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सरायकेला : आदिवासियों की आस्था व प्रकृति प्रेम का प्रतीक है बाहा पर्व- रामदास सोरेन

Dilip Kumar Chandil  : राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासियों के प्रकृति के प्रति समर्पण और उनके अटूट प्रेम को दर्शाता है. सरहुल, बाहा पर्व आदिवासियों के आस्था, प्रकृति पूजक और उनका रक्षक होने का प्रतीक है. मंत्री रामदास सोरेन मंगलवार को चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेरगाढ़ पर झारखंड दिशोम बाहा (सरहुल) महोत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे. उन्होंने सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए युवाओं को अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया. कहा कि इससे जहां समाजिक एकता और अखंडता को बढावा मिलता है,  वहीं प्रकृति और वन्य जीवों की रक्षा होती है. समारोह को विधायक सविता महतो समेत अन्य गणमान्य लोगों ने भी संबोधित किया.

महिलाओं ने जूड़े में,पुरुषों ने कानों पर सजाया सारजोम बाहा

चांडिल गोलचक्कर स्थित दिशोम जाहेरगाढ़ में महापर्व बाहा (सरहुल) श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ भव्य तरीके से मनाया गया. सर्वप्रथम नायके बाबा ने विधिवत पूजा-अर्चना की. समाज के लोगों ने जाहेरगाढ़ में माथा टेका और देवी-देवताओं के आशीष के रूप मे सखुआ फूल यानि सारजोम बाहा ग्रहण किया. नायके बाबा के हाथों से मिले सारजोम बाहा को महिलाओं ने अपने जूड़े में और पुरुषों ने कानों पर सजाया सुख-समृद्धि की कामना की. जमशेदपुर के बाहा किनुडीह की टीम ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया. महोत्सव में पातकोम दिशोम के पारगाना रामेश्वर बेसरा, माझी बाबा तारांचाद टुडू, गुरुचरण किस्कू, चारूचांद किस्कू, दिलीप किस्कू समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-youth-dies-after-being-hit-by-stones-from-ob-dump-in-jharia/">धनबाद

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