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नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह के छह ठिकाने पर एसीबी की छापेमारी शुरु

Ranchi : जेल में बंद आइएएस विनय चौबे के करीबी व नेक्सजेन ऑटोमोबाइल के मालिक विनय सिंह के छह ठिकानों पर एसीबी की टीम ने छापेमारी शुरू की है. रविवार की सुबह एसीबी की टीम विनय सिंह के घर, शोरूम समेत छह अन्य ठिकानों पर पहुंचकर छापेमारी कर रही है. एसीबी की यह छापेमारी हजारीबाग में जमीन की अवैध जमाबंदी के मामले की जा रही है. 

 

मालूम हो कि एसीबी ने तीन दिन पहले हजारीबाग में वन भूमि की अवैध जमाबंदी से जुड़े एक मामले में नेक्सजेन ऑटोमोबाइल के मालिक विनय कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी 25 सितंबर की शाम हुई थी. विनय कुमार सिंह पर सरकारी अधिकारियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचकर गैर-मजरूआ खास और जंगल-झाड़ी किस्म की भूमि की अवैध जमाबंदी कराने का आरोप है. इसको लेकर एसीबी हजारीबाग थाना में कांड संख्या- 11/25 दर्ज किया गया है.

 

पांच प्लॉट्स की अवैध जमाबंदी

 
अवैध जमाबंदी का यह मामला 2013 का है, जब डीसी कार्यालय, हजारीबाग ने पांच प्लॉटों की अवैध जमाबंदी को रद्द कर दिया था. इस फैसले को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड सरकार ने भी उसी साल सही ठहराया था. जबकि वन प्रमंडल पदाधिकारी, हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल के पत्र संख्या 2612, पांच दिसंबर 2012 के अनुसार, यह स्पष्ट किया गया था कि अधिसूचित वन भूमि पर किसी भी तरह का गैर-वानिकी कार्य या अतिक्रमण भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन है. इस पत्र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के टी गोदावरमन बनाम भारत सरकार मामले में 12 दिसंबर 1996 के आदेश का भी हवाला दिया गया था. जिसमें जंगल-झाड़ी दर्ज भूमि का गैर-वानिकी उपयोग के लिए भारत सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक बताई गई थी.

 

विनय सिंह व उनकी पत्नी के नाम दाखिल-खारिज

 

हजारीबाग जिला में 'गैर मजरुआ खास किस्म जंगल' प्रकृति की जमीन, जिसे डीम्ड वन की श्रेणी में रखा गया है, उसमें हुए एक बड़े घोटाले का एसीबी की जांच में खुलासा हुआ था. यह जमीन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के तहत संरक्षित वन क्षेत्र श्रेणी में आता है. लेकिन इसे विनय कुमार सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर अवैध रूप से दाखिल-खारिज कर दिया गया. यह तब हुआ, जब विनय चौबे हजारीबाग में डीसी के पद पर पदस्थापित थे. एसीबी की जांच में करोड़ों की इस सरकारी जमीन की बंदरबांट में कथित लाभार्थी विनय कुमार सिंह की मिलीभगत की पुष्टि हुई. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया.

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