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क्या वेदांता (ESL) के अधिकारियों को बचा रही है बोकारो पुलिस!

  • वेदांता इलेक्ट्रोस्टील कंपनी के डिप्टी सीईओ रवीश शर्मा समेत सभी आरोपियों को निलंबनमुक्त करते हुए फिर से बहाल कर लिया जाता है. शरीर से लाचार और नौकरी से निलंबित विष्णु अभी भी अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा है और उसके पिता थाने का चक्कर लगा रहे हैं.

Ranchi/Bokaro : दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य से विष्णु रेड्डी नाम का एक युवा बोकारो स्थित वेदांता इलेक्ट्रो स्टील में एचआर डिपार्मेंट में दो साल पहले ज्वाइन करता है. लेकिन करीब 15 दिनों पहले किसी ठेकेदार से रिश्वत लेने का आरोप वेदांता (ईसीएल) के सीनियर अधिकारी विष्णु पर लगाते हैं. विष्णु इस आरोप का विरोध करता है. बात इतनी बढ़ जाती है कि कंपनी के डिप्टी सीईओ रविश शर्मा, सीएफओ आनंद दुबे, कॉमर्शियल हेड आनंद विजेता सहित कुछ अधिकारी उसके साथ मारपीट करने लगते हैं. 

 

इलेक्ट्रो स्टील कैंपस के व्हाईट हाउस नाम से जाने वाले बिल्डिंग के केबिन में बंद करके उसे मारा-पीटा जाता है. अपनी जान बचाने के लिए विष्णु कंपनी की सीएचआरओ श्यामली मिंज की केबिन में घुस जाता है. मारपीट करने वाले अधिकारी वहां भी पहुंच जाते हैं और उसे कंपनी के सुरक्षा विभाग के अधिकारी वेद प्रकाश को सौंप देते हैं. 

 

वेद प्रकाश को विष्णु के साथ मारपीट करने को कहा जाता है. बाद में विष्णु को एक कमरे में बंद कर दिया जाता है. अपनी जान बचाने के लिए आखिरकार विष्णु पहले तल्ले पर स्थित कमरे के कूद जाता है. जिससे उसके दोनों पैर टूट जाते हैं. शरीर में और भी कई जगह चोट आयी हैं. करीब 15 दिनों से विष्णु बोकारो के एक निजी आस्पताल में भर्ती है. और उसके पिता श्रीनिवास रेड्डी अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए पुलिस वालों की दर-दर की ठोकर खा रहे हैं. 

 

अब तक प्राथमिकी नहीं

 

हादसे के बाद तेलंगाना से विष्णु के पिता श्रीनिवास रेड्डी बोकारो पहुंचते हैं. बेटे का हाल देखकर लाचार पिता उसे न्याय दिलाने की कोशिश करते हैं. लेकिन पहले अपने बेटे की स्वास्थ की चिंता करते हुए कुछ दिनों के बाद वो बोकारो के सियालजोरी थाना पहुंचते हैं. कभी थाना प्रभारी के ना होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया जाता है, तो कभी त्योहार की बात कहकर उनका आवेदन नहीं लिया जाता है. 

 

कई बार तो विष्णु के पिता को थाने में तीन-तीन घंटे तक बैठाकर रखा जाता है, लेकिन आवेदन नहीं लिया जाता है. आखिरकार हारकर वो बोकारो एसपी के पास पहुंचते हैं. लेकिन वहां एसपी साहब से मुलाकात नहीं हो पाती है. गेट पर ही उनसे आवेदन लेकर एक मुहर मारकर उसकी फोटो कॉपी उन्हें सौंप दी जाती है. लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं किया जाता है. 

 

बोकारो पुलिस के इस रवैये पर अब सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं. सवाल यह है कि क्या बोकारो पुलिस वेदांता (ईएसएल) के अधिकारियों को बचा रही है. आखिर क्यों एक अंजान शहर में विष्णु और उसके पिता श्रीनावस रेड्डी को पुलिस की मदद नहीं मिल पा रही है.  

 

निलंबित अधिकारी हुए बहाल

 

एक तरफ पुलिस विष्णु के पिता का आवेदन कई दिनों से नहीं ले रही है, वहीं दूसरी तरफ हादसे के बाद कंपनी की तरफ से जिन चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था, उन्हें निलंबनमुक्त कर दिया गया है. निलंबित होने वालों में विष्णु रेड्डी भी शामिल था, वह अब भी निलंबित ही है.  लेकिन कुछ ही दिनों के बाद कंपनी के डिप्टी सीईओ रवीश शर्मा समेत सभी आरोपियों को फिर से बहाल कर लिया जाता है. शरीर से लाचार और नौकरी से निलंबित विष्णु अभी भी अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा है और उसके पिता थाने का चक्कर लगा रहे हैं. 

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