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चांडिल : सोना झरना को अपने उद्धार के लिए है किसी तारणहार का इंतजार

Chandil (Dilip Kumar) : वैसे तो समूचा झारखंड राज्य ही प्रकृति का अनुपम उपहार है. नदी, नाला, पहाड़, जंगल, झरना से घिरा झारखंड, प्राकृतिक सौंदर्य का धनी राज्य है. यहां की हसीन, मनमोहक व स्वास्थ्यवर्धक वादियों में पल दो पल बिताने के लिए और अनुपम प्रकृति का सानिध्य पाने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं. हरे-भरे जंगलों की वादियों को समेटे कई स्थान है जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. चांडिल अनुमंडल क्षेत्र को भी ऐसा ही कई उपहार प्रकृति नेदिया है. इनमें से एक स्थान है चांडिल प्रखंड के सुदूरवर्ती हेंसाकोचा गांव के दाराकोचा टोला स्थित सोना झारना. सरकार और उनके बाबूओं के उदासीनता के कारण दाराकोचा का अनुपम सौंदर्य वाला सोना झरना गुमनामी के अंधर में है. सोना झरना को पर्यटन स्थल के रूप में विकसीत करने से जहां क्षेत्र का विकास होगा वहीं सरकार को भी राजस्व मिलेगा. इसे भी पढ़ें : चांडिल">https://lagatar.in/chandil-complaint-about-less-ration-distribution-villagers-demonstrated/">चांडिल

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सौ फीट की ऊंचाई से गिरती है झरना

दाराकोचा स्थित सोना झरना चारों ओर हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है. यहां करीब सौ फीट की ऊंचाई से झरने का पानी गिरता है. बरसात के समय दाराकोचा स्थित सोना झरना में अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है. शोर-शराबे और प्रदूषण से दूर अनुपम सौंदर्य समेटा सोना झरना बरबस ही लोगों को अपनी और आकर्षित करता है. सोना झरना जलप्रपात चारों ओर पहाड़ों से घिरा होने के कारण उत्तम स्वास्थ्यवर्धक स्थान है. यहां पक्षियों की चहचहाहट सैलानियों का मन मोह लेता है. झरना का पानी बहकर पालना जलाशय पहुंचता है. प्रकृति के अनुमप सौंदर्य को अपने आगोश में समेटे सोना झरना को अपने उद्धार के लिए किसी तारणहार का इंतजार है. वैसे सोना झरना के विकास नहीं होने का एक कारण हेंसाकोचा का अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र होना भी है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा का पर्याप्त इंतजाम नहीं रहने के कारण लोग वहां जाने से संकोच करते हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/09/26-chandil-6_759-1.jpg"

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उदासीनता के कारण नहीं हो सका विकास

झारखंड अलग राज्य बने 22 साल बीत गए, लेकिन राज्य के बेहतरीन सौंदर्य वाले कई स्थलाें का अबतक विकास नहीं हो सका है. सोना झरना तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है. चांडिल प्रखंड के सुदूरवर्ती हेंसाकोचा पंचायत के दाराकोचा स्थित सोना झरना पहुंचने के कई रास्ते हैं. टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बड़ामटांड से करीब 12 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में स्थित सोना झरना जाने के लिए पालना, हेंसाकोचा के रास्ते भी पहुंचा जा सकता है. वहीं चौका-कांड्रा सड़क पर स्थित दुलमी से हेंसाकोचा होते हुए और खूंटी से मुसरीबेड़ा, हेंसाकोचा होते हुए भी सोना झरना तक पहुंचा जा सकता है. सभी सड़कें उत्क्रमित उच्च विद्यालय हेंसाकोचा तक पक्की है. इसके बाद से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित सोना झरना तक जाने के लिए पैदल ही जाना पड़ता है. सुगम सड़क नहीं रहने के कारण दो पहिया वाहन से जाना भी दूभर हो जाता है. इसे भी पढ़ें : चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-teachers-of-jln-college-worked-wearing-black-badges-expressed-displeasure/">चक्रधरपुर

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पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का है प्रस्ताव

सरायकेला-खरसावां जिले में दो पर्यटन स्थल है और दोनों ही चांडिल क्षेत्र में है. इनमें एक दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी और दूसरा चांडिल डैम है. जिले के ए, बी, सी और डी श्रेणी के कुल 15 पर्यटन स्थलों में चार चांडिल में, एक नीमडीह में और एक कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र में अवस्थित है. दलमा, चांडिल डैम के अलावा नीमडीह में आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर, पालना डैम, जयदा मंदिर और जारगो महादेवबेड़ा मंदिर शामिल है. इसके अलावा स्थानीय प्रशासन ईचागढ़ के देवलटांड स्थित जैन मंदिर को सी श्रेणी में, चांडिल के सोना झरना को डी श्रेणी में, नीमडीह के तिल्ला पाट मंदिर, ईचागढ़ के सीता मंदिर और चांडिल के फदलोगोड़ा स्थित काली मंदिर को डी श्रेणी में पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है. जिला पर्यटन संवर्धन परिषद की बैठक में इन पर्यटन स्थलों के विकास पर भी चर्चा की गई है. जिला पर्यटन संवर्धन परिषद ईचागढ़ के चतुर्मुखा शिव मंदिर को भूल गई. प्राचीनकालीन चार मुंह वाले शिव लिंग के आसपास चारों ओर कई शिवलिंग बिखरे पड़े है, जिसका संरक्षण व संवर्धन आवश्यक है. [wpse_comments_template]

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