Ranchi: झारखंड के 75 प्रतिशत आदिवासी बहुल गांवों में नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है. केंद्र सरकार द्वारा संचालित जल जीवन मिशन योजना के तहत अदिवासी बहुल गांवों में हर घर को नल से पेयजल की सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. साथ ही आदिवासी बहुल गांव में नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को विशेष नाम दिया गया था. इसे धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के नाम से जाना जाता है.
योजना से संबंधित सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 7107 आदिवासी बहुल गांव हैं. इसमें से अब तक सिर्फ 1804 गांवों में नेल से पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायी जा सकी है. जिन जिलों में आदिवासी बहुल गांव की संख्या ज्यादा है, उन जिलों में योजना की स्थिति बेहतर नहीं है. इन जिलों में राजधानी रांची के अलावा गुमला, दुमका, पूर्वि सिंहभूम, साहेबगंज, गोड्डा और पाकुड़ का नाम शामिल है.
राजधानी रांची के आदिवासी बहुल गांवों से सिर्फ 13% में ही यह सुविधा उपलब्ध है. गुमला में 31.98% और पूर्वी सिंहभूम के 5% प्रतिशत आदिवासी बहुल गांव में नल से पेयजल की सुविधा उपलब्ध है. पाकुड़ में यह सुविधा एक प्रतिशत गांव में भी नहीं है. इस जिले में आदिवासी बहुल 235 गांव हैं. लेकिन नल से शुद्ध पेयजल की सुविधा सिर्फ दो गांव में ही उपलब्ध करायी जा सकी है. सरकार ने जिन 1804 गांवों में नल से पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया है, उसमें से सिर्फ 831 गांव के लोग ही योजना से पूरी तरह संतुष्ट है. साहेबगंज के आदिवासी बहुल गावों में से सिर्फ 1.27% गांव में ही नल से पेयजल की सुविधा उपलब्ध है. लेकिन इसमें से एक भी गांव इस सुविधा से संतुष्ट नहीं है.
आदिवासी बहुल गांव में योजना की स्थिति
| जिला | गांव | सुविधा |
| पश्चिमी सिंहभूम | 925 | 337 |
| सिमडेगा | 292 | 216 |
| गुमला | 616 | 197 |
| दुमका | 685 | 188 |
| सरायकेला | 489 | 140 |
| लातेहार | 267 | 136 |
| खूंटी | 403 | 124 |
| गिरिडीह | 142 | 71 |
| रांची | 545 | 71 |
| लोहरदगा | 205 | 69 |
| जामताड़ा | 282 | 44 |
| रामगढ़ | 91 | 37 |
| पलामू | 90 | 36 |
| धनबाद | 196 | 27 |
| देवघर | 264 | 20 |
| बोकारो | 124 | 19 |
| पूर्वी सिंहभूम | 398 | 19 |
| गढ़वा | 113 | 19 |
| हजारीबाग | 76 | 14 |
| गोड्डा | 240 | 10 |
| चतरा | 18 | 04 |
| साहेबगंज | 235 | 03 |
| पाकुड़ | 399 | 02 |
| कोडरमा | 12 | 01 |
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