- शर्तों का उल्लंघन कर पकरी बरवाडीह कोल परियोजना में अवैध खनन मामले में कार्रवाई
- देश के इतिहास में किसी भी पब्लिक सेक्टर पर लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना
1200 करोड़ रुपए जुर्माने की ऐसे हुई गणना
एनटीपीसी और उसके एमडीओ त्रिवेणी सैनिक माइनिंग द्वारा भारत सरकार की शर्तों का उल्लंघन कर अवैध खनन मामले में मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय रांची द्वारा 156 हेक्टेयर में अवैध खनन मामले में एनपीवी का 3.5 प्रतिशत के अनुसार 81 करोड़ जुर्माना लगाने की अनुशंसा की गयी थी. इसके बाद केंद्रीय वन मंत्रालय की एडवाइजरी कमेटी ने एनटीपीसी के कुल लीज क्षेत्र 1026 हेक्टेयर वन भूमि पर एनपीवी का पांच गुणा 12 प्रतिशत ब्याज के साथ जुर्माना लगाने का निर्णय लिया. इस प्रकार 1026 हेक्टेयर और 12 प्रतिशत की गणना करने पर लगभग 1200 करोड़ जुर्माने की रकम होती है.दुमुहानी नदी को नष्ट कर किया अवैध खनन
झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव में एनटीपीसी के पंकरी बरवाडीह कोल परियोजना में एमडीओ (माइन डेवलपर ऑपरेटर ) द्वारा भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा फॉरेस्ट क्लियरेंस स्टेज 2 की शर्तों का उल्लंघन कर क्षेत्र की जीवनरेखा दुमुहानी नाला (नदी ) को नष्ट कर अवैध खनन कर दिया था. इसके लिए एनटीपीसी द्वारा भारत सरकार की शर्तों में संशोधन भी कराना आवश्यक नहीं समझा था, जिसकी शिकायत मंत्रालय से की गयी थी. मंटू सोनी के अधिवक्ता पटना हाईकोर्ट के नवेंदु कुमार के आरोपों और साक्ष्यों की जांच की गयीय समिति ने वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के कथित उल्लंघन पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद उपयोगकर्ता के खनन कार्यों की तुलना में क्षेत्र के हाइड्रोलॉजिकल प्रभाव को देखने के लिए क्षेत्र का दौरा करने के लिए एफएसी की उप समिति गठित करने की सिफारिश की थी. इसकी सूचना झारखंड सरकार के वन विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर दी गई थी.उप समिति को सामान्यत: त्रिवेणी-सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विशेष रूप से दुमुहानी नाला और क्षेत्र की जलवायु पारिस्थिति की बदलाव,आकलन और प्रभाव का अध्ययन करने को कहा गया था. इससे संबंधित शिकायती पत्र झारखंड के प्रधान सचिव को भी लिखा गया था.सौ एकड़ एरिया में अवैध खनन की हो चुकी थी पुष्टि
फॉरेस्ट क्लियरेंस की शर्तों का उल्लंघन कर सौ एकड़ एरिया में अवैध खनन के मामले में शिकायत मिलने के बाद जांच करायी गयी. जांच में पुष्टि होने के बाद केंद्रीय एडवाइजरी कमेटी की बैठक में उपसमिति का गठन किया गया, जिसमें कृषि मंत्रालय के एडिशनल कमिश्नर ओपी शर्मा, वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी, सदस्य के रूप में आईआईटी-आइएसएम धनबाद के प्रो अंशुमाली और एडिशनल पीसीसीएफ झारखंड सरकार शामिल थे. [caption id="attachment_671344" align="aligncenter" width="1080"]alt="" width="1080" height="1081" /> तस्वीर- शिकायतकर्ता मंटू सोनी[/caption]
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