Ranchi: झारखंड में 108 एम्बुलेंस सेवा के तहत इंटर फैसिलिटी ट्रांसफर यानी IFT मामलों में कार्यरत कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है. कर्मचारियों का आरोप है कि लंबी ड्यूटी, ओवरटाइम भुगतान की कमी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण सेवा संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
कर्मचारियों के अनुसार, जब मरीजों को जिला अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों से रांची स्थित रिम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाता है, तब उन्हें 12 से 16 घंटे या उससे अधिक समय तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है. इसके बावजूद न तो ओवरटाइम का भुगतान किया जाता है और न ही भोजन भत्ता या अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है.
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि IFT मामलों के दौरान यदि एम्बुलेंस में तकनीकी खराबी आ जाती है, तो उन्हें कई दिनों तक उसी स्थान पर एम्बुलेंस के साथ रुकना पड़ता है या बाद में दोबारा जाकर वाहन वापस लाना होता है. ऐसे मामलों में ठहरने की व्यवस्था या TA और DA का भुगतान नहीं किया जाता है.
संगठन का कहना है कि पूर्व में कार्यरत कंपनी द्वारा IFT मामलों में भोजन भत्ता की सुविधा दी जाती थी और वर्तमान कंपनी ने भी इस संबंध में लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उसका क्रियान्वयन नहीं हुआ है. कर्मचारियों की ओर से लगातार पत्राचार और संवाद के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है.
इस मुद्दे को लेकर संगठन ने कंपनी प्रबंधन को विधिवत पत्र भेजा है. इसके अलावा मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और सचिव, एनएचएम के अभियान निदेशक, सभी उपायुक्तों, सिविल सर्जनों और संबंधित अधिकारियों को भी कर्मचारियों की स्थिति से अवगत कराया गया है.
संगठन के प्रदेश महामंत्री सूरज साहू ने स्पष्ट किया है कि संगठन का उद्देश्य जनहित से जुड़ी 108 एम्बुलेंस सेवा को बाधित करना नहीं है. हालांकि यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन IFT मामलों में सेवा संचालन को लेकर कठिन निर्णय लेने के लिए बाध्य होगा. ऐसी स्थिति में IFT सेवाएं प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्था और प्रबंधन की होगी.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.



Leave a Comment