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झारखंड में चिकित्सा पदाधिकारी व विशेष चिकित्सकों की भारी कमी

  • अंतराष्ट्रीय मानक, औसतन 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए
  • देश में औसतन 13,000 लोगों पर एक डॉक्टर हैं.
  • झारखंड में औसतन 15,600 लोगों पर एक डॉक्टर.
Ranchi :   झारखंड के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी है. सरकार के आंकड़े के मुताबिक, झारखंड में 2244 चिकित्सा पदाधिकारी काम कर रहे हैं. जबकि 467 विशेषज्ञ चिकित्सक अस्पतालों में पदस्थापित हैं. इनमें 112 विशेषज्ञ चिकित्सक और 103 चिकित्सा पदाधिकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम कर रहे हैं.  विशेषज्ञ चिकित्सक की बात करें तो इसके 654 पद रिक्त है, जबकि चिकित्सा पदाधिकारी के 81 पद रिक्त है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों के 229 पद रिक्त है, जबकि चिकित्सा पदाधिकारी के 97 पद रिक्त है. इन आंकड़ों से हमें यह पता चलता है कि झारखंड में करीब 15,600 लोगों पर एक डॉक्टर हैं. जबकि देश में औसतन 13000 लोगों पर एक डॉक्टर है. डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक, प्रति 1000 लोगों पर एक डॉक्टर होना चाहिए.

अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, मरीज परेशान

जानकारी के मुताबिक, झारखंड में नौ मेडिकल कॉलेज है, जबकि 23 जिला सदर अस्पताल और 13 अनुमंडलीय अस्पताल है. इन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. राज्य में 3300 से अधिक प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र है. लेकिन सभी नर्स के भरोसे चल रहे हैं. लेकिन प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र में नर्सों की संख्या भी बहुत कम है. हाल के दिनों में सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर काम किये हैं. इस वजह से झारखंड के हेल्थ (स्वास्थ्य) परफॉरमेंस इंडेक्स में सुधार आया है. झारखंड में हेल्थ परफॉरमेंस इंडेक्स 38.46 से बढ़कर 45.33 हो गया. यानी हेल्थ परफॉरमेंस के मामले में 6.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इसका मतलब यह है कि स्वास्थ्य सेवा में सुधार हुआ है.

छह जिलों में कियोस्क मशीन, पर नहीं कर रहा काम 

राज्य के छह जिलों बोकारो, रामगढ़, लातेहार, पलामू, खूंटी व गुमला में कियोस्क मशीन लगी है. लेकिन यह काम नहीं कर रही है. इस कारण मरीजों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि अस्पताल में कौन डॉक्टर, किस वक्त, कहां बैठेंगे. कियोस्क मशीन से यह भी पता चलता है कि अस्पताल में कौन-सी दवा उपलब्ध है और कौन सी नहीं. कियोस्क मशीन नहीं काम करने के बारे में विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इन छह जिलों के अस्पतालों को मशीन तो उपलब्ध करा दिया गया है. लेकिन इसके लिए अभी तक सॉफ्टवेयर का निर्माण नहीं हुआ है. यह काम अभी प्रक्रिया में है. सॉफ्टवेयर बनने के बाद कियोस्क मशीन काम करने लगेगा. [wpse_comments_template]  

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