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जमशेदपुर : खबर का असर – मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना में शामिल हुआ थैलेसीमिया

Jamshedpur (Vishwajit Bhatt) : शुभम संदेश की खबर का सकारात्मक असर हुआ है. झारखंड सरकार ने ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ के गंभीर बीमारियों की सूची को विस्तारित करते हुए इस सूची में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, बोनमैरो ट्रांसप्लांट, ब्रेन हेमरेज सहित कुल 17 रोगों को असाध्य रोगों की सूची में शामिल कर लिया है. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार यह सूची सोमवार यानि पांच सितंबर को सार्वजनिक कर दी जाएगी. बताते चलें कि शुभम संदेश अखबार ने गत 25 अगस्त के अपने अंक में थैलेसीमिया के रोगियों की व्यथा को प्रकाशित किया था. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/09/JSR-Thalasimia-2.jpg"

alt="" width="400" height="640" /> इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-blood-storage-unit-will-be-set-up-in-sub-division-hospital-this-month-dr-rn-soren/">घाटशिला

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किसी भी सरकारी कॉलेज में हेमेटोलॉजिस्ट नहीं है उपलब्ध

पूरे एक पन्ने की इस रिपोर्ट में यह बताया गया था कि झारखंड में छह सरकारी मेडिकल कॉलेज व एक एम्स होते हुए भी एक भी हेमेटोलॉजिस्ट नहीं है. इसके कारण थैलेसीमिया के मरीज मारे-मारे फिर रहे हैं. साथ ही रिपोर्ट के जरिए सरकार के संज्ञान में यह भी लाने का प्रयास किया था कि पड़ोसी राज्य ओडिशा की सरकार इस बीमारी की दवाएं मुफ्त दे रही हैं तो झारखंड सरकार क्यों नहीं? इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गत 31 अगस्त को ‘मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना’ के तहत प्रभावित पात्र व्यक्तियों की चिकित्सा के लिए विभागीय स्तर से दी जाने वाली चिकित्सा सहायता राशि पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-rahul-gets-10-year-jail-term-for-raping-a-girl-in-sonari/">जमशेदपुर

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इस कदम से थैलेसीमिया के मरीजों का हो सकेगा पूर्ण इलाज

साथ ही पूर्व में स्वीकृत असाध्य रोगों की सूची में थैलेसीमिया, सिकल सेल अनीमिया, बोनमैरो ट्रांसप्लांट, ब्रेन हेमरेज सहित कई अन्य रोगों को सूचीबद्ध करने की भी स्वीकृति दी. मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री के इस सराहनीय कदम से अब थैलेसीमिया के मरीजों का पूर्ण इलाज संभव हो सकेगा. क्योंकि इस बीमारी का एकमात्र इलाज बोनमैरो ट्रांसप्लांट है. झारखंड थैलेसीमिया फाउंडेशन के सचिव अतुल गेरा मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताते हैं कि फाउंडेशन ने बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए कोरोना के पहले ही झारखंड के अलग-अलग जिलों के कुल 100 थैलेसीमिया के मरीजों की रांची सदर अस्पताल में जांच कराई थी. इसमें से 14 थैलेसीमिया के मरीजों की एचएलए टाइपिंग उनके भाई बहनों से मिल गई थी. इसे भी पढ़ें : घाटशिला">https://lagatar.in/ghatshila-auction-suit-filed-against-those-who-did-not-deposit-the-loan-of-jharkhand-sarkarita-bank/">घाटशिला

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पैसों की कमी के कारण नहीं हो पा रहा था इलाज

यानि इन मरीजों को बोनमैरो का डोनर उनके घर में ही मिल गया था. पैसों के कारण इनका बोनमैरो ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था. सीसीएल सीएसआर के तहत अपने एक राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के माध्यम से इन 14 बच्चों के बोनमैरो ट्रांसप्लांट के लिए प्रति बच्चे 10-10 लाख रुपये देने के लिए तैयार था. लेकिन, नारायणा हृदयालय के नारायणा अस्पताल बैंगलोर के डॉ. सुनील बट से हुई बातचीत में बोनमैरो ट्रांसप्लांट की इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 15 लाख रुपये प्रति बच्चा अनुमानित खर्च आ रहा था. प्रति बच्चा पांच लाख रुपये कम पड़ने के कारण प्रक्रिया थोड़ी धीमी हो गई थी. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-javed-convicted-in-shooting-for-extortion-in-azadnagar/">जमशेदपुर

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सरकार की घोषणा के बाद प्रक्रिया ने पकड़ा जोर

अब सरकार की घोषणा के बाद प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है और सरकार से 10 नहीं मात्र पांच लाख रुपये प्रति बच्चा मिल जाने के बाद एक साथ इन 14 बच्चों का बोनमैरो ट्रांसप्लांट कराकर इनको इस बीमारी से मुक्त करा लिया जाएगा. सरकार के उठाए गए इन नये कदम से झारखंड में थैलेसीमिया के ​खिलाफ बहुत मजबूती से लड़ाई लड़ी जा सकेगी. [wpse_comments_template]

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