- नीलामी से पहले सरकारी स्टॉक यार्ड से बालू चोरी, दर्ज हुई प्राथमिकी, करोड़ों के बालू का हिसाब नहीं
Bokaro News: बोकारो जिला के पेटरवार अंचल में झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) के बालू स्टॉक यार्ड से भारी मात्रा में बालू गायब होने का मामला सामने आया है. खेतको मौजा स्थित सरकारी स्टॉक यार्ड से 3,37,357 घनफीट बालू की कथित चोरी का आरोप है. मामले में खनन विभाग की ओर से 13 जून 2026 को पेटरवार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इसके बावजूद अब तक की कार्रवाई और चोरी गए बालू की बरामदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

बालू चोरी को एक नजर में ऐसे समझें.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी स्टॉक यार्ड से इतनी बड़ी मात्रा में बालू कैसे गायब हो गई और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को समय रहते क्यों नहीं मिली. नीलामी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही बालू गायब होने की बात सामने आने से स्टॉक की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.
45 डिसमिल जमीन पर जमा था बालू का स्टॉक
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पेटरवार अंचल के खेतको मौजा में खाता संख्या 22 और प्लॉट संख्या 774 व 775 की करीब 45 डिसमिल जमीन पर JSMDC ने बालू जमा कर रखा था. यहां कुल 3,57,675 घनफीट बालू के भंडारण का उल्लेख है. आरोप है कि जून में नीलामी प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इसमें से 3,37,357 घनफीट बालू गायब हो गया.
यदि दर्ज भंडारण और कथित चोरी की मात्रा सही है, तो स्टॉक का बड़ा हिस्सा गायब हुआ है. ऐसे में यह जांच का विषय है कि स्टॉक का सत्यापन कब किया गया, बालू की निकासी किस रास्ते से हुई और इसकी निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कदम उठाए थे.
बालू की कीमत करोड़ों में, राजस्व नुकसान की आशंका
वर्तमान बाजार में बालू की कीमत करीब 35 से 40 रुपये प्रति घनफीट बताई जा रही है. इस दर से 3,37,357 घनफीट बालू की अनुमानित बाजार कीमत करीब 1.18 करोड़ से 1.35 करोड़ रुपये बैठती है. हालांकि वास्तविक सरकारी नुकसान का आकलन संबंधित विभाग की जांच और निर्धारित दरों के आधार पर ही किया जा सकेगा.
झारखंड में नदियों से अवैध बालू खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. ऐसे में सरकारी निगम के स्टॉक यार्ड से बालू गायब होने का मामला निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.
थाना प्रभारी ने जानकारी लेकर बताने की बात कही
मामले में पेटरवार थाना प्रभारी से प्राथमिकी और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगी गई. उन्होंने पहले मामले की जानकारी लेकर बताने की बात कही. दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी. इस कारण पुलिस की वर्तमान कार्रवाई और जांच की स्थिति की पुष्टि नहीं हो सकी.
अब सवाल है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच कहां तक पहुंची, बालू की कथित चोरी में कौन लोग शामिल हैं और सरकारी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं. इन सवालों का जवाब पुलिस और खनन विभाग की जांच से ही सामने आएगा.
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