ट्रांसमिशन लॉस को कम करने के लिए खर्च होंगे 1680 करोड़ रुपए नियामक आयोग ने लाइन लॉस को 13 फीसदी तक लाने का दिया निर्देश धनबाद में स्मार्ट मीटरिंग पर खर्च होंगे 28 करोड़ रुपए Ravi Bharti Ranchi: इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक उपकरणों के नहीं होने की वजह से झारखंड में बिजली का नुकसान बढ़ता ही जा रहा है. झारखंड में ट्रांसमिशन लॉस के कारण 907.23 मिलियन यूनिट बिजली बर्बाद हो जाती है. वहीं एक्सटरनल सिस्टम के दुरुस्त नहीं होने के कारण 275.57 मिलियन यूनिट बिजली बर्बाद होती है. इस तरह कुल 1182.8 मिलियन यूनिट बिजली बर्बाद हो रही है. इस लाइन लॉस को कम करने के लिए झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1680 करोड़ रुपए खर्च करेगा.
ऊर्जा अंकेक्षण पर खर्च किए जाएंगे 19 करोड़
वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऊर्जा अंकेक्षण पर 19 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे. इसके तहत डीटीआर और फीडर मीटर लगाया जाएगा. वितरण निगम राज्य में मीटरिंग पर 98.86 करोड़ रुपए खर्च करेगा. एनर्जी ऑडिटिंग के लिए डीटीआर मीटर लगाने में 18.39 करोड़ रुपए खर्च करेगा. फीडर मीटर लगाने में 1.03 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. राजधानी रांची में स्मार्ट मीटरिंग के लिए 61 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. वहीं धनबाद में स्मार्ट मीटरिंग के लिए 28 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. मीटर व ट्रांसफॉरमर रेंट से चाहिए 6.57 करोड़ का राजस्व
झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम को मीटर रेंट (किराया) और ट्रांसफॉरमर रेंट से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 6.57 करोड़ का राजस्व चाहिए. वितरण निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 का आंकड़ा जो झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग को सौंपा है. इसके मुताबिक, वितरण निगम को सुपरविजन चार्ज के लिए 5.39 करोड़ रुपए राजस्व की मांग की गई है. वहीं, उपभोक्ताओं से मिसलेनियस चार्ज के रूप में 2.25 करोड़ रुपए राजस्व की मांग की गई है. इस आंकड़े के अनुसार, बिजली वितरण निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नॉन टैरिफ से 40.29 करोड़ रुपए राजस्व की मांग की है. नुकसान कम हुआ, तो 52 करोड़ रुपये की बचत
झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली नुकसान कम करने पर जोर दिया है. आयोग ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए 13 फीसदी प्रस्तावित वितरण हानि को मंजूरी दी है, जबकि वितरण निगम ने 26.34 फीसदी तक बिजली नुकसान तक की मांग की थी. इस हिसाब से वितरण निगम का नुकान आयोग द्वारा निर्धारित मानक से 13 फीसदी अधिक है. अगर एक फीसदी बिजली का नुकसान कम होता है, तो चार करोड़ रुपए तक की बचत होगी. इस हिसाब से 13 फीसदी तक नुकसान कम होने से वितरण निगम को 52 करोड़ रुपए की बचत होगी. [wpse_comments_template]
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