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धनबाद में थैलेसीमिया के 250 से अधिक मरीज, पर यहां इलाज की कोई व्यवस्था नहीं

 
Dhanbad : धनबाद जिले में थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या 250 से अधिक है. इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता है. एसएनएमएमसीएच के डॉ. यूके ओझा बताते हैं कि भारत में हर साल 10 से 15 हज़ार बच्चे थैलेसीमिया मेजर से ग्रसित पैदा होते हैं. फिलहाल, धनबाद में 250 से अधिक मरीज हैँ. धनबाद समेत पूरे झारखंड बीमारी के इलाज की व्यवस्था नहीं है. यहां तक कि जांच के लिए मरीज के ब्लड का सैंपल भी दिल्ली भेजना पड़ता है, जिसके लिए विभाग को प्रति जांच 1000 रुपये चुकाने पड़ते हैं. डॉ. ओझा बताते हैं कि थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रोग है, जो माता अथवा पिता या दोनों के जींस में गड़बड़ी के कारण होता है. रक्त में हीमोग्लोबिन 2 तरह के प्रोटीन से बनता है अल्फा और बीटा. इन दोनों में से किसी प्रोटीन के निर्माण वाले जींस में गड़बड़ी होने पर व्यक्ति में बीमारी होती है. थैलेसीमिया दो प्रकार का होता है- माइनर व मेजर.

थैलेसीमिया माइनर  

यह बीमारी उन बच्चों को होती है जिन्हें प्रभावित जीन्स माता अथवा पिता द्वारा प्राप्त होता है. इस प्रकार से पीड़ित थैलेसीमिया के रोगियों में अक्सर कोई लक्षण नजर नहीं आता है.

थैलेसीमिया मेजर

यह बीमारी उन बच्चों को होती है जिनके माता और पिता दोनों के जींस में गड़बड़ी होती है. यदि माता और पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर हों, तो बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा अधिक रहता है.

शादी से पहले  युवक-युवती की जांच जरूरी

डॉ. यूके ओझा ने बताया कि बीमारी की रोकथाम के लिए सबसे कारगर उपाय शादी से पहले युवक व युवती की स्वास्थ्य जांच अति आवश्यक है. जांच में यह पता चल जाता है कि उनका स्वास्थ्य एक-दूसरे के अनुकूल है या नहीं. इसमें थैलेसीमिया, एड्स, हेपेटाइटिस बी, आरसी आरएच फैक्टर आदि की जांच जरूरी है.

बीमारी को खत्म करने की मुहिम में जुटे हैं अंकित राजगढ़िया

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alt="" width="214" height="300" /> समाजसेवी अंकित राजगढ़िया थैलेसीमिया को जड़ से समाप्त करने की मुहिम में पिछले 5 वर्षों से जुटे हुए हैं. वह 18 वर्ष की उम्र से ही सोशल मीडिया व अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं. उनका कहना है कि बीमारी का मुख्य कारण अज्ञानता है. विश्व थैलेसीमिया दिवस 8 मई के अवसर पर उन्होंने लोगों से जागरूकता की मुहिम से जुड़ने की अपील की, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके. धनबाद सहित पूरे झारखंड में थैलेसीमिया बीमारी के इलाज के लिए एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नही है. उन्होंने मरीजों की जान रक्षा के लिए एसएनएमएमसीएच में थैलेसीमिया डे केयर सेंटर खोलने की सरकार से मांग की है. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-claims-of-collecting-toll-tax-from-vehicles-failed-plan-was-to-earn-rs-10-crore-every-month/">धनबाद

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