झारखंड में अधिसूचना के बाद भी किसी विश्वविद्यालय ने नियुक्त नहीं किया लोकपाल, रुकेगा अनुदान Rajnish Prasad Ranchi : झारखंड में संचालित 28 विश्वविद्यालयों के नाम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के डिफॉल्टर सूची में शामिल होंगे. इसके बाद यूजीसी से मिलने वाले अनुदान पर भी रोक लगेगी. यूजीसी ने 11 अप्रैल 2023 को अधिसूचना जारी कर सभी विवि को एक सर्च कमेटी बनाकर 31 दिसंबर तक लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश दिया था. साथ ही लोकपाल नियुक्ति प्रक्रिया की पूरी जानकारी यूजीसी को भेजना था. जारी अधिसूचना में यूजीसी ने कहा था कि जो विश्वविद्यालय लोकपाल की नियुक्ति नहीं करेगा, उसका अनुदान रोक दिया जायेगा. इसके बाद भी किसी भी विवि ने लोकपाल की नियुक्ति नहीं की और न ही नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन जारी की.
इन विवि के खिलाफ की जायेगी दंडातमक कार्रवाई
यूजीसी के सचिव मनीष जोशी ने कहा था कि लोकपाल नियुक्ति में यूजीसी गाइडलाइन का पालन करना है, जो विवि लोकपाल की नियुक्ति नहीं करेगा, वैसे विश्वविद्यालयों के नाम डिफॉल्टर सूची में जारी किये जायेंगे. वहीं ऐसे विश्वविद्यालयों के खिलाफ यूजीसी द्वारा दंडात्मक कार्रवाई भी की जायेगी. विवि के इस रवैये को यूजीसी ने इसे गंभीरता से लिया है और सख्त कार्रवाई की बात कही है. किसी विवि ने निर्देशों का नहीं किया पालन
यूजीसी (छात्रों की शिकायतों का निवारण) विनियम-2023 में दिये गये लोकपाल नियुक्ति पर उसके पिछले निर्देशों का पालन झारखंड में संचालित किसी भी विश्वविद्यालय ने नहीं किया. अब सभी विवि को लोकपाल नियुक्त करके छात्र शिकायत निवारण समिति (एसजीअरसी) का गठन कर इन नियमों का पालन करना आवश्यक है. यूजीसी ने इस संबंध में सभी केंद्रीय, राज्य, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालों के कुलपतियों को पत्र लिखा था. इसमें विवि को तुरंत लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश दिया था. वर्ष 2012 में ही जारी हो गयी थी गाइडलाइन
यूजीसी ने वर्ष 2012 में ही लोकपाल नियुक्ति को लेकर गाइडलाइन जारी की थी, मगर झारखंड के किसी भी विश्वविद्यालय में गाइडलाइन जारी होने के बाद भी लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पायी है. झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी, एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसमें लोकपाल नियुक्त है. प्रदेश में झारखंड सरकार अंतर्गत 11 विश्वविद्यालय, 17 निजी विवि और एक सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. सीयूजे को छोड़ अन्य किसी भी विश्वविद्यालय में लोकपाल नहीं हैं. इससे छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों का निपटारा नहीं हो पा रहा है. छात्रों की शिकायतों का नहीं हो सकेगा जल्द निपटारा
यूजीसी के मुताबिक, 2023 में करीब 16 हजार छात्रों की ओर से फीस वापस न करने से जुड़ी शिकायतें मिली थीं. इसके बाद छात्रों को करीब 30 करोड़ वापस दिलाये गये. विवि में लोकपाल नियुक्त होते तो छात्रों की शिकायतों का निपटारा होता. लेकिन लोकपाल नहीं होने के कारण शिकायतों का निपटारा जल्द नहीं हो पायेगा. रांची विवि में छात्र संगठन शिकायतों को लेकर 7 दिनों तक ईडीपीसी कार्यालय में ताला लगा रखा. आठवें दिन विवि के वीसी और छात्र नेताओं के बीच बातचीत के बाद समझौता हुआ. अगर विवि में लोकपाल नियुक्त होता, तो ऐसे मामलों का निपटारा उनके द्वारा कर दिया जाता. [wpse_comments_template]
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