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10वीं- 12वीं बोर्ड परीक्षा : विद्यार्थियों की काउंसलिंग के लिए सीबीएसई ने जारी किया टोल फ्री नंबर

Ranchi : सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा से पहले विद्यार्थियों की काउंसलिंग के लिए टोल फ्री नंबर जारी किया है. कोविड के बाद पहली बार सीबीएसई की दसवीं और बारहवीं की वार्षिक परीक्षाएं नियमित फिजिकल मोड में आयोजित की जाएंगी. विद्यार्थी करीब दो साल बाद लिखित परीक्षा में शामिल होंगे. उनकी आसानी और बदले हुए परीक्षा पैटर्न से बोर्ड ने पहले ही अवगत करा दिया है. मॉडल पेपर, परीक्षा पैटर्न, मार्क्स डिस्ट्रीब्यूशन की जानकारी सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी है. छात्रों को मनोवैज्ञानिक सहायता और समस्याओं के समाधान के लिए काउंसलिंग की सुविधा पहले फरवरी में शुरू होती थी. लेकिन इस बार यह जनवरी में ही शुरू हुई है.

छह दिनों तक चलेगी काउंसलिंग

सीबीएसई द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि छात्रों के लिए काउंसलिंग नौ जनवरी से शुरू होकर 15 जनवरी तक चलेगी. इसको लेकर सीबीएसई ने 1800-11-8004 टोल फ्री नंबर जारी किया है. छात्र और उनके अभिभावक इस नंबर पर जब चाहें कॉल कर सकेंगे. इसके जरिए तनावमुक्त तैयारी की जानकारी और सुझाव पा सकेंगे. सीबीएसई ने छात्रों की काउंसलिंग के लिए 84 मनोवैज्ञानिकों की टीम बनाई है.

टेली काउंसलिंग एक स्वैच्छिक और नि:शुल्क सेवा

सीबीएसई के द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि टेली काउंसलिंग एक स्वैच्छिक और नि:शुल्क सेवा है, जो बोर्ड द्वारा सोमवार से शनिवार तक सुबह 09:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक प्रदान की जा रही है. इस वर्ष परामर्श सेवा में योगदान देने वाले 84 प्रधानाचार्य और परामर्शदाता भारत और अन्य देशों से यह सुविधा प्रदान कर रहे हैं. जिसमें 73 काउंसलर भारत के और 11 काउंसलर नेपाल, ओमान, जापान, संयुक्त अरब अमीरात व कुवैत के हैं.

वर्ष 1998 से लगातार की जा रही है छात्रों की काउंसलिंग 

वर्ष 1998 से सीबीएसई बोर्ड लगातार दो चरणों में परीक्षा से पहले और परिणाम के बाद मुफ्त मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रदान कर रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों की दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों को परीक्षा के दौरान तनावमुक्त रखना है. सीबीएसई देश का एकमात्र ऐसा बोर्ड है जो लगातार 25 वर्षों से छात्रों और अभिभावकों को इतने व्यापक पैमाने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श दे रहा है. चाहे वह टोल फ्री टेली-परामर्श हो या आईवीआरएस के माध्यम से सुझाव और सूचना. पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड ने सोशल मीडिया पर कई महत्वपूर्ण संदेश साझा किए हैं और छात्रों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया है. इसे भी पढ़ें – आदिवासी">https://lagatar.in/childrens-commission-took-cognizance-in-poster-case-giving-jobs-to-tribal-girls-dc-directed-take-action/">आदिवासी

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