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फैमिली कोर्ट में चार माह में पारिवारिक विवाद के आए 72 मामले, 21 परिवारों का फिर से बसा घर

Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग जिले के फैमिली कोर्ट में चार माह के दौरान पारिवारिक विवाद के 72 मामले आए. इनमें 21 मामले का निष्पादन कर दिया गया. हालांकि 51 मामले अब भी लंबित हैं. इसके पीछे की वजह दंपती का आपसी विवाद है. किसी केस में पति समझौते के लिए राजी होते हैं, लेकिन पत्नी नहीं और कहीं पत्नी सुलहनामे के लिए तैयार है, तो पति समझौता नहीं करना चाहता. हालांकि इन पारिवारिक विवादों के बीच फैमिली कोर्ट के प्रयास से वर्षों से उजड़े 21 परिवार के घर बस गए. फैमिली कोर्ट की ओर से दंपती की काउंसिलिंग कर उनके खराब हुए रिश्तों को फिर से बेहतर करने का मौका दिया गया. दंपती ने इसे समझा और आगे रिश्तों को सहेजने का संकल्प लेकर लौटे. जिला विधिक सेवा पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जनवरी से अप्रैल तक कुल 72 परिवारिक विवाद के मामले आए. इनमें 21 मामले का निष्पादन किया गया. इनमें पारिवारिक विवाद की वजह से कई लोगों के घर उजड़ चुके थे. लेकिन फैमिली कोर्ट की बदौलत उनके घर फिर से बस गए.

जिला विधिक सेवा प्राधिकार में है 10 सदस्यीय टीम

जिला विधिक सेवा प्राधिकार में 10 सदस्यीय टीम है. इसमें पांच अधिवक्ता और पांच मेडिएटर शामिल हैं. यह जानकारी देते हुए टीम के मो. मोअज्जम ने बताया कि फिलहाल 51 लंबित मामलों के निष्पादन पर काम किया जा रहा है. लंबित मामलों में किसी केस में पति समझौते के लिए राजी होते हैं, लेकिन पत्नी नहीं और कहीं पत्नी सुलहनामे के लिए तैयार है, तो पति समझौता नहीं करना चाहता.

फैमिली कोर्ट में रिश्तों के बिखराव को बचाने का हर संभव प्रयास किया जाता है : सचिव

[caption id="attachment_630838" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/gaurav-khurana_453-1-1-150x150.jpg"

alt="गौरव खुराना" width="150" height="150" /> गौरव खुराना[/caption] फैमिली कोर्ट स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव गौरव खुराना ने बताया कि पारिवारिक विवाद के मामले आते रहते हैं. इसके लिए पूरी मेहनत करनी पड़ती है. काउंसिलिंग में दंपती को संतुष्ट करना आसान नहीं होता है. फैमिली कोर्ट में रिश्तों के बिखराव को बचाने का हर संभव प्रयास किया जाता है.

फैमिली कोर्ट में काउंसलिंग के बाद दंपती का बसा घर

केस-1 : छड़वा डैम निवासी किशोर दास का पत्नी सुनीता देवी के साथ 2022 से विवाद चल रहा था. पत्नी मायके चली गई थी. वह ससुराल नहीं जाना चाहती थी. पति का कहना था कि वह पत्नी को राजी खुशी से घर ले जाना चाहता है. फैमिली कोर्ट में दंपती की काउंसिलिंग की गई और फिर पति-पत्नी आगे बेहतर जिंदगी बसर करने का संकल्प लिया. कोर्ट से ही पत्नी सुनीता देवी पति किशोर दास के साथ ससुराल चली गई. केस-2 : बड़कागांव निवासी सोनी कुमारी उर्फ सोनी सिंह ने 2019 में पति अनुज सिंह पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था. पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था. उसके बाद उसके पति अनिरुद्ध सिंह को भी कोर्ट में बुलाया गया. काफी दिनों तक दंपती की काउंसिलिंग की गई. आखिरकार इसी माह दोनों राजी खुशी से फिर से साथ-साथ घर बसाने को राजी हो गए.

किस माह में आए कितने परिवारिक विवाद के मामले

जनवरी में 29 पारिवारिक विवाद के मामले सामने आए. फरवरी में 18 मामलों में 10 का निबटारा किया गया. वहीं मार्च में 13 में दो का सुलहनामा कराया गया. अप्रैल में 12 मामला आए, जिसमें से छह लोगों के पारिवारिक विवाद का निष्पादन किया गया. [wpse_comments_template]

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