22 साल के सोनात खो चुके थे जीने की उम्मीद
कैंसर को मात देने वालों में युवा, अधेड़ के साथ-साथ बूढ़े भी शामिल थे. सभी ने कैंसर से लड़ने के बारे में अपने अनुभवों को साझा किया. जिसमें साहेबगंज के एक 22 वर्षीय युवक सोनात मडैया भी शामिल है. जो ब्लड कैंसर से उबरने के रास्ते पर है. जबकि बरियातू निवासी कुंदन जिसने मुंबई से लौटने के बाद सारी उम्मीदें खो दी थीं, पेट में ट्यूमर के साथ-साथ टेस्टिकुलर कैंसर का पता चलने के बाद उसने जबरदस्त रिकवरी दिखाई है. सोनात ने बताया कि इस साल की शुरुआत में कैंसर का पता चलने के बाद मैंने सभी उम्मीदें खो दी थीं, लेकिन डॉ गुंजेश कुमार ने मुझे एक नया जीवन दिया. डॉ साहब ने हर तरह से हमारी मदद की और हौसला बढ़ाया. अस्पताल फीस और दवाओं में भी छूट दी. मुख्यमंत्री गंभीर बीमा योजना के तहत मेरा इलाज शुरू हुआ. अब काफी सुधार है. डॉक्टर का कहना है कि मैं जल्द ही ठीक हो जाऊंगा. वहीं बरियातू निवासी कुंदन का इलाज डॉ गुंजेश ने किया. कुंदन ने बताया कि टीएमएच मुंबई से लौटने के बाद डॉ गुंजेश ने ही इलाज के लिए प्रोत्साहित किया. इलाज के बाद अब जीने की उम्मीद जगी है. 70 साल के डोमन बाबा ने कहा कि मुझे चार लोगों द्वारा उठाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन आज मैं यहां अपने अनुभव को अपने पैरों पर साझा करने आया हूं. डॉक्टर ने एक परिवार के सदस्य की तरह मेरा इलाज किया और हौसला बढ़ाया. जिसकी बदौलत आज मैं अपने पैरों पर खड़ा हूं. इसे पढ़ें- देवघर">https://lagatar.in/fir-lodged-against-bihar-administrative-officer-alok-kumar-resident-of-deoghar-accused-of-disturbing-communal-harmony/">देवघरके रहने वाले बिहार प्रशासनिक अधिकारी आलोक कुमार पर FIR दर्ज, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप [wpse_comments_template]

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