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CM हेमंत ने राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिका वापस ली

 
Ranchi :   राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिका वापस ले ली है. मुख्यमंत्री की ओर से ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के आरोपों के मद्देनजर चुनाव आयोग के फैसले की जानकारी नहीं देने के मामले यह याचिका दायर की गयी थी. सीएम हेमंत सोरने ने चुनाव आयोग के फैसले को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर वर्ष 2022 में यह याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी. याचिका में डिफेक्ट्स होने की वजह से न्यायालय ने याचिकादाता को इसे दूर करने का निर्देश दिया. इसके बाद आठ अगस्त 2024 को न्यायाधीश राजेश कुमार की पीठ में याचिका को सुनवाई के लिए पेश किया गया. लेकिन सुनवाई के दौरान याचिकादाता की ओर से अपना पक्ष पेश करने के लिए कोई हाजिर नहीं हुआ. इस स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने याचिका के डिफेक्ट्स को दूर करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया. साथ ही यह भी कहा कि इस अवधि में डिफेक्ट्स दूर नहीं करने पर याचिका स्वतः रद्द समझा जायेगा. इसके बाद चार दिसंबर 2024 को राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिका न्यायाधीश दीपक रौशन की पीठ मे लिस्ट हुआ. याचिकादाता के वकील कोर्ट में हाजिर हुए. उन्होंने कोर्ट से इस मामले की सुनवाई के लिए 13 दिसंबर 2024 की तिथि निर्धारित करने का अनुरोध किया. न्यायालय ने इसे स्वीकार कर लिया. लेकिन 13 दिसंबर 2024 के बदले इस केस को सुनवाई के लिए 28 मार्च 2025 को न्यायाधीश दीपक रौशन की पीठ में लिस्ट किया गया. सुनवाई के दौरान याचिकादाता की ओर से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया गया. न्यायालय ने याचिकादाता के अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया. उल्लेखनीय है कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित भाजपा के अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम आवंटित माइनिंग लीज को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायर में मानते हुए उनकी सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया था. राज्य के तत्कालीन राज्यपाल रमेश वैश्य ने भाजपा की शिकायत को निर्णय के लिए चुनाव आयोग को भेज दिया था. चुनाव आयोग ने राज्य सरकार, भाजपा और हेमंत सोरने का पक्ष सुनने के बाद अपनी राय राज्यपाल को भेजी. लेकिन राज्यपाल के स्तर से इस पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गयी. दूसरी तरफ मीडिया में चुनाव आयोग द्वारा हेमंत सोरेन की सदस्यता रद्द किये जाने की अनुशंसा से संबंधित खबरें प्रकाशित होती रहीं. काफी दिनों तक राज्यपाल द्वारा किसी तरह की कार्रवाई नहीं करने और सरकार को आयोग की अनुशंसा की जानकारी नहीं देने बाद हेमंत सोरेन ने यह याचिका दायर की थी.
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