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'PM केयर से झारखंड को मिले 574 में अधिकतर वेंटिलेटर इंस्टॉल हुए ही नहीं'

  • बाबूलाल मरांडी ने कहा- सिर्फ साधारण कोविड बेड वाले अस्थायी सेंटर्स बनाए जा रहे
  • अभी साधारण नहीं ऑक्सीजन और वेंटिलेटर युक्त बेड की है ज्यादा जरूरत

Ranchi: पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि पीएम केयर फंड से झारखंड को मिले 574 में अधिकतर वेंटिलेटर इंस्टॉल हुए ही नहीं है. उन्होंने कहा कि विपदा की यह घड़ी टीका टिप्पणी के लिए नहीं है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में काम करने के चलते जो भी बातें सामने आ रही हैं. उसे राज्य हित में मुख्यमंत्री के संज्ञान में उनकी नैतिक जिम्मेदारी है. इसलिए मुख्यमंत्री थोड़ा समय निकाल इस पर गौर करेंगे. मरांडी ने कहा कि पीएम केयर से झारखंड को कोरोना काल में 574 वेंटिलेटर मिलने और उसका वितरण कर दिये जाने की जानकारी है. कहने के लिए इनमें से अधिकतर का इंस्टॉलेशन भी दिखला दिया गया है, लेकिन वास्तव में यह दिखावे का कागजी आंकड़ा है.

या तो इंस्टॉल नहीं हुए, हुए भी तो उपयोग नहीं हो रहे वेंटिलेटर

मरांडी ने कहा कि इनमें से इक्का-दुक्का नामचीन जगहों को छोड़कर अधिकतर जगहों पर या तो वास्तव में वेंटिलेटर इंस्टॉल हुए नहीं और अगर कहीं हुए भी तो विभिन्न तकनीकी कारणों से उपयोग में नहीं लाये जा सके. उन्होंने कहा कि खबरें आ रही हैं कि बड़े पैमाने पर कोविड बेड वाले अस्थायी सेंटर्स बनाये जा रहे हैं, यह अच्छी बात है. होनी भी चाहिए, लेकिन फिर क्या कारण है कि लोग अस्पतालों में जगह के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं और घरों में लाइलाज तड़प-तड़प कर मर रहे हैं?

मुख्यमंत्री को करनी चाहिए जीवन रक्षक बेड की चिंता

बाबूलाल ने कहा कि कोरोना का जानलेवा कहर जिस रूप में आया है, उसमें नम्बर गिनाकर वाहवाही लूटने वाले साधारण कोविड बेड वाले सेंटर्स की नहीं बल्कि आईसीयू, वेंटिलेटर वाले सुविधा युक्त बेड्स की जरूरत है. इसकी कमी के चलते अफ़रा-तफ़री मची हुई है. ऐसे में प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि आईसीयू और वेंटिलेटर वाले बेड्स को बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जाए न कि घूम-घूम कर ऑक्सीजन रिफिल केंद्र का मुआयना करने की. यह काम औरों को करने दीजिये और आप जीवन रक्षक बेड की चिंता करिये.

वेंटिलेटर को शोभा की वस्तु न बनने दें

उन्होंने कहा कि राजधानी रांची में रिम्स, सदर अस्पताल के साथ जो चार-पांच प्रमुख प्राइवेट अस्पताल हैं, जहां कम से कम समय में जीवन रक्षक बेड युक्त सुविधा बनाकर लोगों को दिलायी जा सकती है, इस काम पर फोकस किया जाना चाहिए. बेकार पड़े वेंटिलेटर जो वैसे जगहों पर अभी चलवाये ही नहीं जा सकते, उन्हें शोभा की वस्तु बनवाने के बजाय ऐसी जगहों पर भेजे जायें, जहां उसे उपयोगी बनाया जा सके.

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