Ranchi : झारखंड सरकार ने एनडीपीएस एक्ट 1985 के तहत प्रतिबंधित नशीले पदार्थ की सूचना देने वालों को पुरस्कृत करेगी. सूचना देने वालों की इससे जुड़ी किसी घटना में मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 20 लाख रूपया मुआवजा दिया जायेगा. अगर कोई सरकारी कर्मचारी सूचना देता है और इससे जुड़े मामले में उसकी मौत होने पर उनके आश्रितों को भी 20 लाख रुपया तक मुआवजा मिलेगा. गृह विभाग ने इससे संबंधित संकल्प जारी कर दी है.
नडीपीएस एक्ट की धारा 1985 के तहत प्रतिबंधित नशीले पदार्थों में अफीम, मॉर्फिन, हेरोईन, कोकिन, ब्राउन सुगर, गांजा आदी का अवैध उत्पादन या व्यापार शामिल है. सूचना देने वालों को पुरस्कार की राशि राज्य स्तरीय पुरस्कार समिति द्वारा किये गये फैसले के बाद दी जायेगी. समिति में सीआईडी के एडीजी या आईजी, एएनटीएफ के प्रमुख इस समिति के प्रमुख होंगे. डीआईजी बजट, गृह विभाग के संयुक्त सचिव या उप सचिव और अभियोजन निदेशालय के उप निदेशक सदस्य होंगे.

नशीले पदार्थों को पकड़वाने वालों को मिलने वाली इनाम की राशि.
मुखबिर या सूचनादाता द्वारा दी गई सूचना के बाद जब्ती कार्रवाई सफल हो गई हो और इस प्रक्रिया के दौरान सूचनादाता की जान जाती है, या उस पर हमला किया जाता है, तो उसके लिए अलग-अलग स्थितियों में पुरस्कार के लिए अलग-अलग मुआवजा राशि निर्धारित की गई है.
संकल्प के अनुसार मृत्यु की स्थिति में 20 लाख रुपये, स्थायी विकलांगता की स्थिति में 10 लाख, 40 प्रतिशत या इससे अधिक की दिव्यांगता पर 5 लाख, गंभीर रुप से घायल होने पर तीन लाख रुपये और सामान्य रुप से घायल होने पर 50 हजार रुपया मुआवजा दिया जायेगा.
नशीले पदार्थों के सिलसिले में सूचना देने के लिए सरकार ने कई बिंदु निर्धारित किये हैं. इन पर ई-मेल या लिखित रुप से सूचना दी जा सकती है. नजदीकी थाना, इंस्पेक्टर, एसडीपीओ, प्रखंड या जिला के किसी अन्य पदाधिकारी, जिलों के एसपी, डीआईजी, आईजी, सीआईडी, पुलिस मुख्यालय और गृह विभाग को सूचना दी जा सकती है.
झारखंड सरकार नशीले पदार्थों की जानकारी हासिल करने के लिए टॉल फ्री नंबर जारी करेगी. एक वेबसाइट व पोर्टल बनाया जायेगा, जिस पर मिली सूचना केवर सक्षम पदाधिकारी द्वारा ही देखा जायेगा. पोर्टल पर सूचना देने वालों की जानकारी गुप्त रखी जायेगी. डाटा सेंटर से सूचना लीक ना हो, इसकी विशेष व्यवस्था की जायेगी.
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