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स्वास्थ्य व साइकिल वितरण योजना का 83 करोड़ पड़ा है अफसरों के खाते में

Ranchi News: राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों के लिए साइकिल वितरण योजना चलाती है. इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल आने जाने की सुविधा उपलब्ध कराना और ड्रॉप आउट रेट को कम करना है. इस योजना का लाभ क्लास 1-8 तक के छात्रों को दिया जाता है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के अलावा कल्याण विभाग द्वारा भी साइकिल वितरण योजना चलाया जाता है.
 

Ranchi News: स्कूली बच्चों के बीच साइकिल वितरण और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का 83 करोड़ रुपये तीन से चार साल से अफसरों के खाते में पड़ा है. इसमें से 10.57 करोड़ रुपये साइकिल वितरण योजना और 73.09 करोड़ रुपये स्वास्थ्य की योजनाओं से संबंधित है. स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के खाते में पड़ी राशि 15वें वित्त आयोग की है. वित्त आयोग की अनुशंसित राशि में से सबसे ज्यादा राशि रांची सिविल सर्जन के खाते में पड़ी है. जबकि हजारीबाग ने ऑडिट टीम को दस्तावेज ही नहीं दिया.


राज्य सरकार द्वारा स्कूली बच्चों के लिए साइकिल वितरण योजना चलाती है. इसका उद्देश्य बच्चों को स्कूल आने-जाने की सुविधा उपलब्ध कराना और ड्रॉप आउट रेट को कम करना है. इस योजना का लाभ क्लास 1-8 तक के छात्रों को दिया जाता है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के अलावा कल्याण विभाग द्वारा भी साइकिल वितरण योजना चलाया जाता है. 


कल्याण विभाग द्वारा चलाई जाने वाली साइकिल वितरण योजना का लाभ ST, SC और OBC छात्रों को दिया जाता है.

 

महालेखाकार ने कल्याण विभाग द्वारा चलायी जा रही इस योजना की जांच में पाया कि राज्य के चार जिला कल्याण पदाधिकारियों के खाते में साइकिल वितरण योजना का 10.57 करोड़ रुपये पड़ा हुआ है. ये राशि वर्ष 2020-2023 तक के अवधि की है.

 

महालेखाकार ने जांच में पाया कि सरकार ने इन वित्तीय वर्षों में साइकिल खरीदकर बच्चों को देने के बदले छात्रों के खाते में साइकिल का पैसा ट्रांसफर करना था. 

 

उल्लेखनीय है कि सरकार ने छात्रों के खातों में DBT के सहारे प्रति छात्र साइकिल के लिए 4500 रुपये ट्रांसफर करने का फैसला किया था. इसके लिए छात्रों से सभी प्रकार के आवश्यक ब्योरे लिये गये. इसके बाद इन चार जिलों के छात्रों को कुल 48.95 करोड़ ट्रांसफर करने की प्रक्रिया अपनायी गयी. लेकिन इसमें से 10.58 करोड़ रुपये बच्चों के खातों में ट्रांसफर नहीं हुआ. यह राशि अब भी जिला कल्याण पदाधिकारियों के खाते में पड़ी हुई है. इसमें से 5.4 करोड़ रुपये जिला कल्याण पदाधिकारी खूंटी,  1.24 करोड़ रुपये सरायकेला,  87.7करोड़ रुपये गढ़वा और 0.02 करोड़ रुपये साहेबगंज जिला कल्याण पदाधिकारी के खाते में पड़ा है.

 

जानकारी के अनुसार महालेखाकार ने 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में स्वास्थ्य के क्षेत्र में मिली राशि की उपयोगिता की जांच की. इसमें रांची सहित सात जिलों के सिविल सर्जनों के खाते में कुल 73.09 करोड़ रुपये पड़ा हुआ पाया गया. यह राशि 2021-22 से 2024-25 तक की अवधि के हैं.

 

जिन सिविल सर्जनों के खाते में 15वें वित्त आयोग की अनुशंसित राशि पड़ी है. उसमें- रांची, बोकारो, गुमला, सरायकेला, जमशेदपुर, खूंटी और धनबाद का नाम शामिल है. 15वें वित्त आयोग की पड़ी इस राशि में सबसे ज्यादा राशि रांची के सिविल सर्जन के खाते में है. इस मामले में दूसरा नंबर जमशेदपुर और तीसरा नंबर धनबाद के सिविल सर्जन का है.

 

सिविल सर्जनों के खाते में बेकार पड़ी राशि का ब्योरा(करोड़ में)

सिविल सर्जन कुल राशि खर्च बेकार पड़ी राशि
रांची 24.66  6.52 18.14
बोकारो 13.37 2.03 11.34
 गुमला  9.85 6.40 3.45 
सरायकेला 9.06 0.00 9.06
जमशेदपुर 17.49 2.89 14.60
खूंटी  5.27 1.80 3.47
धनबाद  16.01 2.98 13.03

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