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झारखंड सूचना आयोग में 14456 अपील व 221 शिकायतें लंबित

Satya Sharan Mishra Ranchi: झारखंड राज्य सूचना आयोग में सेकेंड अपील के 14,456 मामले लंबित हैं. 20 जुलाई 2022 तक आयोग में सुनवाई के लिए पेंडिंग आवेदनों की संख्या 7657 थी. वहीं मुख्य सूचना आयुक्त के अप्रूवल के बाद जिन आवेदनों को सुनवाई के लिए प्रोसेस में लाया जाना है, उन आवेदनों की संख्या 6799 है. इसके अलावा सुनवाई के लिए पेंडिंग शिकायतों की संख्या 71 है. जबकि मुख्य सूचना आयुक्त के अप्रूवल के लिए लंबित आवेदनों की संख्या 151 है। यानी कुल 221 शिकायत आयोग के पास लंबित हैं. इसे भी पढ़ें -BIG">https://lagatar.in/big-breaking-cbse-10th-result-released-94-40-students-successfully/">BIG

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मई 2020 से मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली

मई 2020 से राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली है. वहीं 6 सूचना आयुक्तों के पद भी खाली हैं. 26 महीने से आयोग काम नहीं कर रहा है. 2019 में आयोग में करीब 7500 अपील पेंडिंग थे, जो जुलाई 2022 में बढ़कर 14,456 हो गये. सूचना आयोग के डिफंक्ट होने की वजह से सुनवाई बंद है, सिर्फ अपीलों की फाइलें बढ़ती जा रही हैं. अब तो हालत यह हो गई है कि आरटीआई एक्टिविस्टों और आम लोगों ने भी अपील दायर करना बंद कर दिया है.

सूचना आयुक्त पद के लिए 417 आवेदन सरकार को मिले हैं

सूचना आयुक्त के पदों के लिए सरकार के पास सैकड़ों आवेदन भी आ चुके हैं. मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त पद के लिए सरकार के पास 417 आवेदन मिले हैं. इनमें 63 मुख्य सूचना आयुक्त और 354 सूचना आयुक्त पद के लिए हैं. लेकिन अबतक आयोग के पुनर्गठन को लेकर कोई कोशिश नहीं की जा रही है.

नेता प्रतिपक्ष नहीं होने के कारण नहीं हो रही नियुक्ति

सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं होने पर सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष के नहीं होने की वजह से नियुक्ति नहीं हो रही. विधानसभा के बजट सत्र में भाजपा ने यह मुद्दा उठाया था, जिसके जबाव में सरकार की ओर से कहा गया था कि विपक्ष ने खुद ही इस मुद्दे को उलझाया है. जबतक नेता प्रतिपक्ष नहीं बनते आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हो सकती.

आयोग डिफंक्ट होने से अधिकारियों में आयोग का डर खत्म

सूचना आयोग का पुनर्गठन नहीं होने के कारण राज्य में आरटीआई सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है. राज्यभर में हजारों लोग और आरटीआई एक्टिविस्टों ने विभिन्न सरकारी विभागों से सवाल पूछे हैं. लेकिन आयोग डिफंक्ट होने के कारण सरकारी दफ्तरों में बैठे अधिकारी और पदाधिकारी इन आवेदनों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट सर्वेश कहते हैं कि सरकार शासन में पारदर्शिता नहीं चाहती है, इसलिए राज्य में सूचना आयोग पंगु बनाकर रख दिया गया है. इसे भी  पढ़ें - IFPRI">https://lagatar.in/ifpri-report-heat-wave-will-triples-in-india-temperature-expected-to-rise-by-2-4-to-4-4-degrees/">IFPRI

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