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सरना धर्म कोड न होना मूल आदिवासियों के लिए दुर्भाग्य की बात : दुर्गा कच्छप

 
Khunti : खूंटी सरना धर्म सोतो समिति, बिरबंकी के तत्वावधान में रविवार को सरना धर्म महासम्मेलन हुआ. धिरजु मुंडा, बुधराम सिंह मुंडा व विनय पहान की अगुवाई में अनुयायियों पूजा-पाठ कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की. समारोह में मुख्य अथिति अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के उपाध्यक्ष दुर्गा कच्छप और विशिष्ट अथिति बिरसा मुंडा के परपोता सुखराम मुंडा रहे. सुखराम मुंडा ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा ने जिस समृद्ध समाज की कल्पना की. वह आज भी अधूरी है. दुर्गा कच्छप ने कहा कि सरना विश्व का सबसे पुराना धर्म है. जो प्रकृति आधारित है. परंतु जनगणना परिपत्र में सरना धर्म कोड न होना मूल आदिवासियों के लिए दुर्भाग्य की बात है. सरना धर्म कोड आवंटित न करके आजाद भारत में आदिवासियों को धार्मिक गुलामी और धर्मांतरण के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है. आजाद भारत में धर्म कोड आवंटित था. परंतु बाद में उसे हटा देना मूल आदिवासियों के लिए असहाय पीड़ा बन गयी है.

सरना धर्मावलंबी शामिल थे

कार्यक्रम में धर्मगुर बगरय मुंडा, मधु बारला, जावरा पहान, प्रदीप समद, दीत मुंडा, मथुरा कंडीर, मुखिया स्वेता बाखला, शोभा मुंडा, सुखलाल मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, रमन टुटी, सोमा हेंबरोम, बलराम हेंबरोम आदि ने विचार रखकर सरना धर्मावलंबियों को अनुग्रहित किए. इस समारोह में खूंटी, मुरहू, बंदगांव, अड़की, कोचांग, बिरबंकी तथा आस-पास के गांवों के सरना धर्मावलंबी शामिल थे. इसे भी पढ़ें – ठाकुर">https://lagatar.in/martyrs-week-begins-with-tribute-to-thakur-vishwanath-sahdev/">ठाकुर

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