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धनबाद की 65 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार

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Dhanbad : धनबाद (Dhanbad)">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=315290&action=edit">(Dhanbad)

जिले की करीब 65 प्रतिशत महिलाएं खून की कमी यानी एनीमिया की शिकार हैं. NFHS (नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे)-5  की हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, धनबाद में छह महीने से लेकर 5 वर्ष तक के 66.5 प्रतिशत बच्चे एनीमिया पीड़ि‍त हैं. वहीं, 64.6 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी की शिकायत है. हालांकि सर्वे रिपोर्ट बताती है कि बीते पांच वर्षों में एनीमिया पीड़ित बच्चों में 3.4 प्रतिशत की कमी आई है. वर्ष 2015-16 में एनएफएचएस-4 सर्वे में 69.9 प्रतिशत बच्चे एनीमिक पाए गये थे,  जबकि ताजा सर्वे में 66.5 प्रतिशत बच्चों में यह शिकायत पाई गई है. 20 से 29 वर्ष की युवति‍यों में एनीमिया की शिकायत सबसे ज्यादा है. एनएफएचएस-4 में जिले में एनीमिया पीड़ित महिलाओं की तादाद 63.6 फीसदी थी, जो ताजा सर्वे यानी एनएफएचएस-5 में बढ़कर 64.6 फीसदी हो गई है. इनीमिया की सबसे बड़ी वजह कुपोषण है. खानपान व पौष्‍टि‍क आहार सही नहीं होने के कारण महिलाएं ज्‍यादा प्रभावित हैं.

5 साल में किशोरियों में एनीमिया 8 प्रतिशत बढ़ा

जिले में 15 से 18 साल की किशोरियों में एनीमिया के मामलों में आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. एनएफएचएस-4 में इस आयु वर्ग की 61.7 प्रतिशत किशोरियां एनीमिक थीं. एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 69.9 प्रतिशत पर पहुंच गया है. सर्वे रिपोर्ट बताती है कि‍ एनीमिक महिलाओं के मामले में धनबाद की स्थिति काफी खराब है. महिलाओं के एनीमिक होने का असर अन्य स्वास्थ्य सूचकांकों में भी दिखता है. प्रसव के दौरान मृत्यु,  कुपोषण,  मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की स्थिति में गिरावट जैसे परिणाम साफ दिखते हैं.

महिलाएं भोजन में प्रोटीन व विटामिन सी पर्याप्‍त लें

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alt="" width="300" height="205" /> धनबाद के सिविल सर्जन डॉ. श्याम किशोर कांत के अनुसार, एनीमिया मुख्य तौर पर शरीर में आयरन की कमी की वजह से होता है. इसकी अन्य वजहें भी हो सकती हैं, मसलन लगातार खून बहना, फॉलिक एसिड,  प्रोटीन, विटामिन सी और बी 12 की कमी से भी ऐसा हो सकता है. उन्‍होंने महिलाओं को भोजन में प्रोटीन व विटामिन सी वाले पदार्थ  पर्याप्‍त मात्रा में लेने की सलाह दी.

जन्म के 6 महीने बाद बच्‍चों को पौष्टिक आहार दें

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नित्यानंद कुमार ने बताया कि शिशुओं में कुपोषण की सबसे बड़ी वजह उन्हें पूरक आहार नहीं मिलना है. जन्म के छह महीने की आयु पूरी करने के बाद बच्चों को पूरक आहार देना चाहिए.

राज्‍य में 10388 पोषण सखियों की सेवा समाप्त

ज्ञात हो कि कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ राज्य सरकार ने पिछले साल से एक हजार दिनों का महाअभियान शुरू किया था. केंद्र प्रायोजित समेकित बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत झारखंड में बहाल 10,388 पोषण सखियों की सेवा बीते एक अप्रैल से समाप्त कर दी गई है. केंद्र के निर्देश पर वर्ष 2015 में राज्य के छह जिले धनबाद, गिरिडीह, दुमका, गोड्डा, कोडरमा और चतरा में अतिरिक्त आंगनबाड़ी सेविका सह पोषण परामर्शी के रूप में इन पोषण सखियों की नियुक्ति हुई थी. यह भी पढ़ें : धनबाद">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=316556&action=edit">धनबाद

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