Search

 
 
 

टूटता रुपया और कर्ज लेकर बैसाखी लगाती सरकार

महंगा तेल, अमेरिकी बाजार में ऊंचा ब्याज और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी रुपये पर लगातार दबाव डाल रहे हैं. तेल खरीदने के लिए डॉलर चाहिए और विदेशी निवेशक अपना पैसा वापस ले जाते हैं तो उसके लिए भी डॉलर चाहिए.
 
टिप्पणी

Sheetal P Singh

भारत को डॉलर के मुकाबले रुपये को संभालना लगातार महंगा पड़ रहा है. जब देश में आने वाले डॉलर से ज्यादा मांग बाहर भुगतान करने और पैसा निकालकर ले जाने के लिए हो, तो रुपये पर दबाव बढ़ता है. रिजर्व बैंक लगातार अपने भंडार से डॉलर देकर इस दबाव को कम करने की कोशिश करता है.

 

चिंता की बात यह है कि सरकार और रिजर्व बैंक की विशेष व्यवस्थाओं से जुटाए गए 140 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा में से करीब आधी रकम रुपये को सहारा देने और बैंकों में रुपये की अतिरिक्त उपलब्धता घटाने की कवायद में इस्तेमाल हो चुकी है. बैंकरों और अर्थशास्त्रियों का अनुमान इसे 75 से 80 अरब डॉलर के बीच रखता है.

 

यह पैसा मुख्यतः विदेशी मुद्रा में जमा और विदेश से उधारी आकर्षित करके जुटाया गया था. यानी आज उपलब्ध हुए इन डॉलरों के साथ भविष्य में इन्हें लौटाने की जिम्मेदारी भी जुड़ी है.

 

महंगा तेल, अमेरिकी बाजार में ऊंचा ब्याज और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी रुपये पर लगातार दबाव डाल रहे हैं. तेल खरीदने के लिए डॉलर चाहिए और विदेशी निवेशक अपना पैसा वापस ले जाते हैं तो उसके लिए भी डॉलर चाहिए.

 

रुपये को अचानक गिरने से बचाना जरूरी है. कमजोर रुपया तेल, मशीनों, विदेश में पढ़ाई और तमाम आयातों को महंगा करता है. इसका बोझ आखिरकार आम लोगों और कारोबार पर आता है.

 

लेकिन डॉलर जुटाकर बाजार में देते रहना स्थायी समाधान नहीं हो सकता. टिकाऊ राहत के लिए निर्यात से कमाई बढ़ानी होगी, जरूरी आयातों पर निर्भरता घटानी होगी और लंबे समय का निवेश आकर्षित करना होगा.

 

सवाल यह है कि इतनी बड़ी विदेशी मुद्रा व्यवस्था के बावजूद रुपये को बार-बार सहारे की जरूरत क्यों पड़ रही है? और इस दबाव को कम करने की सरकार की दीर्घकालीन आर्थिक योजना क्या है? फिलहाल तो मोदी सरकार के पास इसका कोई माक़ूल जवाब दिखाई नहीं देता!

 

डिस्क्लेमरः लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. यह टिप्पणी उनके सोशल मीडिया एकाउंट से साभार लिया गया है.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही