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परिजनों को देखने नहीं दिया गया, फिर पता चला मरीज की मौत हो गई
शमीम का आरोप है कि डॉक्टरों ने परिजनों को मरीज को देखने तक नहीं दिया, फिर बताया कि मौत हो गई. शमीम का आरोप है कि उन्होंने अचानक भर्ती वार्ड के शीशे से देखा तो डॉक्टर्स उनकी मां को पंप कर रहे हैं. उन्हें पता चल गया कि मां अब नहीं रही. इसके बावजूद डॉक्टर्स ने जबरदस्ती बांड भरवाया और एमआईसीयू में भर्ती करने लगे, ताकि मरीज की मौत के बाद भी भारी भरकम बिल बनाया जा सके. परिजनों ने आरोप लगाया कि मेदांता के चिकित्सकों ने मानवीय व चिकित्सा धर्म के विपरीत कार्य करते हुए मेरी मां की जान ले ली. परिजनों का आरोप है कि लापरवाही के कारण मेरी मां की मौत सीसीयू में हो चुकी थी, लेकिन एक साजिश के तहत जबरन एमआईसीयू में भर्ती कराने की कोशिश की जाती रही. इसका सीसीटीवी फुटेज हॉस्पिटल में ही मौजूद है. परिजनों ने ओरमांझी पुलिस पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है. शमीम ने बताया कि इस बाबत सीनियर एसपी और डीज़ीपी को भी लिखित रूप से अवगत करा दिया गया. मेदांता की करतूतों से मेडिकल कौंसिल ऑफ़ इंडिया को भी अवगत कराया जायेगा.इसे भी पढ़ें- भूकंप">https://lagatar.in/earthquake-tremors-shake-taiwan-heavy-damage-tsunami-alert/">भूकंपआरोप बेबुनियाद, डॉक्टरों की प्राथमिकता मरीजों की जान बचाना है : मेदांता प्रबंधन
मेदांता अस्पताल के पीआरओ जावेद ने कहा कि मरीज का इलाज डॉक्टरों के द्वारा किया जा रहा था. उन्हें प्रॉबलम था. दुर्व्यवहार की ऐसी कोई बात नहीं है. हमारी प्राथमिकता मरीज की जान बचाने की थी, लेकिन अफसोस है कि हम उन्हें नहीं बचा सके. इलाज में लापरवाही की कोई बात नहीं है.
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