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रांची: मिथिला पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर को मनेगी दिवाली

Basant Munda  Ranchi: दिवाली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. इसे बड़े उत्साह के साथ मनायी जाती है. इस बार दिवाली की तारीख 31 अक्टूबर को पड़ रहा है. मिथिला पंचांग के अनुसार 31 अक्टूबर को दिवाली मनाना शुभ रहेगा. चतुर्दशी तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर, गुरुवार को दोपहर 3 बजकर 24 मिनट से शुरू हो रही है. इस वजह से दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी. दिवाली के त्योहार पर अमावस्या तिथि रात में हो रही है. जो 1 नवंबर, 2024 को शाम में नहीं है. 31 अक्टूबर को दोपहर 3:24 बजे अमावस्या लग रही है. इस दिन अमावस्या पूरी रात है. इस दिन लक्ष्मी पूजन के लिए वृषभ और सिंह लग्न का शुभ समय उपलब्ध रहेगा. पंडित नितेश मिश्रा का कहना है कि प्रदोष काल और मध्य रात्रि में अमावस्या होने के कारण दिवाली 31 अक्टूबर 2024 को मनाया जा रहा है. जबकि 1 नवंबर को प्रदोष काल कुछ ही मिनटों का है, क्योंकि इस दिन अमावस्या सूर्यास्त के बाद समाप्त हो जाएगी, जिसके कारण अमावस्या तिथि पर लक्ष्मी पूजन का समय नहीं मिलेगा।

प्रदोषव्यापिनी अमावस्या का है महत्व

दिवाली में रात्रि व्यापिनी अमावस्या का महत्व है. इस बार अमावस्या 31 अक्टूबर की रात को है. मान्यता है कि अमावस्या की रात को माता लक्ष्मी धरती पर आती हैं और भक्तों के घर जाती हैं. 31 अक्टूबर 2024 को दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त पंडित नितेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर को दोपहर 3:24 बजे से एक नवंबर को शाम 5:24 बजे तक रहेगी. दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल और स्थिर लग्न में है. भगवान गणेश, देवी सरस्वती और महाकाली की भी पूजा की जाती है. ये सभी मुहूर्त 31 अक्टूबर को ही मिलेंगे.

अलग-अलग पंचांगों के अनुसार अलग-अलग पंडितों का तर्क

अयोध्या में दिवाली का पर्व एक नवंबर को मनाया जाएगा. जबकि, काशी के पंडितों के मुताबिक दिवाली 31 अक्टूबर को मनाना ही फलदायी रहेगा. साथ ही वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, नाथद्वार श्रीनाथजी मंदिर, तिरुपति देवस्थानम और द्वारकाधीश में भी दिवाली का पर्व 31 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा. उज्जैन के ज्योतिर्विदों के अनुसार, 31 अक्टूबर को अमावस्या प्रदोष काल में ही मनाना सही रहेगा और धनतेरस 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. वहीं दृक पंचांग के अनुसार, लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 1 नवंबर को भी रहेगा और इस दिन ही दीपावली मनाई जाएगी. इसे भी पढ़ें - झारखंड">https://lagatar.in/mayank-singh-of-aman-sahu-gang-active-in-jharkhand-threatened-mp-pappu-yadav-on-social-media/">झारखंड

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