Ranchi: राज्य की खुदरा शराब दुकानों में मैन पावर सप्लाई करने वाली कंपनियों पर सरकार का बकाया बढ़ कर 100 करोड़ रुपये हो गया है. जबकि इन कंपनियों ने कुल 50.15 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी दी है. मैन पावर सप्लाई में लगी सात में से दो कंपनियों की बैंक गारंटी फर्जी पायी गयी है. लेकिन सरकार ने फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों के खिलाफ अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की है. छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के पर्दाफाश होने और झारखंड से उन कंपनियों का व्यापारिक संबंध समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने खुद ही शराब की खुदरा दुकानों को चलाने का फैसला किया. लेकिन सरकार के पास 1564 खुदरा शराब दुकानों को चलाने के लिए कर्मचारी उपलब्ध नहीं थे.
https://lagatar.in/wp-content/uploads/2025/05/Screenshot-2025-05-02-at-3.15.20
PM-272x173.png" alt="" width="272" height="173" />
PM-272x173.png" alt="" width="272" height="173" />
सरकार ने मैन पावर के लिए टेंडर प्रकाशित किया. इसमें सात कंपनियों को सफल घोषित करते हुए उन्हें वर्क आर्डर दिया गया. इन कंपनियों में आरके एंड कंपनी मैन पावर प्राइवेट लिमिटेड, जेएमडी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, फ्रंटलाईन बिजनेस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, विजन हॉस्पिटलिटी सर्विसेज एंड कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड, मार्शन इनोवेटिव सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड, वेबल टेक्नोलॉजी लिमिटेड और के.एस. मल्टी फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड का नाम शामिल है.सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार इन सातों कंपनियों ने बैंक गारंटी भी जमा किया. बैंक गारंटी जमा लेने का उद्देश्य यह है कि अगर किसी कंपनी ने किसी तरह की वित्तीय गड़बड़ी की तो बैंक गांरटी की राशि जब्त कर उसकी वसूली की जा सके. मैन पावर सप्लाई में लगी इन कंपनियों को शराब की खुदरा बिक्री से मिली राशि को हर सप्ताह सरकार के खाते में जमा करना था. लेकिन इन कंपनियों ने शराब की बिक्री से मिली राशि निर्धारित समय सीमा में सरकारी खाते में जमा नहीं कराया. इससे इन कंपनियों पर सरकार के बकाया बढता गया. यह रकम बढ़ कर फिलहाल करीब 100 करोड़ रुपये हो गया है. सरकार ने जब इन कंपनियों का बैंक गारंटी जब्त कर बकाये की वसूली की कोशिश की तो दो कंपनियों के बैंक गांरटी फर्जी पाये गये. इसमें विजन हॉस्पिटलिटी और मार्शन इनोवेटिव का नाम शामिल है. इन दोनों कंपनियों पर बकाया राशि उनके द्वारा दी गयी बैंक गारंटी के मुकाबले दोगुना से ज्यादा है. लेकिन बैंक गारंटी फर्जी होने की वजह से इन कंपनियों से बकाये की वसूली संभव नहीं है. सरकार ने बैंक गारंटी के फर्जी पाये जाने के बावजूद अब तक इन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की है.
Leave a Comment