विश्व का कल्याण की बात सोचना ही भारतीय संस्कृति है
श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के चौथे दिन बुधवार की रात अंतरराष्ट्रीय धर्म सम्मेलन सह विद्वत संगोष्ठी में लगभग दो सौ से अधिक संतो ने भाग लिया. सम्मेलन में मानव धर्म, संस्कृति और राष्ट्र विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई. संतों ने कहा कि धर्म रक्षक है यदि धर्म के साथ खिलवाड़ किए तो धर्म भक्षक बन जाता है. सेवा से बढ़कर दूसरा कोई बड़ा धर्म नहीं है. हनुमान जी ने सेवा की तभी उन्हें सिद्धी मिली. अपने के अलावा पूरे विश्व की कल्याण की बात सोचना ही भारतीय संस्कृति है. भारतीय सभ्यता, संस्कृति, वैदिक सनातन धर्म के संरक्षण से राष्ट्र का कल्याण हो सकता है. सोने की लंका में संतों का संरक्षण नहीं हुआ उसका क्या हश्र हुआ आप सभी जानते हैं. भारत एक ऐसा देश है जहां मानव की बात कौन करें पशु पक्षी भी अपने धर्म के निर्वहन करने में अपने जान बाजी लगा दी.भारतीय संस्कृति में महिलाओं की सुरक्षा करना धर्म है
संतों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं की सुरक्षा करना धर्म है. इसी के तहत रावण द्वारा जब सीता का अपहरण किया गया था उस समय गिद्ध राज जटायु ने अपना धर्म निभाते हुए जान पर बाजी लगा दी. संतो ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार अपना आचरण करें यही संस्कार है. सभा को जगद्गुरु अयोध्या नाथ स्वामी जी त्रिवेंद्रमदि देव समाधि स्थल मंदिर बक्सर बिहार, पीठाधीश्वर हरिद्वार जगतगुरु बैकुंठ नाथ स्वामी जी, वृंदावन से जगतगुरु चतुर्भुज स्वामी जी, जगतगुरु मुक्तिनाथ स्वामी जी काशी, श्री रंगनाथ स्वामी जी झारखंड, पीठाधीश्वर जगतगुरु गोविंदाचार्य स्वामी जी, जगतगुरु पुंडरीक जी काशी, जगतगुरु गिरधर शास्त्री जी महाराज सहित दर्जनों विद्वान आचार्य आदि ने सभा को संबोधित किया. इसे भी पढ़ें - भाजपा">https://lagatar.in/bjp-was-losing-milkipur-in-its-internal-survey-hence-elections-were-postponed-akhilesh-yadav/">भाजपाअपने आंतरिक सर्वे में मिल्कीपुर हार रही थी, इस कारण टले चुनाव : अखिलेश यादव [wpse_comments_template]
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