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TVNL MD को हटाने की फाइल राजभवन में, इधर अभी भी मनमाने फैसले ले रहे हैं एके सिन्हा

Anand Kumar

Ranchi/Bokaro : तेनुघाट विद्युत निगम लि. यानी टीवीएनएल के एमडी अरविंद कुमार सिन्हा को सरकार ने उनके पद से हटा दिया है. पिछले दो जून को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें हटाने की फाइल पर दस्तखत कर दिये. तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन, ललपनिया में महाप्रबंधक अनिल शर्मा को एमडी का प्रभार भी सौंप दिया, लेकिन हटाये जाने के बावजूद अरविंद कुमार शर्मा टीवीएनएल मुख्यालय में बैठ रहे हैं. नीतिगत फैसले ले रहे हैं. अधिकारियों को शोकॉज कर रहे हैं और ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट कर रहे हैं.

राजनीतिक संपर्कों के जरिये फाइल लटकाना चाहते हैं सिन्हा

दिलचस्प है कि अरविंद सिन्हा के खिलाफ वित्तीय अनियमितता सहित कई गंभीर आरोप साबित हुए हैं. उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित कमेटी न उन्हें दोषी पाते हुए विगत 27 फरवरी को सरकार की रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बाद अरविंद कुमार सिन्हा ने सरकार को पत्र लिखकर स्वयं को प्रबंध निदेशक पद से हटाने का आग्रह किया था. उन पर लगे आरोपों के आलोक में सरकार ने उन्हें हटाने का फैसला किया. 2 जून को सीएम ने संबंधित संचिका पर दस्तखत भी कर दिये. फाइल राज्यपाल की स्वीकृति के लिए राजभवन भेजी गयी है. इस तकनीकी औपचारिकता में हो रहे विलंब का फायदा उठाते हुए अरविंद कुमार सिन्हा मनमाने फैसले ले रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि सिन्हा अपने ऊंचे राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल कर फाइल को और कुछ दिनों के लिए अटकाने की फिराक में हैं, ताकि जिन आरोपों में उन्हें दोषी करार देकर हटाया गया है, उससे संबंधित साक्ष्यों की लीपापोती की जा सके.

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अवकाश के दिन ऑफिस खोलकर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया

नैतिक आधार पर जिस दिन मुख्यमंत्री ने उन्हें हटाने की फाइल पर दस्तखत किये, सिन्हा को नीतिगत फैसले लेना का अधिकार नहीं रहा, लेकिन वे शनिवार और रविवार जैसे अवकाश के दिनों में भी कार्यालय आ रहे हैं और अपने खास कर्मचारियों और अधिकारियों को बुलाकर मनमाने फैसले ले रहे हैं. मनमानी का आलम यह है कि हटाये जाने के बाद अरविंद कुमार सिन्हा ने 5 जून को एक आदेश निकाल कर मेसर्स श्री इंटरप्राइजेज, टीटीपीएस को दो साल के लिए काली सूची में डाल दिया. कारण यह बताया गया है कि श्री इंटरप्राइजेज ने बिना काम किये भुगतान लिया है. जबकि विपत्रों तथा गेट पास आदि की जांच के बाद ही उसे भुगतान किया गया था. इसलके अलावा 5 जून शनिवार का दिन था. आखिर ठेकेदार को काली सूची में डालने की इतनी क्या हड़बड़ी थी कि शनिवार को ऑफिस खुलवा कर आदेश निकालना पड़ा.

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हर कमेटी में एमके प्रसाद और राजेश रंजन ही क्यों

अरविंद कुमार सिन्हा ने जो उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनायी है उसमें वित्त नियंत्रक एमके प्रसाद तथा विद्युत अधीक्षण अभियंता (सीए एंड एम) राजेश रंजन थे. ये दोनों सिन्हा के चहेते अधिकारी हैं. टीवीएनएल मुख्यालय में गठित होनेवाली जांच कमेटी हो या वेतन वृद्धि की अनुशंसा करनेवाला पैनल, प्रसाद और राजेश रंजन हर कमेटी में अनिवार्य रूप से पाये जा सकते हैं. निगम के आंतरिक दस्तावेजों से इसकी पुष्टि की जा सकती है.

अपना वेतन खुद बढ़वाया और शो-कॉज पूर्व एचआर हेड को किया

सबसे मजेदार यह है कि एमडी रहते अरविंद सिन्हा ने अपना वेतन पे लेवल 17 (37000-67000/ जी. पी. 10000) के क्रमांक 10 का वेतनमान अपने योगदान की तिथि से परिवर्तित कर लिया. सिन्हा ने बाकायदा नियमों के विरुद्ध जाकर एक पैनल बनाया. इस पैनल में भी वित्त नियंत्रक एमके प्रसाद तथा विद्युत अधीक्षण अभियंता (सीए एंड एम) राजेश रंजन सदस्य थे. पैनल की अनुसंशा पर वेतन वृद्धि का प्रस्ताव तैयार हुआ, जिसे एमडी के रूप में अरविंद कुमार सिन्हा ने स्वयं अनुमोदन किया. टीवीएनएल के दस्तावेजों से इसकी पुष्टि होती है. और जब सरकार द्वारा गठित जांच समिति ने एमडी सिन्हा को इसके लिए दोषी करार दिया, तो उन्होंने अपनी खीज मिटाने के लिए तत्कालीन विभागाध्यक्ष मानव संसंधान एवं वरीय विधि पदाधिकारी भोला सिंह को इस गलती का जिम्मेदार ठहराते हुए शोकॉज कर दिया.

जांच कमेटी द्वारा पाये गये साक्ष्यों की लीपापोती में जुटे हैं सिन्हा

दरअसल सिन्हा हटाये जाने से बौखलाये हुए हैं. राजभवन से फाइल पर दस्तखत होने की औपचारिकता पूरी होने तक वह अपने खिलाफ लगाये आरोपों से संबंधित साक्ष्यों को मिटाने और इसके लिए दूसरों को दोषी ठहराने के काम में जुटे हैं. शअरी इंटरप्राइजेज को काली सूची में डालने और सीनियर लॉ पदाधिकारी भोला सिंह को शोकॉज करने की कार्रवाई इसी के तहत की गयी है.

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