Ranchi : छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के अभियुक्त राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास (CM House) में महीनों तक छिपे हुए थे. इडी की जांच के दौरान राजनीतिज्ञों के बीच शराब से हुई अवैध कमाई बांटने वाले लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल ने यह स्वीकार किया. बंसल के डिजिटल डिवाई मंक दर्ज ब्योरे से इस बात की जानकारी मिली कि उसने राजनीतिकों के बीच शराब की अवैध कमाई में से 100 करोड़ रुपये से अधिक बांटा था.
ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच के दौरान पाया है कि लक्ष्मी नारायण बंसल, प्रबीर शर्मा, निखिल चंद्राकर, मुकेश मिश्रा उर्फ शिवम मिश्रा का काम शराब की बिक्री से हुई अवैध कमाई को उसके हिस्सेदारों तक पहुंचाना. तत्कालीन मुख्यमंत्री भुपेश बघेल का खास दोस्त विजय भाटिया ने अपने इसी राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ओम साईं बिवरेजेज कॉरपोरेशन का 52.50 प्रतिशत लेकर बेनामी मालिक बन बैठा था. जांच में पाया गया कि भाटिया भी CM House में ही छिपा था. इसकी पुष्टि लक्ष्मी नारायण बंसल द्वारा ईडी को दिये गये बयान से हुई.
ईडी ने जांच के दौरान PMLA की धारा 50 के तहत लक्ष्मी नारायण बंसल का बयान दर्ज किया था. बंसल ने ईडी को दिये गये अपने बयान में कहा था कि शराब कारोबारी भाटिया से उसकी मुलाकात भुपेश बघेल के घर पर हुई थी. भाटिया 20 साल से बघेल को जानता था. भाटिया का भिलाई में फर्नीचर का व्यापार है. बघेल और भाटिया दोनों अच्छे दोस्त है. बघेल के घर पर भाटिया के साथ हुई मुलाकात में इस बात का पता चला कि भाटिया छत्तीसगढ़ के अवैध शराब बिक्री में शामिल है.
बंसल ने अपने बयान में सीएम आवास में अपने रहने की भी बात स्वीकार की है. PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज कराये गये बयान में बंसल ने कहा कि बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद भाटिया सीएम आवास रायपुर में ही सोता था. दिन में कभी कभी अपने घर चला जाता था. चुनाव के समय वह खुद (लक्ष्मी नारायण बंसल) भी सीएम हाउस में रूका था. जब वह सीएम हाउस पहुंचा तो वहां भाटिया और राम गोपाल अग्रवाल पहले से मौजूद थे. भाटिया और रामगोपाल के कमरे ग्राउंड फ्लोर पर थे. बंसल को फर्स्ट फ्लोर पर दो कमरा मिला था. एक कमरे में बंसल आपनी पत्नी के साथ रहते थे और दूसरे कमरे में उनका बेटा अपनी पत्नी का साथ रहता था.
ईडी ने लक्ष्मी नारायण बंसल को मोबाईल सहित अन्य डिजिटल डिवाईस के मिले आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद पाया कि बंसल ने शराब की अवैध कमाई में से 100 करोड़ रुपये से अधिक राजनीतिज्ञों के बीच बांटा था. यह रकम तत्कालीन मुख्यमंत्री भुपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल सहित अन्य राजनीतिज्ञों को दी गयी. चैतन्य बघेल ने शराब के अवैध धंधे से मिली रकम का इस्तेमाल रियल स्टेट के कारोबार में किया.
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