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RU के जनजातीय विभाग में घटा छात्रों का नामांकन, कई चुनौतियां हैं सामने

Ranchi: रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय विभाग में शैक्षणिक सत्र 2024-2026 के लिए नामांकन में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. यह विभाग झारखंड राज्य के गठन के बाद आदिवासी भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से स्थापित किया गया था. बावजूद इसके, लगातार घटती छात्र संख्या चिंता का विषय बन गई है. जनजातीय विभाग में मुंडारी, कुड़ुख, हो, खड़िया और संथाली जैसी भाषाओं की पढ़ाई कराई जाती है. विभाग में कुल 60 सीटें निर्धारित हैं, परंतु इनमें भी नामांकन पूर्ण नहीं हो पा रहा है. विभागीय सूत्रों के अनुसार, रांची के अन्य कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की शुरुआत ने छात्रों के सामने अधिक विकल्प खोल दिए हैं, जिससे जनजातीय विभाग का नामांकन प्रभावित हुआ है.
आवास की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ सूत्रों ने बताया कि कल्याण विभाग द्वारा संचालित आदिवासी छात्रावासों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है. विशेषकर सिमडेगा, गुमला, खूंटी और संथाल परगना जैसे सुदूर जिलों से आने वाले छात्र, जो रांची में पढ़ाई करना चाहते हैं. लेकिन वहां रहने की सुविधा न मिलने के कारण लौटने पर मजबूर हो जाते हैं.
आरक्षण और सीट वितरण को लेकर भी सवाल
झारखंड में 32 मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियां हैं. लेकिन जनजातीय भाषाओं में अध्ययन करने वाले छात्रों को छात्रावासों में समान रूप से सीटें नहीं मिल रही हैं. कुछ विशिष्ट भाषाओं के छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे अन्य जनजातियों से आने वाले छात्र हाशिए पर चले जा रहे हैं. इस गिरावट और असमानता को लेकर अब शैक्षणिक संस्थानों और कल्याण विभाग की नीतियों पर प्रश्न उठने लगे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द उचित नीतिगत सुधार नहीं किए गए, तो आदिवासी भाषाओं के संरक्षण की दिशा में यह एक गंभीर बाधा बन सकता है. इसे भी पढ़ें -JPSC">https://lagatar.in/student-satyanarayan-ends-his-hunger-strike-over-jpsc-mains-result-warns-the-government/">JPSC

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