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Exclusive: औद्योगिक नीति में "शराब" शब्द होने  से बीयर बनाने वाली कंपनी को करोड़ों का वैट रिफंड

साल 2021 में सरकार ने नई औद्योगिक नीति लागू की. नई नीति में सेनेटाईजर बनाने वाली कंपनियों को फैक्टरी लगाने के लिए लाभ देने के लिए शराब शब्द का इस्तेमाल किया गया. इसी शराब शब्द की वजह से नई बीयर फैक्टरी लगाने वाली कंपनी को हर साल करोड़ों रुपये का लाभ हो रहा है और सरकार को वैट के रुप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान हो रहा है.
 

Ranchi: औद्योगिक नीति 2021 में शामिल एक शब्द "शराब" की वजह से सरकार को हर साल वैट की राशि में से करोड़ों रुपये शराब बनाने वाली कंपनी को वापस करना पड़ रहा है. सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में बोकारो डिस्टलरी लिमिटेड को बीयर उत्पादन के मामले में वैट रिफंड के रूप में 20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है. कंपनी को आंशिक भुगतान किया जा चुका है. इस कंपनी को बीयर उत्पादन के बाद से वैट रिफंड का लाभ मिल रहा है. 

 

उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार औद्योगिक नीति बनाती रही है. इसमें नए उद्योगों को विभिन्न प्रकार की सुविधाएं देने का प्रावधान किया जाता है. पहले से लागू औद्योगिक नीति की अवधि समाप्त होने के बाद सरकार साल 2021 में नई औद्योगिक नीति लागू की थी. 

 

इस नीति में पहले के मुकाबले नये उद्योगों को अधिक सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया है. इस औद्योगिक नीति से संबंधित गजट अधिसूचना 31 जुलाई 2021 को जारी की गयी थी. यह नीति अधिसूचना जारी होने की तारीख से  पांच साल के लिए प्रभावी है. यानी 31 जुलाई 2026 तक यह नीति प्रभाव में है.

 

औद्योगिक नीति लागू करने का यह वर्ष कोविड-19 से प्रभावित था. कोविड-19 से बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देशों की वजह से अचानक सेनेटाइजर की मांग बढ़ गयी. इस मांग को पूरा करने के लिए राज्य में डिस्टिलरी को प्रोत्साहित करने की नीति बनायी गयी. क्योंकि Extra Neutral Alcohol ( ENA) ही सेनेटाइजर बनाने का आधार है. इसके अलावा ENA का इस्तेमाल शराब, परफ्यूम सहित अन्य चीजों के उत्पादन में किया जाता है. ENA का उत्पादन डिस्टिलरी से होता है. इसलिए औद्योगिक नीति में डिस्टिलरी को प्रत्साहित करने का प्रावधान किया गया.

 

डिस्टिलरी को प्रोत्साहित करने के लिए यह तर्क दिया गया कि वर्तमान में राज्य में उपलब्ध सुविधाएं यानी डिस्टिलरी, सेनेटाइजर की मांग को पूरा करने के लिए सक्षम नहीं है. इस तर्क के साथ औद्योगिक नीति में डिस्टिलरी प्रमोशन का प्रावधान किया गया. इसमें डिस्टिलरी के साथ शराब भट्ठी शब्द जोड़ा गया. साथ प्रोत्साहित करने के लिए वैट के रिफंड प्रावधान किया गया. 

 

वैट रिफंड प्रावधान के तहत औद्योगिक नीति लागू होने के दो साल के अंदर उत्पादन शुरु करने वाली कंपनी को 20 प्रतिशत और दो साल के बाद उत्पादन शुरु करनेवाली कंपनी को वैट का 15 प्रतिशत रिफंड करने का नियम है.

 

औद्योगिक नीति लागू होने के बाद राज्य में तीन नई डिस्टिलरी स्थापित हुआ. इनको वैट रिफंड का लाभ मिल रहा है. ENA पर वैट का रेट 14 है. इसलिए नई डिस्टिलरी को 14 प्रतिशत वैट का 25 प्रतिशत रिफंड हो रहा है. लेकिन नीति में शामिल किये गये शराब भट्ठी शब्द की वजह से ही बोकारो डिस्टिलरी को बीयर बनाने के एवज में वैट रिफंड मिल रहा है. 

 

गौरतलब है कि शराब पर वैट का रेट 75 प्रतिशत है. इसलिए शराब बनाने वाली कंपनी को 75 प्रतिशत वैट का 25 प्रतिशत रिफंड मिल रहा है. बोकारो डिस्टिलरी की स्थापना दिसंबर 2014 में हुई थी. इसलिए औद्योगिक नीति 2021 के आलोक में उसे ENA पर वैट का रिफंड नहीं मिलता है. लेकिन नीति में शामिल शराब भट्ठी शब्द की वजह से बोकारो डिस्टिलरी लिमिटेड को बीयर बनाने के बदले वैट का 25 प्रतिशत रिफंड का लाभ मिल रहा है.

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