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सोमनाथ पुनर्स्थापना के 1000 वर्ष, भाजपा ने बताया भारत की आत्मा का प्रतीक

Ranchi: देश के आध्यात्मिक स्वरूप के केंद्र और धार्मिक ऊर्जा के प्रतीक प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की पुनर्स्थापना के 1000 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया. भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर इस अवसर पर देशभर में पार्टी के जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने निकटवर्ती शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक, आरती और मंत्रोच्चार के साथ उपासना की.

 

प्रदेश में भी इस कार्यक्रम के तहत सभी मंडल अध्यक्ष, जिला पदाधिकारी, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी, सांसद, विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ताओं ने शिवालयों में धार्मिक अनुष्ठान कर सोमनाथ की सांस्कृतिक विरासत को नमन किया.

 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत की केवल धन-संपदा ही नहीं लूटी, बल्कि देश के सांस्कृतिक और आस्था के केंद्रों पर भी प्रहार किया. उन्होंने कहा कि इन आक्रमणों का उद्देश्य भारत के मान बिंदुओं को मिटाना था, लेकिन सनातन संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि उसे समाप्त नहीं किया जा सका.

 

मरांडी ने कहा कि आक्रांता मोहम्मद गजनी ने सोमनाथ मंदिर से हीरे, जवाहरात, सोना-चांदी लूटे और अद्वितीय सोमनाथ शिवलिंग पर भी आघात किया. यह हमला केवल एक मंदिर पर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा पर किया गया प्रहार था. इसके बावजूद भारत की सांस्कृतिक चेतना फिर से खड़ी हुई. 


उन्होंने कहा कि आज सोमनाथ की पुनर्स्थापना के 1000 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं. इस अवधि में दुनिया की अनेक संस्कृतियां समाप्त हो गईं, लेकिन भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ आज भी मजबूती से खड़ा है.

 

प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने अपने पैतृक गांव स्थित शिवालय में भगवान शिव का जलाभिषेक किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिव सत्य हैं, सुंदर हैं और अविनाशी हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का सांस्कृतिक गौरव पुनः स्थापित हो रहा है. 


अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और महाकाल उज्जैन कॉरिडोर जैसे कार्य भारत की सनातन संस्कृति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा दिला रहे हैं.

 

प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने रांची स्थित पहाड़ी बाबा मंदिर में जलाभिषेक और पूजन-अर्चना की. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन है, जिसे याद रखना आवश्यक है. विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत और सनातन मूल्यों का परिचय होना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत के सनातन मान बिंदु ही देश की असली पहचान हैं.


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