LagatarDesk : नेपाल, तिब्बत, बांग्लादेश और भारत में आज सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किये गये. भूकंप का केंद्र तिब्बत-नेपाल की सीमा पर था. यहां रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.1 तीव्रता था. चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के मुताबिक, भूकंप की गहराई नेपाल के लोबुचे के करीब 10 किलोमीटर थी. इस शक्तिशाली भूकंप से तिब्बत में भारी जानमाल का नुकसान हुआ है. तिब्बत में भूकंप से अब तक 95 लोगों की मौत होने की खबर है. जबकि 130 लोग घायल भी हुए हैं. हालांकि अभी घायलों और मरने वालों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है.
https://twitter.com/PTI_News/status/1876474164921463020 नेपाल में आये भूकंप से उत्तर भारत में भी हिली धरती
बता दें कि नेपाल-तिब्बत में सुबह करीब 6:52 बजे भूकंप आया. नेपाल के काठमांडू, धाडिंग, सिंधुपालचौक, कावरे, मकवानपुर और कई अन्य जिलों में भूकंप के झटके महसूस किये गये. वहीं उत्तर भारत के भी कई शहरों में भूकंप के झटके महसूस किये गये. हालांकि भारत से अभी किसी हताहत की खबर नहीं है. जब भूकंप आया तो अधिकांश लोग नींद में थे. जो लोग जगे थे, उनमें से कई लोग घरों से बाहर निकल गये थे.
2015 में नेपाल में आया था विनाशकारी भूकंप
बता दें कि नेपाल में आये दिन भूकंप के झटके महसूस किये जाते हैं. इसका असर दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी देखने को मिलता है. नेपाल में 25 अप्रैल 2015 को विनाशकारी भूकंप आया था. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.8 मापी गयी थी. इस भूकंप में नेपाल में भारी तबाही मची थी. भूकंप के कारम 9,000 लोग मारे गये थे. जबकि 22,000 लोग घायल हुए थे. इसने 800,000 से अधिक घरों और स्कूल भवनों को नुकसान पहुंचा था. इससे पहले नेपाल में 1932 में विनाशकारी भूकंप आया था.
भूकंप की तीव्रता और उसके संभावित प्रभाव
0 से 1.9 रिक्टर स्केल : इस स्तर पर भूकंप केवल सीस्मोग्राफ द्वारा मापा जा सकता है; इसे महसूस नहीं किया जाता है
. 2 से 2.9 रिक्टर स्केल : यहां हल्का कंपन होता है, जिसे कुछ लोग महसूस कर सकते हैं, लेकिन यह सामान्यतः अप्रभावित रहता है
. 3 से 3.9 रिक्टर स्केल : इस तीव्रता पर ऐसा महसूस होता है जैसे कोई भारी वाहन आपके पास से गुजर रहा हो
. 4 से 4.9 रिक्टर स्केल : इस स्तर पर दीवारों पर टंगे फ्रेम गिरने की संभावना होती है
. 5 से 5.9 रिक्टर स्केल : इस तीव्रता पर फर्नीचर हिल सकता है, और कुछ हल्की वस्तुएं गिर सकती हैं
. 6 से 6.9 रिक्टर स्केल : इस स्तर पर इमारतों की नींव में दरारें आ सकती हैं और ऊपरी मंजिलों को नुकसान पहुंच सकता है
. 7 से 7.9 रिक्टर स्केल : इस तीव्रता पर इमारतें गिर सकती हैं और जमीन के अंदर के पाइप फट सकते हैं
. 8 से 8.9 रिक्टर स्केल : इस स्तर पर इमारतों और बड़े पुलों का गिरना संभव है
. 9 और उससे अधिक रिक्टर स्केल : इस तीव्रता पर पूरी तबाही मच सकती है। यदि कोई व्यक्ति मैदान में खड़ा है, तो उसे धरती के लहराते हुए होने का अनुभव होगा
. यदि समुद्र निकट है, तो सुनामी की संभावना होती है
. ध्यान दें कि रिक्टर पैमाने पर हर वृद्धि पिछले स्केल की तुलना में 10 गुना अधिक ताकतवर होती है.
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