट्रैफिक जाम, बढ़ता सामाजिक व आर्थिक बोझ

इस पूरे क्षेत्र की सड़कें पहले से ही संकरा था. ऊपर से इन्हीं सड़कों पर कई मैरेज हॉल बन गये. इन विवाह भवनों में हो रहे लगातार कार्यक्रम, निर्माण सामग्री ढोने वाले भारी वाहन, वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही और तंग सड़कों पर बढ़ता निजी वाहन भार, इन सबने संकरी सड़कों को जाम का स्थायी केंद्र बना दिया है. जाम का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. कई बार तो पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है और रोजाना जाम में फंसकर आम नागरिक अपने घंटे गंवा रहे हैं. यह स्थिति सिर्फ असुविधा नहीं, आर्थिक नुकसान, समय की बर्बादी और दुर्घटना की आशंका को कई गुना बढ़ाती है.

 

ट्रैफिक इंजीनियरिंग के मानक कहते हैं कि जब किसी क्षेत्र में निर्माण और जनसंख्या तेजी से बढ़े, तो समानांतर रूप से सड़क क्षमता और ट्रैफिक प्रबंधन विकसित किया जाना चाहिए. यहां उसके ठीक उल्टा हो रहा है.

 

इमरजेंसी के लिए गंभीर खतरा

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह क्षेत्र RIMS और आसपास के कई अस्पतालों की प्रमुख पहुंच सड़क है. एंबुलेंस या बीमार व्यक्ति को लेकर जा रही गाड़ियों को अक्सर इन भीड़भाड़ वाली, अतिक्रमणग्रस्त और संकरी सड़कों से होकर गुजरना पड़ता है. मरीज के लिए “गोल्डन आवर” जब समय पर पहुंचने से जीवन बच सकता है, वह भी इन सड़कों पर जाम में खत्म हो जाता है.

 

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार, यातायात और सरकारी लापरवाही से बाधित नहीं हो सकता. इसका सीधा मतलब है कि नगर निगम और प्रशासन की यह कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे क्षेत्रों में आपातकालीन पहुंच निर्बाध रहे.

 

फायर ब्रिगेड पहुंचने की संभावना बेहद कम

कई अपार्टमेंट्स घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बिना पर्याप्त एप्रोच के बन रहे हैं. सड़कें पहले जैसी ही संकरी हैं. कहीं भी फायर टेंडर के मोड़ने की सही जगह नहीं है. NBC (National Building Code) Part 4 के अनुसार, फायर ब्रिगेड को पहुंचने के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई और क्लियरेंस अनिवार्य है. लेकिन जमीन पर इसके पालन के प्रमाण इस क्षेत्र में कहीं नहीं दिखाई पड़ते हैं. खास कर जहां निजी मकान बन रहे हैं. यदि भविष्य में किसी इमारत में आग लगती है और आग बुझाने वाले वाहन वहां तक बिना किसी समस्या के पहुंच ही नहीं पाते, तो क्या यह दुर्घटना कहलाएगी या प्रशासनिक उपेक्षा? क्या यह सीधे-सीधे आपदा सुरक्षा मानकों का उल्लंघन नहीं है.

 

वाजिब मांग- निगम की योजना कहां है?

बिरला बागान, जोड़ा तालाब, चेशायर होम रोड बरियातु क्षेत्र के निवासी किसी गैर वाजिब चीज की मांग नहीं कर रहे. वे सिर्फ यह पूछ रहे हैं, इन सवालों से बचा नहीं जा सकता.

  • - इन सड़कों का चौड़ीकरण कब होगा?
  • - सड़कों से अतिक्रमण कब हटेगा?
  • - नए लिंक रोड की योजना कहां है?
  • - हजारों नए फ्लैटों के अनुरूप क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था कैसे बनेगी?
  • - फायर टेंडर और एंबुलेंस मार्ग के लिए क्या रणनीति है?

 

विकास योजना - मॉडल या बोझ!

रांची का विस्तार शुभ संकेत है. नए परिवार आएंगे, रियल एस्टेट बढ़ेगा, रोजगार बढ़ेगा. लेकिन बिना योजना का विस्तार उस विकास को बोझ बना देगा. बिरला बागान, जोड़ा तालाब व चेशायर होम रोड बरियातु क्षेत्र, इस समय एक चौराहे पर खड़ा है, या तो यह क्षेत्र रांची के संतुलित और आधुनिक विकास का उदाहरण बनेगा या फिर कुछ वर्षों में यह जाम, दुर्घटनाओं, आपातकालीन अवरोधों, और भीड़भाड़ का प्रतीक बन जाएगा. यहां के निवासी सिर्फ इतना चाहते हैं कि रांची नगर निगम अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करे, स्पष्ट टाइमलाइन दे, पारदर्शी योजना साझा करे और उस पर ईमानदारी से अमल शुरू करे. क्योंकि विकास तब ही स्वागत योग्य है, जब वह सभी के लिए सुरक्षित, स्थायी और सुव्यवस्थित हो.

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