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PMKVY योजना में प्रशिक्षित 59% युवाओं को रोजगार ही नहीं मिला

  • योजना के तहत प्रशिक्षित 34 लाख युवाओं को रिवार्ड मनी भी नहीं मिला.
  • योजना को चलाने वाले 20 अलग-अलग मंत्रालयों में तालमेल की कमी.

Ranchi : प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत देश भर में प्रशिक्षित 59% युवाओं को रोजगार नहीं मिला. जिन 41% प्रशिक्षित (Certified) युवाओं को रोजगार मिलने का दावा किया गया उसमें भी कई कमियां पायी गयी है. योजना के तहत प्रशिक्षित 34 लाख युवाओं को रिवार्ड मनी नहीं मिला है. भारत के नियंत्र महालेखा परीक्षक(CAG) ने कौशन विकास योजना के तीनों चरणों का ऑडिट के बाद अपनी रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया है.

 

CAG ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आंकड़ों के विश्लेषण से इस बात की जानकारी मिली कि Short Term Training (STT) और Special Project के तहत कुल 56.14 लाख युवाओं को प्रशिक्षित कर प्रमाण पत्र दिया गया था. इसमें से सिर्फ 23.18 लाख को 35 क्षेत्रों में रोजगार मिल सका है. शेष 59% प्रतिशत को रोजगार नहीं मिला है. जिन 23.18 लाख लोगों को रोजगार मिला है उसमें से सबसे ज्यादा 13.46 लाख युवाओं को पांच प्रमुख क्षेत्रों में रोजगार मिला है. इसमें Apparel, Electronics, Retail, Logistic और Beauty and Wellness का क्षेत्र शामिल है.

 

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाण पत्र पाने वालों (Certified) के लिये निर्धारित रिवार्ड की राशि भी पूरी नहीं मिल सकी है. CAG की रिपोर्ट के अनुसार दूसरे और तीसरे चरण में प्रशिक्षण पूरा करने वाले 34 लाख युवाओं को अब तक उनके रिवार्ड की राशि का भुगतान नहीं किया गया है. 

 

PMKVY में प्रशिक्षण पूरा कर प्रमाण पत्र पाने वाली सभी उम्मीदवारों के इनाम के रूप में 500 रुपये का भुगतान करना था. हालांकि महिला उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त राशि की व्यवस्था की गयी थी. इसके तहत घर से बाहर ट्रेनिंग लेने के लिए यात्र खर्च के रूप में 1000-1500 रुपये प्रति माह और प्लेसमेंट के बाद मदद के लिेए 1500 रुपये की दर से अधिकतम तीन महीने तक भुगतान करना था. 

 

 

ट्रेनिंग सेंटर जिले से बाहर रहने की स्थिति में ट्रेनिंग पार्टनर्स के लिए रहने और खाने का खर्च भी दिया जाना था. सरकार द्वारा राशि के लिए की गयी इस व्यवस्था के तहत Recognition of Prior Learning (RPL) पर औसत 2200 रुपये और Short Term Training(STT) पर औसत 8000 रुपये के खर्च का अनुमान है. लेकिन गलत और अधूरे बैंक अकाउंट नंबर की वजह से पहले चरण का 40 करोड़ DBT के माध्यम से ट्रांसफर नहीं हो सका. दूसरे और तीसरे चरण के 34 लाख उम्मीदवारों को भुगतान भी नहीं हो सका.

 

CAG की रिपोर्ट में ऑडिट के बाद इस बात का उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को लागू करने के लिए 20 मंत्रालय और विभाग अलग-अलग तरह के कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे थे. लेकिन इनमें तालमेल की कमी पायी गयी. रिपोर्ट योजना के ऑडिट के दौरान पायी गयी मुख्य कमियां निम्म लिखित हैं.

 

ऐसे फेल हुई योजना

लंबे समय की रणनीति की कमी प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को बगैर किसी रणनीति के अलग-अलग चरणो में लागू किया गया. जिन क्षेत्रों में स्किल की जरूरतों की पहचान की गयी, प्रशिक्षण कार्यक्रम उन जरूरतों के अनुरूप नहीं था.
लाभुकों की पहचान का ठोस तरीका नहीं बेरोजगार युवाओं, स्कूल से ड्रॉप आउट युवाओं को ट्रेनिंग देकर स्किल करने का लक्ष्य तो निर्धारित था. लेकिन बेरोजगार और ड्रॉप आउट युवाओं की पहचान और उन्हें सत्यापित करने का कोई ठोस तरीका नहीं था. ट्रेनर, मूल्यांकन करने वाले और लाभुकों की डिजिटल पहचान या संपर्क डिटेल रिकार्ड करने के लिए कोई डेटा रिटेंशन पॉलिसी नहीं थी.
बिना योग्यता के ट्रेनिंग के लिए नामांकन ट्रेनिंग के लिए उम्मीदवारों का नामांकन बिना किसी योग्यता के किया गया था. इसमें उम्र, शिक्षा और कार्य अनुभव का ध्यान नही रखा गया था. Short Term ट्रेनिंग के बाद जिन्हें स्किल होने का प्रमाण पत्र दिया गया उनमें से सिर्फ 41 प्रतिशत को ही नौकरी दिलाने का दावा किया गया था. इसमें भी कुछ ट्रेनिंग पार्टन द्वारा नौकरी दिलाने के दावों में अनियमितता पायी गयी.
वित्तीय अनियमितता ऑडिट में केंद्रीय स्तर पर गलत वित्तीय अनुमान और कमजोर वित्तीय नियंत्रण पाया गया. योजना का फंड ट्रांसफर करने में देर हुई. National Skill Development Corporation के खाता-बही में गलत आकाउंटिंग, ज्यादा क्लेम आदि के मामले पाये गये.

 

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