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मेरी मर्जीः जिसका हटाना है, हटा देंगे - जिसका जोड़ना है, जोड़ देंगे

कमाल है. सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कह रहा है- यह किसी नियम में नहीं लिखा है कि उन्हें ड्राफ्ट रोल दिखाना पड़े कि किस नियम के तहत किस वोटर का नाम मतदाता सूची से हटाया गया.
 

कमाल है. देश का चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कह रहा है- यह किसी नियम में नहीं लिखा है कि उन्हें ड्राफ्ट रोल दिखाना पड़े कि किस नियम के तहत किस वोटर का नाम मतदाता सूची से हटाया गया. ऐसा लगता है आयोग कह रहा है- हमारा मन. जिसको हटाना है, हटा देंगे. हमारा मन. जिसको जोड़ना है जोड़ देंगे. हमारा राज है. 


तो अब बिहार में SIR के मुद्दे पर चुनाव आयोग इस हद तक जा पहुंचा है. संभव है, आयोग ने जो कहा है, वह नियमों के तहत ही कहा होगा. लेकिन पढ़ने सुनने में यह आश्चर्यजनक है. शब्दों में अकड़ है. चुनाव आयोग का काम मतदाताओं को जोड़ना है, लेकिन वह हटाने की कार्रवाई पर इस अकड़ के साथ बात कर रहा है कि जिसका नाम हटाना था, हटा दिया गया, क्यों हटाया गया, यह नहीं बतायेंगे. क्योंकि बताने की बात किसी कानून में नहीं है.


क्या चुनाव आयोग यह भूल गया है कि वह एक अर्धन्यायिक संस्था है. वह कुछ काम कार्यपालिका की तरह करता है और कुछ काम न्यायालय की तरह. जैसे कि चुनावी विवादों, उम्मीदवारों की अयोग्यता के मामले में वह न्यायालय की तरह काम करता है. लेकिन चुनावी अपराधों, आचार संहिता, मतदाता पुनरीक्षण जैसे काम वह कार्यपालिका की तरह करता है. 


बिहार से जो खबरें आ रही हैं, वह देश भर के लोगों को अचरज में डाल रही है. 124 साल के वोटर, मुजफ्फरपुर में एक ही पते पर 269 तो जमुई में एक ही पते पर 247 वोटर. लोग खुल कर सवाल उठा रहे हैं.  सोशल मीडिया पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर तमाम तरह के हजारों पोस्ट डाले जा रहे हैं और चुनाव आयोग चुप है. जवाब देने के बदले चुनाव आयोग कह रहा है, नोटिस और सुनवाई के बाद ही नाम कटेगा. लेकिन यह काम सिर्फ 30 दिन में होना है. क्या नोटिस और सुनवाई 30 दिन में संभव है. यह तभी संभव होगा, जब चीजें एकतरफा हो. 

 

आखिरकार, चुनाव आयोग क्यों नहीं बता देता कि जिन 65 लाख लोगों के नाम हटाये गए, वह किन कारणों से वोटर नहीं है. वह यह क्यों नहीं कह देता है यह रहा बिहार का वोटर लिस्ट, जो भी गड़बड़ी है, उसे बतायें, दुरुस्त कर दिया जायेगा. अगर चुनाव आयोग ऐसा नहीं करता है, तो उसके प्रति जो विश्वास का पतला सा धागा बचा हुआ है, वह भी टूट जायेगा.

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